फ़ीफ़ा: 'भ्रष्टाचार के आरोपों' का सच सामने आएगा?

फीफा के मुख्य जांचकर्ता माइकल गार्सिया अपना पद छोड़ चुके हैं
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फ़ुटबॉल की विश्व संस्था फ़ीफ़ा उस रिपोर्ट को प्रकाशित करने पर सहमत हो गई है जो वर्ल्ड कप की मेज़बानी हासिल करने की प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी है.

लेकिन फ़ीफ़ा का कहना है कि रिपोर्ट का 'क़ानूनी रूप से उचित संस्करण' ही जारी किया जाएगा.

भ्रष्टाचार के इन आरोपों की जांच फ़ीफ़ा के मुख्य जांचकर्ता माइकल गार्सिया ने की है.

लेकिन माइकल गार्सिया ने इस हफ़्ते ये कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था कि उनकी जांच के निष्कर्षों पर फ़ीफ़ा ने जो सार प्रकाशित किया है, वो गुमराह करने वाला है और उन्हें फ़ीफ़ा की नैतिक मामलों से जुड़ी समिति में कोई विश्वास नहीं रहा है.

'मेज़बानी पर असर नहीं'

फ़ीफ़ा का कहना है कि रूस और क़तर की मेज़बानी पर कोई असर नहीं होगा. रूस 2018 में जबकि कतर 2022 में विश्व कप फ़ुटबॉल की मेज़बानी करेगा.

सवालों में फीफा
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फ़ीफ़ा के अध्यक्ष सेप ब्लैटर का कहना है कि उन्होंने कार्यकारी समिति के सदस्यों से रिपोर्ट प्रकाशित करने के पक्ष में मतदान करने के लिए कहा है.

उन्होंने कहा, "हम हमेश इस बात को लेकर प्रतिबद्ध रहे हैं कि सच बाहर आना चाहिए."

वहीं गार्सिया का कहना है कि दो साल तक चली उनकी जांच को लेकर अभी तक जो फ़ीफ़ा का सार प्रकाशित किया गया है, वो 'अधूरा और त्रुटियों से भरा' है.

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