फिल्म रिव्यू: 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स'

इमेज स्रोत, Tanu weds Manu Returns
- Author, मयंक शेखर
- पदनाम, फ़िल्म समीक्षक
- प्रकाशित
रेटिंग ****
बॉलीवुड में अधिकतर रोमांटिक या रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों में लड़का-लड़की को आख़िर में एक साथ दिखा देते हैं और फिल्म वहीं ख़त्म हो जाती है. लेकिन क्या फिल्में हमें उसके आगे की कहानी बताती हैं ?
आम ज़िंदगी के कई राज और सिमरन शादी कर लेते हैं, लेकिन कुछ सालों में ही उनका रोमांस ख़त्म होने लगता है. इसके बाद दोनों एक-दूसरे की उन आदतों से वाकिफ होते हैं जो उन्हें शादी से पहले नहीं पता थीं.
इस तरह के विषय पर बनने वाली फिल्मों को भला कौन देखना चाहता है, और यह फिल्म इसी मुद्दे पर बनी है.
चार साल आगे की कहानी
यह फिल्म 'तनु वेड्स मनु' के चार साल बाद की कहानी है. पहली फिल्म में तनु (कंगना रनौत) और मनु (आर माधवन) कई रुकावटों के बाद शादी करते हैं.
अब इस फ़िल्म के सीक्वल में दोनों लंदन में बस गए हैं और उन्हें एक-दूसरे से कोई ख़ास लगाव नहीं है. दोनों का कोई बच्चा भी नहीं है.
किसी कम रुढ़िवादी समाज में शायद यह दंपति तलाक ले लेता लेकिन यहां उनके लिए चीज़ें इतनी आसान नहीं हैं.
कंगना का कमाल

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मनु यानी आर माधवन को उसके पिता तीन विकल्प देते हैं. पहला ये कि वो अधिकतर लोगों की तरह शादी को बरकरार रखे. दूसरा, वो ज़िंदगी भर अकेला रहे या फिर आख़िरी विकल्प ये कि वो कोई और जीवनसाथी चुन ले.
फिल्म के निदेशक आनंद एल राय ने अपनी पिछली फिल्मों की तरह इस फिल्म के लिए भी देश के छोटे शहर को चुना है.
फिल्म में कंगना 'तनु' और 'दत्तो' का डबल रोल निभा रही हैं. दत्तो जो स्पोर्ट्स कोटा के तहत दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ रही है और हरियाणा के एक छोटे से गांव की रहने वाली है.
उसका मानना है कि मर्द या तो भाई होते हैं या फिर प्रतिद्वंद्वी. वहीं तनु के किरदार में कंगना बहुत ही ख़ूबसूरत लग रही हैं.
कंगना ने इन दोनों किरदारों को इतनी बख़ूबी निभाया है कि क्या कहने. जिस तरह से उन्होंने 'क्वीन' में सबका दिल जीत लिया था, इस बार भी वो खूब तारीफ़ बटोरने वाली हैं.
फिल्म में और क्या ख़ास

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इसमें हरियाणा के छोटे गांव और कानपुर के चमनगंज, दोनों का मज़ा ले सकेंगे.
हरियाणा के गांव में जहां जाति-धर्म का बोलबाला है, वहीं चमनगंज के लोग दूसरे के काम में टांग अड़ाना पसंद करते हैं.
फिल्म की कहानी हिमांशु शर्मा ने लिखी है जो बेहतरीन है. दूसरी तरफ दीपक डोबरियाल ने भी बेहतरीन अदाकारी की है.
कुल मिलाकर फिल्म देखकर मैं जितना हंसा हूं शायद पिछले कुछ वक़्त में इतना नहीं हंसा.
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