दोस्तों-रिश्तेदारों के बीच सामान बेचना कितना सही?

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- Author, शाना आर शोएनबर्गर
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
- प्रकाशित
आजकल मल्टी लेवल मार्केटिंग का ज़माना है. बहुत से लोग छोटी-छोटी चीज़ें कमीशन पर बेचने का काम करते हैं.
ये सामान वो जितना बेचेंगे उतनी ही उनकी कमाई होगी. ऐसे में लोग अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को ये सामान बेचते हैं.
ऐसे में सवाल ये उठता है कि जानने वालों के बीच मुनाफ़ा कमाने की कोशिश करना किस हद तक सही है?
असल में दोस्ती और कारोबारी मुनाफ़े के बीच की लाइन धुंधली होती है.
ख़ास तौर से मल्टीलेवल मार्केटिंग के ज़रिए सामान बेचने वाली कंपनियां तो कारोबार बढ़ाने के लिए दोस्ती के रिश्ते का फ़ायदा उठाने पर ज़ोर देती हैं.
ऐसे ही एमवे, एवॉन, टपरवेयर, स्टेला एंड डॉट जैसी कंपनिया हैं, जिनके सामान घर बैठे बेचे जाते हैं.
ये कंपनियां अपने साथ जुड़े लोगों को दोस्तों-रिश्तेदारों के बीच सामान बेचने के लिए कहती हैं.
इसमें दिक़्क़त तब आती है जब आपके जानने वालों को लगता है कि आप उनसे ज़बरदस्ती कर रहे हैं.

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अपने फ़ायदे के लिए सामान उनके गले मढ़ रहे हैं. किसी को भी ज़बरदस्ती सामान थोपा जाना अच्छा नहीं लगता.
ऐसे में जो लोग भी डायरेक्ट सेलिंग का काम कर रहे हैं, उन्हें अपने जानने वालों से ज़बरदस्ती नहीं करनी चाहिए. इससे रिश्ते ख़राब होते हैं.
उनसे ये भी नहीं कहना चाहिए कि अपने जानने वालों को भी उन सामानों के बारे में बताएं जो आप बेचते हैं.
जानकार कहते हैं कि सामान अच्छा है और आपके दोस्त को आप इससे थोड़ा फ़ायदा करा सकते हैं, तो कहने में कोई हर्ज़ नहीं.
मगर ज़बरदस्ती नहीं थोपना चाहिए और दोस्तों से भी ना सुनने को तैयार रहना चाहिए.
आप अपने दोस्तों को ई-मेल के ज़रिए प्रोडक्ट की और उसको होने वाले फ़ायदे की जानकारी दें.
ये ऑफर भी दे सकते हैं कि आप अपनी तरफ़ से कुछ और डिस्काउंट दे सकते हैं.
फिर अगर वो दिलचस्पी ले तो ठीक है. वरना आपको सामान बेचने के लिए ज़ोर नहीं लगाना चाहिए.

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बेहतर होगा कि आप अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को अपने धंधे के बारे में बता दें.
अगर वो दिलचस्पी ना लें, तो दोबारा इसका ज़िक्र ही न करें. और आप जिस कंपनी के साथ काम कर रहे हैं, उससे भी इस बारे में खुलकर बात कर लें.
ये बता दें कि आप रिश्तों को ज़्यादा अहमियत देते हैं. ऐसे में अपनों के बीच उनका सामान बेच पाना आपके लिए उतना आसान नहीं होगा.
वैसे हमेशा इस तरह के कारोबारी ताल्लुक़ से नुक़सान होगा, ये भी ज़रूरी नहीं.
आपकी कंपनी के प्रोडक्ट आपके जानने वालों के बड़े काम के भी हो सकते हैं.
तो, इस बात का भी ख़्याल रखें कि अगर आपके ज़रिए आपके अपनों का फ़ायदा हो सकता है तो वो फ़ायदा उन्हें मिले.
कुल मिलाकर, अगर डायरेक्ट सेलिंग का काम एहतियात से किया जाए, तो दोस्तों-रिश्तेदारों के साथ कारोबार करना कोई बुरी बात नहीं.
कुछ कंपनियों में अक्सर सीनियर लोग बिना कारण बताए, दफ़्तर आना बंद कर देते हैं. होता ये है कि कंपनी उन्हें नौकरी से निकालती है.
मगर शर्मिंदगी से बचाने के लिए कंपनी उस सीनियर के मातहतों को बताती है कि फलां शख़्स ने ख़ुद ही नौकरी छोड़ दी है.
ऐसे में दफ़्तर में अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो जाता है. जो भी नया सुपरवाइज़र आता है, पुराने कर्मचारी उस पर भरोसा नहीं करते.

