गाली दें या नहीं

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फ़रवरी 2015 में सेंसर बोर्ड ओर से फ़िल्म निर्माताओं के लिए ऐसे 28 शब्दों की लिस्ट जारी की गई थी जिनके इस्तेमाल पर पाबंदी थी.
इस लिस्ट को लेकर रिएलिस्टिक सिनेमा बनाने वाले फ़िल्म निर्माातओं जैसे अनुराग कश्यप, मधुर भंडारकर के अलावा कमर्शियल सिनेमा बनाने वाले लोगों ने भी आलोचना की थी.
अब 31 जुलाई को हुई सेंसर बोर्ड की 16 सदस्यों की बैठक के बाद ये ख़बर सामने आई की सर्वसमत्ति से इस लिस्ट को वापिस लिया गया है लेकिन सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने ऐसी किसी बात से इनकार कर दिया.
मुंबई से प्रकाशित होेने वाले अख़बार डीएनए के मुताबिक पहलाज निहलानी इसे अफ़वाह बता रहे हैं, "प्रतिबंधित शब्दों के इस्तमेाल को प्रतिबंध मुक्त करने का सवाल ही नही उठता. बोर्ड के सदस्य बदलाव के सुझाव दे सकते, पर बदलाव के फ़ैसले नही ले सकते."

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पहलाज निहलानी ने बीबीसी को भी फ़ोन से कहा कि वो इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं.
पहलाज ने इन ख़बरों को निहायती ग़ैरज़िम्मेदाराना बताते हुए कहा,"बोर्ड की बातचीत गुप्त रखी जानी चाहिए और अगर कोई बोर्ड सदस्य बैठक की कार्यवाही लोगों को बता रहा है तो वो ग़लत जानकारी दे रहे हैं."
फ़िलहाल इस लिस्ट को लेकर दुविधा की स्थिति है और कबीर ख़ान, मधुर भंडारकर समेत कई निर्देशक बोर्ड की अंतरिम घोषणा आने तक इस प्रतिबंधित लिस्ट को प्रभावी मान रहे हैं.
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