जुर्म में भी मर्दों से पीछे नहीं औरतें

रोज़मेरी वेस्ट
इमेज कैप्शन, ब्रिटेन के ताज़ा इतिहास में रोज़मेरी वेस्ट सबसे बदनाम नाम हैं.
    • Author, कैथरीन क्वार्मबाय
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
  • प्रकाशित

अपराध की दुनिया में हमेशा मर्दों का बोलबाला रहा है. लेकिन, ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि अब महिलाएं जरायम के मोर्चे पर मर्दों के कंधे से कंधा मिलाकर चलने लगी हैं.

ब्रिटेन में 1999-2000 और 2007-08 के बीच महिला अपराधियों की संख्या दोगुनी हो गई. इंग्लैंड और वेल्स की जेलों में 1993 से 2005 के बीच महिला मुजरिमों की तादाद तीन गुनी बढ़ गई. हालांकि अब ये संख्या घट रही है. लेकिन अब भी नब्बे के दशक के मुक़ाबले, जेलों में दो हज़ार ज़्यादा महिला अपराधी हैं.

आज भी किसी अपराध में महिला का नाम आने पर लोग चौंक जाते हैं. पहले के ज़माने मे महिलाएं हिंसक वारदातों में शामिल होती थीं उन्हें बहादुर समक्षा जाता था.

आज भी बहुत सी महिलाएं दुनिया के तमाम देशों की सेनाओं में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रही हैं.

हिटलर ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान क़रीब पांच लाख महिलाओं को ट्रेनिंग देकर तैयार किया था. इन्हें यहूदियों को यातना देने वाले शिविरों की निगरानी में लगाया गया था. कई बार ये महिलाएं ज़ुल्म ढाने का भी काम करती थीं. बाद में इनमें से कई महिलाओं पर युद्ध के अपराध का मुक़दमा चला था.

सीरियल किलर

रवांडा में हुए नरसंहार में भी महिलाओं का नाम आया था. कई बार वो तमाशबीन रहीं तो कई बार उन्होंने अपने हाथ से जुर्म को अंजाम दिया.

सत्तर के दशक से ही मर्दों के औरतों पर ज़ुल्म ढाने के मामलों पर ज़ोर दिया जाता रहा है. इससे हुआ ये है कि औरतों को जुर्म की तरफ़ लोगों का ध्यान जाना कम हो गया. वैसे आज की तारीख़ में अपराधों में मर्दों का हिस्सा, अस्सी फ़ीसद है.

इसका ये मतलब नहीं कि महिलाएं जुर्म नहीं करतीं. कुछ समाजशास्त्री कहते हैं कि महिलाओं की आज़ादी के नारे के साथ ही उनमें आक्रामकता आई है. यही, महिलाओं के हाथों बढ़ते जुर्म की वजह है.

वैसे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के फ्रैंसेस हीडेन्सन कहते हैं कि महिलाओं के अपराध बढ़े हैं मगर इतने भी नहीं जितने कि दावे किए जा रहे हैं.

वेस्ट का घर
इमेज कैप्शन, वेस्ट का घर, जिसे अब ढहा दिया गया है.

आमतौर पर महिलाएं अपने जानने वालों के ख़िलाफ़ ही जुर्म करती हैं. उनके ज़ुल्म के शिकार होते हैं बच्चे, विकलांग और बुजुर्ग. वो छुपकर जुर्म करती हैं. अक्सर उनके अपराध ख़्याल रखने की आड़ में होते हैं.

कई बार औरतें तमाशबीन बनकर अपराध का हिस्सा हो जाती हैं. घरों में होने वाली हिंसा में अक्सर ऐसा होता है कि औरतें, मर्दों के साथ मिलकर अपराध को अंजाम देती हैं. इसी तरह आतंकवादी घटनाओं, इंसानों और ड्रग की तस्करी में भी महिलाएं मर्दों के साथ मिलकर काम कर रही हैं.

1993 मे एक नर्स बेवर्ली एलिट को चार बच्चों के क़त्ल और कई लोगों को नुक़सान पहुंचाने के जुर्म में सज़ा हुई थी. बेवर्ली को 'एंजेल ऑफ डेथ' के नाम से जाना जाता है. अख़बारों ने इस बारे में जमकर लिखा. ब्रिटेन के डेली एक्सप्रेस ने लिखा कि महिलाओं को पालन-पोषण करना चाहिए न कि किसी का क़त्ल. नर्सों को तो देवियों की तरह ही देखा जाता है. ऐसे में उनका जुर्म करना, पूरे समाज को सदमा देने वाला था.