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उन्हें लगता है कि जैसे उनके पुराने सीनियर को हटाया गया, उसी तरह उन्हें भी नौकरी से निकाला जा सकता है.
तो ऐसे हालात में क्या करना चाहिए?
असल में होता ये है कि कंपनियां, कर्मचारियों से खुलकर बात करने, उन पर भरोसा करने से गुरेज करती हैं.
ऐसे में जब कोई सीनियर कर्मचारी अचानक से नौकरी से हटता है तो लोगों को लगता है कि छटनी होने वाली है.
ऐसे में टीम मैनेजर की मुश्किल ये होती है कि वो दूसरे कर्मचारियों को बता भी नहीं सकता कि उस सीनियर को किस वजह से नौकरी से हटाया गया.
कंपनी ने उस इंसान का मान रखने के लिए ये तो ठीक किया कि सच सबके सामने नहीं आने दिया.
मगर, इससे दफ़्तर का माहौल ख़राब न हो, इससे बचने के लिए भविष्य में कुछ एहतियात बरते जा सकते हैं.
जानकार कहते हैं कि जब किसी को नौकरी से निकाला जाए, तो दफ़्तर में ये कहना तो ठीक है कि फलां ने ख़ुद से नौकरी छोड़ी है.
लेकिन उसकी विदाई सलीक़े से होनी चाहिए. आप उसके लिए विदाई पार्टी रख सकते हैं.
अगर उस शख़्स को विदाई पार्टी से ऐतराज़ है, तो दफ़्तर के बाद कुछ ख़ास लोगों के साथ ड्रिंक्स या चाय-कॉफ़ी का प्रोग्राम रख सकते हैं.

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नौकरी से निकाले जा रहे शख़्स को भी ये समझाएं कि ऐसी पार्टी में आना उसके और कंपनी, दोनों के लिए अच्छा रहेगा.
कुछ न हो तो उस सीनियर के साथ बाक़ी कर्मचारियों का एक गेट टुगेदर दफ़्तर में ही कर लें, केक और कोला पार्टी के ज़रिए.
टीम मैनेजर को तो सबसे पहले कंपनी से ये पता लगा लेना चाहिए कि क्या बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी है.
अगर ऐसा नहीं है तो किसी एक कर्मचारी के निकाले जाने के बाद के माहौल को आप समझदारी से बेहतर बना सकते हैं, जिससे अफ़वाहों का दौर न चले.
निकाले गए कर्मचारी की जगह आए नए सुपरवाइज़र को कहें कि वो कर्मचारियों से मेल-जोल बढ़ाए. उनकी दिक़्क़तें जानने-समझने की कोशिश करे.
आप बाहर से किसी को बुलाकर उसे कर्मचारियों से गोपनीय तरीक़े से फीडबैक लेने को कह सकते हैं.
इससे कर्मचारी खुलकर अपनी आशंकाएं साझा कर सकेंगे. और आपको भी पता चल जाएगा कि आख़िर लोगों के बीच चल क्या रहा है?
उनकी आशंकाएं ग़लत साबित करने के लिए आप भी मातहतों से मेल-जोल बढ़ा सकते हैं.
आगे चलकर ये आपके लिए ही बेहतर साबित होगा.
(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href=" http://www.bbc.com/capital/story/20160718-should-you-ever-push-products-onto-your-friends" platform="highweb"/></link>, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)
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