ब्रिटेन को 'विक्की डोनरों' की सख़्त ज़रूरत

शुक्राणु
    • Author, जेम्स गैलाघर
    • पदनाम, स्वास्थ्य और विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
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ब्रिटेन में शुक्राणुओं की भारी कमी हो गई है. ब्रिटिश फ़र्टिलिटी सोसाइटी (बीएफ़एस) ने चेतावनी दी है कि समस्या इस क़दर गंभीर है कि फ़र्टिलिटी क्लीनिक निम्न स्तर के शुक्राणुओं को स्वीकार करने के बारे में भी विचार कर सकते हैं.

कुछ क्लीनिक मांग के अनुसार आपूर्ति बनाए रखने के लिए आयातित शुक्राणुओं पर निर्भर हैं.

हालांकि बीएफ़एस के चेयरमैन, डॉक्टर एलन पासे ने कहा कि उन्हें 'चिंता' यह है कि कुछ क्लीनिक गुणवत्ता के न्यूनतम स्तर को और घटा सकते हैं 'ताकि शुक्राणु देने वाले मिल सकें.'

उन्होंने कहा कि अगर निम्न स्तर का शुक्राणु इस्तेमाल किया गया तो महिलाओं को अधिक ख़र्चीली और आक्रामक तकनीक का शिकार होना पड़ सकता है.

माना जा रहा है कि <link type="page"><caption> 2005 में गुमनाम रहने का अधिकार</caption><url href="http://news.bbc.co.uk/2/hi/health/4397249.stm" platform="highweb"/></link> ख़त्म करने के बाद शुक्राणु दाता कम हो गए हैं.

बाहरी शुक्राणु बैंकों पर आश्रित

हालांकि शुक्राणु दाताओं की मांग में कमी आई है क्योंकि फ़र्टिलिटी उपचारों के चलते अब ज़्यादा पुरुष अपने बच्चों के पिता बन पा रहे हैं.

फिर भी, शुक्राणु दाताओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

ब्रिटेन में फ़र्टिलिटी पर नियंत्रण रखने वाली संस्था, ह्यूमन फ़र्टिलाइज़ेशन एंड एम्ब्रियोलॉजी अथॉरिटी (एचएफ़ईए) के आंकड़ों के अनुसार, दान दिए गए <link type="page"><caption> शुक्राणु नमूने का एक चौथाई</caption><url href="http://www.hfea.gov.uk/3413.html" platform="highweb"/></link> विदेश से आते हैं.

शुक्राणु

यह आंकड़ा वर्ष 2005 में हर दस में से एक था.

डेनमार्क और अमरीका के शुक्राणु बैंक इनके मुख्य आपूर्तिकर्ता हैं.

डॉ पासे चेतावनी देते हैं कि इससे मरीज़ों के लिए विकल्प घट रहा है और प्रतीक्षा का समय बढ़ रहा है. इससे ख़तरनाक तरीकों के इस्तेमाल की संभावना बढ़ रही है.

मसलन, अपने किसी मित्र के शुक्राणु से डीआईवाई इनसेमिनेशन (स्वयं वीर्यारोपण) या ऐसे किसी देश में उपचार करवाना शामिल है, जहां फ़र्टिलिटी को लेकर नियम कम हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "मेरी चिंता यह है कि क्लीनिक नियमों में ढील दे सकते हैं. मेरे पास इसके सबूत नहीं हैं, लेकिन मुझे लगता है कि जब देशव्यापी शुक्राणु की कमी हो तो हमें इस तरह की चीज़ों पर नज़र रखना और आगाह करना चाहिए."

लंदन के गाएज़ अस्पताल में असिस्टेड कंसेप्शन यूनिट के प्रोफ़ेसर याकूब ख़लफ़ कहते हैं, "पहले की तुलना में आज हम बाहरी शुक्राणु बैंकों पर बहुत ज़्यादा आश्रित हैं."

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