पाकिस्तान में टिकटॉक पर फॉलोअर्स को लेकर दो बहनों में झगड़ा, एक की मौत

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- Author, एहतिशाम शामी
- पदनाम, पत्रकार
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरांवाला ज़िले में दो बहनों के बीच कथित तौर पर टिकटॉक के व्यूज़ से शुरू हुए मामूली झगड़े का अंत एक बहन की हत्या के रूप में हुआ है.
लद्धेवाला वड़ैच पुलिस ने लड़कियों के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज कर 15 साल की ज़ुबिया मनाहिल की हत्या के आरोप में बड़ी बहन को गिरफ़्तार कर लिया है. बड़ी बहन की उम्र 18 साल है.
लद्धेवाला वड़ैच पुलिस स्टेशन के एसएचओ मोहम्मद अफ़ज़ल ने बीबीसी उर्दू को बताया कि अभियुक्त से हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लिया गया है.
एफ़आईआर में अब्दुल शकूर ख़ान शिकायतकर्ता हैं, जो अभियुक्त और मारी गई लड़की, दोनों के पिता हैं.
एफ़आईआर में क्या लिखा है?

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शिकायतकर्ता के मुताबिक़ वह पेशे से ड्राइवर हैं और उनकी छह बेटियां और एक बेटा है.
एफ़आईआर के मुताबिक़ उनके घर में मेहमान आए हुए थे और परिवार के सभी लोग आंगन में बैठकर बातचीत कर रहे थे कि अचानक छत से शोर सुनाई दिया. जब परिवार के लोग छत पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि दोनों बहनें 'आपस में पैसों के लेन-देन को लेकर झगड़ रही थीं.'
एफ़आईआर के मुताबिक़, ''इस दौरान बड़ी बेटी ने रसोई में रखी हुई छुरी उठाई और ज़ुबिया को मारी, जो उसकी कमर पर लगी. इससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ी.''
एफआईआर में कहा गया कि 'हम सभी परिवार के लोगों ने ज़ुबिया को शुरुआती चिकित्सा सहायता देने की काफी कोशिश की, लेकिन ज्यादा खून बह जाने की वजह से उसकी मौत हो गई.'
हत्या कैसे हुई?

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पुलिस की ओर से तैयार की गई शुरुआती रिपोर्ट इस घटना के कारणों पर रोशनी डालती है.
यह रिपोर्ट एसएचओ मोहम्मद अफ़ज़ल ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों बहनें टिकटॉक पर वीडियो बनाया करती थीं और दोनों के बीच जानलेवा झगड़े की वजह भी यही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बना.
रिपोर्ट के मुताबिक़ 'इस झगड़े के दौरान अभियुक्त ने अपनी बहन ज़ुबिया मनाहिल उर्फ आयशा की कमर पर धारदार हथियार से वार करके उसकी हत्या कर दी.'
एसएचओ मोहम्मद अफ़ज़ल ने बीबीसी उर्दू को बताया कि उन्होंने हिरासत में ली गई अभियुक्त का शुरुआती बयान दर्ज किया है.
बयान के मुताबिक़ "मृतका (छोटी बहन) के फॉलोअर्स ज़्यादा थे, जबकि अभियुक्त के फॉलोअर्स कम थे. अभियुक्त का आरोप था कि छोटी बहन उनके फॉलोअर्स चुराती थी, जिसकी वजह से दोनों में झगड़ा हुआ और बात बढ़ गई."
हालांकि अभियुक्त के रिश्तेदार गुलाम रसूल कहते हैं कि दोनों बहनों ने टिकटॉक पर वीडियो इसलिए बनाना शुरू किया था ताकि वे आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ी हो सकें.
उनका कहना है, "दोनों बहनें आज्ञाकारी और माता-पिता की बात मानने वाली थीं. वे चाहती थीं कि अपने पैरों पर खड़ी हो सकें, इसलिए अक्सर फूड व्लॉगिंग करती थीं और अलग-अलग सोशल मीडिया अकाउंट पर सक्रिय रहती थीं."
'बड़ी बहन को सरकार देगी वकील'

