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छोटे से घर और तबेले से निकले एक शानदार रैपर की कहानी
दिल्ली का एक आम और छोटी कॉलोनी जैसा दिखने वाला इलाक़ा. लेकिन यहीं की गलियों में से एक में मिला हमें एक लड़का जो सवेरे चार बजे उठकर गायों का गोबर साफ़ करता है, दूध निकालता है, मोटरसाइकल पर उसे बेचने जाता है और लौटकर सोता नहीं, बल्कि एक तरह से अपनी अलग दुनिया में जाग जाता है, क्योंकि वो लिखने बैठ जाता है.
ये कहानी है सुमित की, जो कोई आम रैपर नहीं हैं. वो हर रोज़ एक नई चुनौती से लड़ रहे हैं, लेकिन हार नहीं मान रहे. हां, इस बात से निराश ज़रूर हैं कि लोग उनकी आर्ट की कद्र तो करते हैं, लेकिन जब उन्हें पता लगता है कि वो कहां से आते हैं, तो उनका अंदाज़ बदल जाता है. और ये बात उन्हें बहुत खलती है.
इसी वजह से वो यहां से बाहर निकलना चाहते हैं, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, वो शब्दों से, अपनी रैप से रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर कमेंट करते रहते हैं.
गायों, मुर्गियों और दूसरे कई जानवरों से प्यार करने वाले सुमित की कहानी कई मायनों में हमें ज़िंदादिली का एहसास कराती है. चलिए दिल्ली के भंवर सिंह कैंप की एक छोटी सी गली में रैपर सुमित के घर और तबेले में...मज़ा आएगा, इसकी गारंटी है बॉस!
प्रेज़ेंटर: विदित मेहरा और सोनाली सिंह
कैमरा: संदीप यादव और कार्तिक बिष्ठ
एडिटिंग: संदीप यादव
प्रोड्यूसर: भरत शर्मा
आर्टवर्क: पुनीत बरनाला और वासिफ़ ख़ान
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित