इंद्राणी मुखर्जी को 'खलनायिका' न बनाएं

पुलिस हिरासत में इंद्राणी मुखर्जी
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    • Author, शिवम विज
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
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जब तक मुंबई पुलिस शीना बोरा की हत्या के पीछे इंद्राणी मुखर्जी के मक़सद को नहीं बताती है, इस मामले में हमारी समझ मुख्य रूप से लोगों की कही-सुनी बातों और अनुमानों पर ही निर्भर है.

मुंबई पुलिस हत्या का मक़सद बता भी दे तो फिर भी एक पक्ष तो छूट ही जाएगा और वह है इंद्राणी का.

इंद्राणी के वकील अब जो भी कहेंगे, वह उनके क़ानूनी बचाव के लिए ही होगा. यह तब तक चलता रहेगा जब तक इंद्राणी ख़ुद यह नहीं बताएं कि उन्होंने ऐसा किया या नहीं. अगर किया तो क्यों किया.

इंद्राणी मुखर्जी ने ख़ुद अब तक अपनी बात नहीं बताई है. शायद इसी वजह से इस मामले का मीडिया कवरेज अब तक एकतरफ़ा रहा है.

वे देर सबेर निश्चय ही इस मीडिया ट्रायल का इस्तेमाल अपने प्रति सहानुभूति बटोरने के लिए करेंगी.

मीडिया में इंद्राणी मुखर्जी की छवि अब तक एक 'खलनायिका' की बनाई गई है. किसी के बारे में उसकी ग़ैर मौजूदगी में फ़ैसला सुना देना निहायत ही अनुचित है.

इससे भी बुरा है उसका पक्ष सुने बग़ैर ही उसकी छवि ख़राब करना, उसे 'राक्षसी' साबित करना.

अमानवीय अपराध?

इंद्राणी मुखर्जी

उनके वकील से अब तक सिर्फ़ यह पता चला है कि पुलिस के अनुसार इंद्राणी ने अपराध क़बूल कर लिया है. यह एक ऐसे अपराध के बारे में कहा जा रहा है जो शायद इंद्राणी ने किया ही नहीं है.

कोई भी शख़्स अदालत की ओर से अपराधी साबित होने तक निर्दोष है. पर चलिए, हम मान लेते हैं कि इंद्राणी ने शीना बोरा की हत्या की है. जो भी अपराध करे, उसे निश्चत तौर पर सज़ा मिलनी ही चाहिए.

जब लोग जघन्य अपराध करते हैं तो हम 'अमानवीय' शब्द का इस्तेमाल करते हैं.

चरमपंथ, बलात्कार, हत्या और दूसरे कुछ अपराध अमानवीय इसलिए हैं कि वे हम और आप जैसे लोगों के मानव होने को इंकार करने की कोशिश करते हैं.

आख़िर एक महिला अपनी बेटी/बहन की हत्या कैसे कर सकती है? यह मुमिकन ही नहीं है. यदि ऐसा होता है तो हम इसे कुछ भी मानें, वह मानवीय तो नहीं ही है.

महात्वाकांक्षी महिला?

इंद्राणी मुखर्जी के बेटा मिख़ाइल.
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हम इंद्राणी मुखर्जी पर फ़ैसला इस रूप से सुना रहे हैं कि वह 'छोटे शहर' की महिला है जो 'महत्वाकांक्षी' है. अपनी महत्वाकांक्षाएं पूरी करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है.

यह साफ़ करना ज़रूरी है कि छोटे शहर से होना या महत्वाकांक्षी होना या एक के बाद एक कई ब्याह करना अपराध नहीं है. साथ ही, इसमें से कुछ भी हत्या को जायज़ नहीं ठहराता.

वे बुरी बॉस थीं, उन्होंने समाचार चैनल पर काफ़ी पैसा उड़ाया, उन्होंने लोगों का इस्तेमाल किया और फिर निकाल फेंका, इस तरह की बातें इंद्राणी के बारे में कही जाती हैं.

पर उन्हें 'राक्षसनी' या 'दानव' साबित करने और उन्हें मानवीय नहीं मानने की कोशिशों के तहत ही इस तरह की बातें कही जाती हैं.

यह दिलचस्प है कि इंद्राणी के पति पीटर मुखर्जी आराम से इंटरव्यू दिए जा रहे हैं और ख़ुद को निर्दोष साबित करने में लगे हुए हैं.

वे ऐसा कर रहे हैं मानो उन्होंने इंद्राणी की कही सारी बातों पर भरोसा कर लिया था और पूरी तरह निर्दोष थे.

स्त्री-पुरुष संबंध

इंद्राणी मुखर्जी का गुवाहाटी स्थित घर
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पर ताली एक हाथ से नहीं बजती है. यदि हम इंद्राणी मुखर्जी पर यह आरोप लगाएं कि उन्होंने दूसरे लोगों का इस्तेमाल सीढ़ी की तरह किया तो इन लोगों के बारे में क्या पता चलता है?

इंद्राणी के बारे में कहा जा रहा है कि वे ऊंचे तबक़े की थीं, पैसे वाली थीं और लालची थीं. ये बातें इसलिए कही जा रही हैं कि उनकी यह तस्वीर पेश की जा सके कि वे हम लोगों की तरह सामान्य और ख़ुश नहीं थीं.

हालांकि इंद्राणी को न्याय का सामना करना ही चाहिए. लेकिन हमें भी अपने अंदर झांकना चाहिए और सोचना चाहिए कि यह मामला हमारे समाज के बारे में क्या कहता है.

यह किसने किया, एक बार इससे बाहर निकलने के बाद हमें मुंबई ही नहीं, गुवाहाटी जैसे शहरों के मुहल्लों में भी होने वाले ऑनर किलिंग और स्त्री-पुरुष रिश्तों पर सोचना चाहिए.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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