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पेशाब करने के बाद फिर से बूंद-बूंद टपकना, किस बीमारी के लक्षण और क्या है इलाज
- Author, ओंकार करम्बेलकर
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
पेशाब करने के कुछ सेकंड बाद या शौचालय से बाहर आने के बाद अचानक पेशाब टपकना पोस्ट मिक्टुरेशन ड्रिबलिंग या पीएमडी कहलाता है.
हालांकि यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन यह कई पुरुषों के दैनिक जीवन, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.
आम धारणा यह है कि पीएमडी उम्र के साथ होता है, लेकिन वास्तव में, पीएमडी युवाओं (पुरुषों) में भी उतना ही आम है. कमजोर पेल्विक फ्लोर मांसपेशियां, यूरीनरी रिटेंशन और पेशाब करने से जुड़ी खराब आदतें इसके मुख्य कारण हैं.
हालांकि सही व्यायाम और कुछ तकनीकों को अपनाकर इस स्थिति को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.
पीएमडी क्यों होता है, इसके सटीक वजह, महत्वपूर्ण लक्षण और वास्तव में कौन से इलाज मददगार होते हैं, इसे समझना इसकी सुधार की दिशा में पहला कदम है.
कई पुरुषों को पेशाब करने के तुरंत बाद पेशाब टपकने, अंडरवियर गीला होने या शौचालय से बाहर आने के बाद असहज महसूस होने जैसी समस्याएं होती हैं. हालांकि यह असुविधा आम है, फिर भी पुरुष अक्सर इसके बारे में बात करने में हिचकिचाते हैं.
पीएमडी का मामला अक्सर शर्मिंदगी या उपहास के डर से दबा रह जाता है या इस गलत धारणा कि 'यह केवल बुढ़ापे में होता है' और यह कोई गंभीर समस्या नहीं है.
पीएमडी क्या है?
पीएमडी का मतलब है पेशाब करने के बाद पेशाब का रिसाव होना.
इसका मुख्य लक्षण शौचालय से बाहर आने के कुछ सेकंड या मिनट बाद अचानक पेशाब टपकना है.
यह समस्या अक्सर यूरीनरी ट्रैक्ट के निचले हिस्से (बल्बर यूरेथ्रा) में थोड़ी मात्रा में पेशाब के फंसे रहने के कारण होती है.
कई पुरुष इस समस्या को सीधे प्रोस्टेट ग्रंथि से जोड़ते हैं और बेवजह डर में जीते हैं. कुछ लोग इंटरनेट पर गलत जानकारी पढ़कर भ्रमित हो जाते हैं, जबकि अन्य इसे पूरी तरह से अनदेखा कर देते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमडी एक गंभीर बीमारी नहीं है और यह अक्सर पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियों की ताक़त में कमी, पेशाब निकलने के मार्ग (यूरीनरी ट्रैक्ट) में थोड़े से पेशाब के रह जाने या सुस्त जीवन शैली की वजह से होती है.
ठाणे के केआईएमएस अस्पताल में सलाहकार यूरोलॉजिस्ट (मूत्र रोग विशेषज्ञ) डॉक्टर अकिल खान कहते हैं, "पेशाब करने के बाद पेशाब की कुछ बूँदें निकल आना, यानी पोस्ट मिक्टुरेशन ड्रिबलिंग 'असंयमित पेशाब' की पारंपरिक श्रेणी में नहीं आता. यह पेशाब करने में परेशानी की एक अलग श्रेणी में आता है."
पेल्विक फ्लोर क्या है?
पेल्विक फ़्लोर पेट के निचले हिस्से में स्थित मांसपेशियों, ऊतकों और लिगामेंट्स की एक मजबूत लेकिन लचीली परत होती है. यह पूरी संरचना एक झूले या सपोर्ट नेट की तरह काम करती है और ब्लैडर, पेशाब की नली, आंत और पुरुषों में प्रोस्टेट ग्लैंड को स्थिरता देती है.
ये मांसपेशियां इन अंगों का भार संभालती हैं और शरीर के खड़े होने या चलने के दौरान उन्हें सही स्थिति में बनाए रखती हैं.
इन मांसपेशियों का एक और महत्वपूर्ण काम पेशाब और मल को नियंत्रित करने वाले वाल्वों (स्फिंक्टर) को उचित सपोर्ट देना है.
सांस लेने, खांसने, छींकने, वज़न उठाने और व्यायाम करने के दौरान जब पेट में दबाव बढ़ता है, तो इस तनाव को पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियाँ झेल लेती हैं और अंगों को उचित स्थिरता देती हैं.
पीएमडी किसे होता है और क्या इसका संबंध प्रोस्टेट से है?
पीएमडी का सबसे आम कारण पेल्विक फ़्लोर की ख़राब या कमज़ोर की मांसपेशियां हैं, जो पेशाब की अंतिम बूंदों को बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार होती हैं.
इसकी वजह से पेशाब के बाद कुछ पेशाब की नली में फंस जाता और फिर रिसने लगता है. यह सुस्त जीवन शैली वाले किसी भी पुरुष में हो सकता है.