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मामले के शिकायतकर्ता अब्दुल शकूर कहते हैं कि वह अपनी बड़ी बेटी को सजा दिलवाना चाहते हैं.
उन्होंने बीबीसी उर्दू को बताया कि उन्होंने अपनी बड़ी बेटी को ख़ुद पुलिस के हवाले किया है और अब वह अभियुक्त की ओर से 'मामले की पैरवी नहीं करेंगे.
उनका कहना है, "जिसने मेरे हंसते-खेलते घर को बर्बाद कर दिया, मेरा अब उसके साथ कोई संबंध नहीं रहा."
आपराधिक कानूनों के विशेषज्ञ वकील शेख़ उस्मान कहते हैं कि पाकिस्तान के कानून के मुताबिक़ "किसी हिरासत में लिए गए अभियुक्त को सिर्फ इस वजह से बिना वकील के नहीं छोड़ा जा सकता कि उसके मामले की पैरवी के लिए कोई रिश्तेदार या निजी वकील मौजूद नहीं है."
शेख़ उस्मान ने बीबीसी उर्दू को बताया कि संविधान और कानून अभियुक्त को वकील के जरिए अपना बचाव करने का अधिकार देते हैं.
उनका कहना है, "अगर कोई व्यक्ति जेल में है, उसके परिवार के लोग मौजूद नहीं हैं या उसके पास कोई वकील नहीं है, तो अदालत इस बात को नजरअंदाज नहीं करती और अभियुक्त को सरकारी वकील उपलब्ध कराया जाता है, जो सरकारी ख़र्च पर अभियुक्त की पैरवी करता है."
वह बताते हैं, "पंजाब में फ्री लीगल एड कमेटी भी काम कर रही है, जिसमें पंजाब बार काउंसिल और ज़िला बार एसोसिएशनों के वकील शामिल हैं. जरूरतमंद कैदी संबंधित जेल अधीक्षक को आवेदन दे सकता है, जिसके बाद आवेदन वकील को भेज दिया जाता है."
टिकटॉक के इस्तेमाल का बढ़ता चलन

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पाकिस्तान में डिजिटल मीडिया पर शोध करने वाले अरहम शफी ने बीबीसी उर्दू को बताया कि 'नई पीढ़ी टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब से पैसे कमाने का हुनर सीख गई है और यह उनके लिए कमाई का आसान ज़रिया बन गया है."
"जिसकी वजह से युवा लड़के और लड़कियां सोशल मीडिया पर ज़्यादा से ज़्यादा फॉलोअर्स बनाने और व्यूज़ हासिल करने की कोशिश करते हैं."
अरहम शफी के मुताबिक़ टिकटॉक पाकिस्तान में अपने मोनेटाइजेशन कार्यक्रम के तहत सीधे पैसे का भुगतान करता है.
वह कहते हैं, "जिन लोगों के टिकटॉक अकाउंट मोनेटाइज़्ड हैं, उन्हें एक हज़ार व्यूज़ पर 40 सेंट से एक डॉलर तक मिलते हैं, जिसका आसान मतलब यह है कि दस लाख व्यूज़ पर 400 से एक हज़ार डॉलर तक कमाए जा सकते हैं, जो पाकिस्तानी मुद्रा में अच्छी-खासी रकम बन जाती है."
अरहम शफी ने आगे बताया कि 'पाकिस्तान में अक्सर लोग अमेरिका या ब्रिटेन में रजिस्टर्ड अकाउंट इस्तेमाल करते हैं क्योंकि इससे उन्हें ज़्यादा भुगतान मिलता है. पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक स्थिति सबके सामने है.'
उनका कहना है, "सोशल मीडिया पारंपरिक नौकरियों की कमी की वजह से पार्ट टाइम या फुल टाइम आय का एक अच्छा जरिया बन चुका है. टिकटॉक पर आपको दौलत और शोहरत दोनों मिल जाती हैं. लेकिन यह पूरा खेल फॉलोअर्स और व्यूज़ का है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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