नर्सों की वापसी पर चांडी और स्वराज में ठनी

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दक्षिण भारत के 29 लोगों को लीबिया में जारी गृहयुद्ध के माहौल से बचा कर वापस भारत लाने के मामले में केंद्र और केरल सरकार के बीच खींचतान शुरू हो गई है.
केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने कहा है कि उनकी कोशिशों से लीबिया में भारतीय दूतावास ने इन नर्सों की तन्ख़्वाह मिलने में मदद की. लेकिन नर्सों ने ख़ुद ही अपना टिकट ख़रीदा है.

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उन्होंने भरोसा दिलाया है कि उनके पुनर्वास की कोशिश के लिए केरल सरकार उनकी यात्रा में ख़र्च हुआ धन उन्हें वापस लौटाएगी.
बीबीसी संवाददाता इमरान कुरैशी के अनुसार इनमें से कुछ नर्सों का कहना है कि अस्पताल के साथ उनका कॉन्ट्रेक्ट मार्च 31 को ख़त्म हो चुका था लेकिन अस्पताल ने उनका पैसा वापस नहीं किया.
उन्होंने बताया कि लीबिया के एक व्यक्ति अब्दुल जब्बार ने उनकी मदद की. भारतीय दूतावास ने उन्हें कहा कि आप टिकट लेकर निकल जाइये, लेकिन उन्होंने उनकी कोई मदद नहीं की.
लीबिया से लौटी तमिलनाडु की एक नर्स पुष्पा मेरी ने इमरान कुरैशी को बताया "वहां पर भारतीय दूतावास रखने की कोई ज़रूरत ही नहीं है."

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लेकिन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोशल मीडिया पर ओमन चांडी को जवाब देते हुए कहा "हमने केरल के हज़ारों भारतीयों को इराक़, लीबिया और यमन से बचाने में मदद की है. और आप किसने इसका ख़र्च दिया इस पर बात कर रहे हैं?"
उन्होंने कहा, "चांडी जी, अपने यह डिबेट शुरू किया है कि किसने पैसा दिया? मैंने नहीं शुरू किया. हमने हमेशा ऐसा किया क्योंकि यह हमारे नागरिकों के प्रति हमारा कर्तव्य था."

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इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने केरल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि "केरल के 6 परिवार और तमिलनाडु के 3 लोग लीबिया में कई दिनों से लापता थे. जिन्हें बचा लिया गया है."
केरल में 16 मई को विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होने वाले हैं.
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