वो शख़्स जिसने बदल दी हमारी ज़िंदगी

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चंडीगढ़ शहर आज़ाद भारत का पहला योजनाबद्ध तरीक़े से बसाया गया शहर है. ये भारत के सबसे ख़ूबसूरत शहरों में गिना जाता है.
क्या आपको पता है कि इस शहर का नक़्शा किसने तैयार किया था?
अगर नहीं तो चलिए हम आपको आज उस शख़्सीयत से रूबरू कराते हैं. उस आर्किटेक्ट का नाम था ली कार्बुज़ियर.
स्विटज़रलैंड में जन्मे और फ्रांस में जाकर बसे ली कार्बुज़ियर बीसवीं सदी के महान आर्किटेक्ट कहे जाते हैं. हाल ही में यूनेस्को ने सात देशों में उनकी डिज़ाइन की हुई 17 इमारतों को वर्ल्ड हेरिटेज साइट, या दुनिया की सांस्कृतिक विरासत माना है.
भारत में चंडीगढ़ शहर बसाने के अलावा भी ली कार्बुज़ियर ने कई इमारतों का नक़्शा तैयार किया था. दुनिया के कई देशों में उनकी सोच, उनकी क़ाबिलियत के नमूने मिलते हैं.

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फिर चाहे वो फ्रांस के पॉयसी में बनाए गए विला सेवॉय हों, मार्सेल शहर में बनाए गए यूनाइट डि हैबिटेशन अपार्टमेंट ब्लॉक हों या रॉनचैम्प की नॉटरडैम डू हॉट चर्च या फिर चंडीगढ़ की कैपिटॉल कॉम्प्लेक्स, हर इमारत कार्बुज़ियर की शानदार सोच की कहानी कहती है.
ली कार्बुज़ियर का असल नाम चार्ल्स एडुअर्ड ज्यांरे था. उन्होंने घड़ीसाज़ के तौर पर अपना करियर शुरू किया था. मगर बीस साल की उम्र में ही उन्हें बड़ी इमारतों से ऐसी मुहब्बत हुई, कि वो आर्किटेक्ट बन गए.
इसकी शुरुआत उनके तुर्की और एथेंस दौरों से हुई थी. जहां की शानदार पुरानी इमारतों ने ली कार्बुज़ियर का मन मोह लिया. फिर फ्रांस और जर्मनी के दौरे ने उनकी सोच और पुख़्ता कर दी. उसी वक़्त ज्यांरे ने अपना नाम बदलकर ली कार्बुज़ियर रख लिया.

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बीस और तीस के दशक में कार्बुज़ियर ने पेरिस के उपनगरीय इलाक़ों में क्यूबिस्ट विला बसाए. इससे उनकी छवि तोड़-फोड़ करने वाले के तौर पर उभरने लगी. उन्होंने अपनी इमारतों के डिज़ाइन में रेसिंग कार, नए विमानों से लेकर पुराने गिरजाघरों तक के नक़्शे उतार लिए.
ली कार्बुज़ियर की डिज़ाइन की हुई सबसे मशहूर इमारतें विला सैवॉय हैं. ये सफ़ेद इमारतें अपने वक़्त के बहुत आगे जाकर बनाई गई डिज़ाइन पर बनी थीं. उनके मुरीद जब उनका पीछा करना शुरू करते थे, तब तक तो ली कार्बुज़ियर किसी नई राह पर चल पड़े होते थे.
दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ली कार्बुज़ियर ने कंक्रीट से कला को गढ़ना शुरू किया था. इस तरह से वो कम पैसे वालों के लिए भी इमारतों का नक़्शा तैयार कर सकते थे. अपनी मौत से कुछ वक़्त पहले उन्होंने स्टील की इमारतें बनाने का सुझाव दिया था.
ली कार्बुज़ियर ने दुनिया के अलग अलग देशों में विला, म्यूज़ियम, सस्ते मकान, चर्च, सरकारी इमारतों से लेकर महल तक बनाए. उन्होंने अल्जियर्स जैसे शहर का कायाकल्प कर डाला.

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वेनिस शहर में एक अस्पताल की इमारत डिज़ाइन की. हमेशा ये माना गया कि ली कार्बुज़ियर के नक़्शे एकदम ओरिजिनल आइडिया पर बने होते थे. वो किसी की नक़ल नहीं करते थे. उनके बारे में कहा जाता है कि वो असल में कंक्रीट से कला गढ़ते थे.
ली कार्बुज़ियर की क़ाबिलियत के इतने नमूने होने के बावजूद, विरोधी उन्हें कई चीज़ों का मुजरिम मानते हैं.
विरोधियों के हिसाब से ली कार्बुज़ियर की वजह से ही आज पूरी दुनिया में ऊंची इमारतों, कंक्रीट के जंगलों का चलन इतने बड़े पैमाने पर बढ़ा है. विरोधी कहते हैं कि कार्बुज़ियर के चलते ही दुनिया भर में शहरों के नक़्श बदल गए. उनमें बदसूरती आ गई.
विरोधी चाहे जो कहें, ली कार्बुज़ियर की डिज़ाइन की गई इमारतें आज भी उनकी ज़हनियत की गवाही देती हैं. फिर चाहे अहमदाबाद की मिलओनर्स एसोसिएशन बिल्डिंग हो, या फिर डोमिनिकन रिपब्लिक की सेंट मैरी डे ला टूरे चर्च. इन शानदार इमारतों को देखकर साफ़ लगता है कि ली कार्बुज़ियर की सोच कितने ऊंचे दर्जे की थी.
पिछले साल ली कार्बुज़ियर की मौत की पचासवीं सालगिरह पर तीन फ्रेंच क़िताबें छपीं. तीनों ने ही ली कार्बुज़ियर की उपलब्धियों, उनकी कलात्मकता को एक दायरे में बांधने, छोटा कहकर आंकने की कोशिश की. एक में तो उन्हें फासीवादी तक बता दिया गया.

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वजह ये कि उन्होंने हिटलर की सरकार के साथ भी काम किया था.
जैसे कि ली कार्बुज़ियर ने अपनी क़िताब 'द रेडिएंट सिटी' में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम को बदसूरत करार दिया था.
जिसके बाद वहां के नेताओं ने बहुत सी पुरानी इमारतों को गिराकर नई बिल्डिंग्स बनाईं. जबकि स्टॉकहोम को दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान बमबारी भी नहीं झेलनी पड़ी थी. लेकिन ली कार्बुज़ियर की सलाह पर चलकर वहां के नेताओं ने शहर का नक़्शा ही बदल डाला.
ली कार्बुज़ियर के बहुत से ख़याल ग़लत थे, इसमें कोई दो राय नहीं. मगर उनकी बनाई इमारतें उनकी कला की गवाही देती हैं.
ली कार्बुज़ियर दुनियादार भी थे और संतों जैसी ख़ूबी भी रखते थे. वो बुद्धिमान भी थे और कई बार बचकानापन भी उन्होंने दिखाया. उनके राजनैतिक विचारों पर विवाद भले ही हो, मगर एक आर्किटेक्ट के तौर पर उनकी उपलब्धियां शानदार हैं. वो बीसवीं सदी के महानतम आर्किटेक्ट में से एक थे.
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