मायरा हिंडले
इमेज कैप्शन, इन हत्यारों की सेक्स लाइफ़ पर बहुत बातें हुई हैं, जैसे मायरा हिंडले (दाएं).

आम तौर पर महिलाएं, पुरुषों के मुक़ाबले कम आक्रामक होती हैं. उनके किरदार में एक सौम्यता होती है. वो लोगों का ख़्याल रखती हैं. उनके मुक़ाबले मर्दों की हिंसा को बहादुरी समझा जाता है. जैसे कि जंग में लोगों को मारना, वीरता कहलाता है.

वहीं जब महिलाएं हिंसा करती हैं तो या तो हम उन पर दया दिखाते हैं या फिर उनसे दूरी बना लेते हैं. जब औरतें जुर्म की दुनिया में आती हैं तो उसकी ज़्यादा चर्चा होती है. कुछ लोग कहते हैं कि अक्सर महिलाएं हिंसक पुरुषों के साथ होने पर जुर्म करती हैं.

जब औरतें अपराधी बनती हैं तो उनकी इमेज, मां या बेटी के तौर पर उनके बर्ताव की भी चर्चा होती है. लेकिन कोई भी अपराधी, अपराधी ही होता है. वो मां, बेटी या बहन नहीं होतीं.

बेसिक इंस्टिक्ट
इमेज कैप्शन, बेसिक इंस्टिक्ट जैसी फ़िल्म इसी पर बनी हैं.

हिंसक बर्ताव का बीज घर में रोपा जाता है. इंग्लैंड और वेल्स में हुए सर्वे के मुताबिक़ 27 फ़ीसद औरतें और 13 फ़ीसद मर्द, घरेलू हिंसा के शिकार हुए थे. इसका मतलब है कि इंग्लैंड और वेल्स में कुल मिलाकर पैंतालीस लाख औरतें और 22 लाख मर्द, घरेलू हिंसा के शिकार हुए. यहीं से उनके जुर्म की दुनिया में जाने की बुनियाद पड़ी.

2013 में अमरीका में हुए सर्वे के मुताबिक़ 44 फ़ीसद लेस्बियन महिलाओं के साथ उनके साथियों ने हिंसा की थी. आम औरतों के मामले मे ये आंकड़ा 35 फ़ीसद ही था.

आमतौर पर औरतों पर ज़्यादा ज़ुल्म औरतें ही ढाती हैं. ब्रिटेन में घरेलू हिंसा की शिकायत करने वाले ज़्यादातर बच्चों पर महिलाओं ने ही ज़ुल्म ढाए थे. इसी तरह घर के भीतर बच्चों से सेक्स अपराध के कुल मामलों में से दस से बीस फ़ीसद के पीछे औरतें थीं.

ब्रिटेन में एक साल से कम उम्र में मारे जाने वाले बच्चों के क़त्ल के पीछे अक्सर औरतों का हाथ पाया गया है. अक्सर महिलाएं अपने ही बच्चों से मार-पीट करती हैं. कई बार माएं अपने बच्चों को जान से ही मार देती हैं.

हिंडले की बहन और उनका भाई
इमेज कैप्शन, हिंडले की बहन और उनके पति का भाई.

अपराध करने वाली महिलाओं को माफ़ करना बेहद मु्श्किल होता है, क्योंकि उनका अपराध करना ही सदमा देने जैसा है. जानकार ये मानते हैं कि महिलाओं को हिंसक या अपराधी होने के पीछे अक्सर घरेलू हिंसा होती है. कई बार वो बचपन में बलात्कार जैसे भयानक अपराध की शिकार भी होती हैं. इसीलिए बेहतर हो कि उससे बात करके दिल को हल्का किया जाए. उन्हें माफ़ करने की कोशिश की जाए.

हम सबको महिलाओं के अपराधों को नए नज़रिए से देखना होगा. उनके साथ हमदर्दी दिखानी होगी. उनसे बात करके उनके दिल की बातें निकालनी होंगी. वरना जो काम हम अभी कर सकते हैं, वो आने वाली पीढ़ियों को करना होगा.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20160601-the-women-that-kill-abuse-and-torture" platform="highweb"/></link> करें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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