एक सिख, जिनके अधिकतर कार्टूनों में है पगड़ी

दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून
    • Author, विकास पांडे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

दलबीर सिंह का मानना है कि हास्य में किसी भी घिसी-पिटी मान्यता को बदलने की ताक़त है.

वे इसे अपने फ़ेसबुक पेज 'सिखपार्क' पर आज़मा भी रहे हैं. यह पेज मोटे तौर पर 'साउथपार्क' की एनिमेटेड सिरीज़ पर आधारित है.

दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून

उन्होंने बीबीसी से कहा कि शुरुआत में उन्होंने पश्चिमी देशों में सिख समुदाय से जुड़ी पुरानी और घिसी-पिटी मान्यता को उजागर करने के लिए कार्टून बनाए थे.

दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून

वे कहते हैं, "लोग कई बार सिखों को पहनावे और पगड़ी की वजह से तालिबान जैसे समूहों से जोड़ कर देखते हैं और सिखों को इस वजह से भेदभाव का शिकार होना पड़ता है, उन पर हमले तक हुए हैं. इसलिए मैंने साल 2007 में ये कार्टून बनाने शुरू किए."

दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून

दलबीर के एक कार्टून में इस मुद्दे को मजाकिया ढंग से उठाया गया है. एक कार्टून में एक सिख कहता है, "मैं हवाई जहाज से डेनवर जा रहा था. मेरे बगल में बैठी बुज़ुर्ग महिला ने अपनी सीट बदल ली." इस पर उसे जवाब मिलता है, "यह आपकी पगड़ी की वजह से नहीं हुआ. आप दूसरे डीओडरंट का इस्तेमाल करें."

उनके इन कार्टूनों पर लोग हंसते हैं, पर उनका मकसद इसके ज़रिए गंभीर मुद्दे उठाना भी है.

दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून

दलबीर सिंह ने बाद में सिख समुदाय के खान-पान और शादी विवाह जैसे मुद्दों पर भी गुदगुदाने वाले कार्टून बनाए.

दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून

वे कहते हैं, "सिखों से कई बार उनकी पगड़ी की वजह से निहायत ही हंसी वाले सवाल पूछे जाते हैं. इसलिए मेरे ज़्यादातर कार्टूनों में पगड़ी है."

दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून
दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून

उनका मानना है कि हास्य हमेशा शुद्ध होना चाहिए और इससे किसी की धार्मिक भावना आहत नहीं होनी चाहिए.

दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून

वे दिल्ली के उन वकीलों से सहमत नहीं है जिन्होंने सिखों से जुड़े चुटकुलों पर रोक लगाने के लिए अदालत में मुक़दमा दायर कर रखा है.

दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून
दलबीर सिंह के 'सिखपार्क' कार्टून

वे कहते हैं, "हास्य सामाजिक मुद्दों पर टिप्पणी करने का बेजोड़ माध्यम है. लोगों को थोड़े बहुत मज़ाक के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए."