अब 44 भाषाओं में बात करेगा फ़ेसबुक!

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दुनिया भर में 170 करोड़ से ज़्यादा लोग फ़ेसबुक का इस्तेमाल करते हैं. उनमें से सिर्फ़ आधे लोग अंग्रेज़ी बोलते हैं. और बाक़ी लोग दर्जनों और भाषाएं बोलते हैं.

ऐसे में एक दूसरे के पोस्ट पढ़ना तो दूर, समझना भी मुमकिन नहीं है. फ़ेसबुक अब इस स्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है.

फ़ेसबुक पर अगर कोई ऐसी पोस्ट आपको दिखाई देती है जिसकी भाषा आप नहीं जानते हैं तो उसे तुरंत ट्रांसलेट किया जा सकता है.

लेकिन उस ट्रांसलेशन की क्वालिटी बहुत कामचलाऊ होती है और अक्सर उसका सही मतलब नहीं निकलता है.

अपने न्यूज़ फीड को और बढ़िया बनाने के लिए, यदि आप सहमत हैं तो, फ़ेसबुक आपके पोस्ट को 44 भाषाओँ में ट्रांसलेट कर सकता है.

कंपनी की कोशिश ये है कि दुनिया में फ़ेसबुक पर कोई भी हो, वो एक दूसरे से बात कर सकें. उनके बीच अलग-अलग भाषा नहीं आनी चाहिए.

ब्राज़ील और जर्मनी के फ़ुटबॉल प्लेयर या अमरीका की कोई पॉप सिंगर भी अपनी भाषा में पोस्ट करें तो आप उसे अंग्रेज़ी या हिंदी में पढ़ सकते हैं.

कई छोटी कंपनियां और जाने माने सेलेब्रिटी फ़ेसबुक पेज पर इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं. हर दिन हज़ारों छोटे कारोबारी और सेलेब्रिटी कई भाषा में अपनी पोस्ट लिख रहे हैं.

<link type="page"><caption> वायर्</caption><url href="http://www.wired.com/2016/07/fb-2" platform="highweb"/></link>ड के अनुसार ऐसे पोस्ट सात करोड़ से लोग ज़्यादा देखते हैं. फ़ेसबुक के साइज़ के हिसाब से ये अभी कम है. लेकिन जैसे जैसे ये लोगों की अपनी भाषा में दिखाई देगा, ये तेज़ी से बढ़ सकता है.

जैसे जैसे कंप्यूटर को सभी के भाषा के बारे में और जानकारी मिलती जाएगी, ये ट्रांसलेशन और भी बढ़िया होता जाएगा. इसको टेक इंडस्ट्री की भाषा में 'मशीन लर्निंग' कहते हैं.

'मशीन लर्निंग' के कारण ही फ़ेसबुक के अलावा, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी आपकी भाषा में कई और प्रोडक्ट और सर्विस लाने की कोशिश कर रही हैं.

गूगल पर आप कई भाषाओँ में ऑनलाइन ट्रांसलेशन तुरंत कर सकते हैं और भाषाओँ की संख्या धीरे धीरे बधाई जा रही है. माइक्रोसॉफ्ट ने स्काइप पर कुछ ऐसी ही सर्विस शुरू की है जिससे अपनी भाषा के अलावा दूसरी बोलियों के लोग से भी आप चैट कर सकते हैं.

कंपनियों का कहना है कि अलग अलग भाषाओँ के बारे में उन्हें और डेटा चाहिए जिसके बाद ऑनलाइन ट्रांसलेशन और सुधर जाएगा.

कई ऐसी भाषाएं हैं जो बोलने वाले लोग ऑनलाइन बहुत ज़्यादा पोस्ट नहीं करते हैं. अगर आप रोमन लिपि में अपनी भाषा में लिखते हैं तो भी काम नहीं चलेगा.

इन सभी कंपनियों की कोशिश है कि स्मार्टफोन पर आपको ये सर्विस दें ताकि आप जो भी इस्तेमाल करें उसके बारे में डेटा उस भाषा को और बढ़िया बनाने के काम में लाया जा सकता है.

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