आम तौर पर एक और ग़लत धारणा यह है कि पीएमडी का सीधा संबंध प्रोस्टेट से है. वास्तव में, कुछ मामलों में, प्रोस्टेट का बढ़ना इसका कारण हो सकता है; लेकिन अधिकांश पुरुषों, विशेषकर युवाओं में, प्रोस्टेट की कोई बीमारी नहीं होती है.
युवाओं में पीएमडी मांसपेशियों के काम से जुड़ी समस्या है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पीएमडी के साथ केवल स्पॉटिंग के अलावा अन्य लक्षण भी हों, तो इसकी जांच अवश्य करानी चाहिए.
जैसे पेशाब करते समय जलन, पेशाब की धार कमजोर होना, पेशाब करने में जोर लगाना, बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून आना या पेल्विक में दर्द होना.
पेल्विक फ्लोर से जुड़े व्यायाम की भूमिका
इस बीमारी से जुड़े लक्षणों का इतिहास और एक साधारण शारीरिक जांच इसके इलाज में मदद कर सकते हैं. कभी-कभी यूरोफ्लोमेट्री या पेशाब के विश्लेषण जैसी जांच कराने की सलाह दी जाती है.
इसके इलाज में सबसे अहम है पेल्विक फ़्लोर के व्यायामों को सही ढंग से करना.
डॉक्टर अकील ख़ान कहते हैं, "इसका निदान मुख्य रूप से लक्षणों के इतिहास और शारीरिक परीक्षण पर आधारित होता है. हालांकि व्यक्ति ख़ुद भी कुछ पैटर्न देख सकता है, जैसे पेशाब करने के बाद भी लगातार बूंद-बूंद पेशाब आना. हालांकि, किसी गंभीर वजह की पुष्टि के लिए उचित जांच ज़रूरी है."
उनका कहना है, "पीएमडी के मामले में पेल्विक फ्लोर व्यायाम सबसे अहम हैं. 'यूरेथ्रल मिल्किंग' का मतलब है पेशाब करने के बाद स्क्रोटम (अंडकोष) के पिछले हिस्से पर हल्का दबाव डालना, जिससे बचा हुआ पेशाब बाहर निकल जाता है."
कीगल व्यायाम (पेल्विक फ़्लोर का व्यायाम) को गलत या अनियमित तरीके से करना एक आम बात है. इसलिए उचित मार्गदर्शन ज़रूरी है. जब तक संक्रमण या प्रोस्टेट बढ़ने जैसी कोई समस्या न हो, दवा की कोई ज़रूरत नहीं होती है."
पीएमडी के साथ देखी जाने वाली गंभीर समस्याओं के लक्षण
यदि आपको पीएमडी है लेकिन साथ ही अन्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो ये किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं.
मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में यूरोलॉजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉक्टर श्याम वर्मा कहते हैं, "पीएमडी के साथ पेशाब में खून आना, जलन, बुखार, पेरिनियल एरिया में दर्द, कमजोर बहाव या बार-बार संक्रमण जैसे लक्षण इस बात का संकेत हैं. आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए."
पीएमडी अक्सर यूरीनरी ट्रैक्ट (मूत्रमार्ग) के निचले हिस्से से संबंधित अन्य समस्याओं के साथ होता है. अतिसक्रिय मूत्राशय में पहले से ही बार-बार पेशाब आने और पेशाब करने की तीव्र इच्छा होती है, जिससे पेशाब करने के बाद बूंद-बूंद पेशाब आना और भी कष्टदायक हो जाता है.
डॉक्टर वर्मा कहते हैं, "प्रोस्टेटाइटिस में मूत्राशय की अतिसंवेदनशीलता, सिकुड़न या सूजन, ये सभी मूत्र के टपकने को प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि मूत्रमार्ग के पूरी तरह से खाली न होने की संभावना अधिक होती है."
घर पर ख़ुद कैसे रखें नज़र
पीएमडी से पीड़ित लोगों के लिए इससे जुड़े रिकॉर्ड रखना मददगार हो सकता है. इसमें पेशाब टपकने का समय, ऐसा कितनी बार होता है, इस मात्रा और टॉयलेट में थोड़ी देर रुकने से कोई फर्क पड़ता है या नहीं, जैसी जानकारी दर्ज की जा सकती है.
अगर लक्षण बढ़ रहे हैं, तो डॉक्टर की मदद ज़रूरी है.
इस संबंध में डॉ. वर्मा कहते हैं, "यह डायरी (रिकॉर्ड) उपयोगी है, क्योंकि इससे लक्षणों का पैटर्न स्पष्ट हो जाता है. लेकिन अगर लक्षण बने रहते हैं, तो सिर्फ़ खुद पर नज़र रखना काफी नहीं है, डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है."
उन्होंने आगे कहा, "दवा की ज़रूरत तभी होती है जब कुछ बूंदों के निकलने का कोई गंभीर कारण हो. पेल्विक फ्लोर ट्रेनिंग और यूरेथ्रल मिल्किंग पीएमडी के लिए सबसे उपयोगी और प्रमाणित तकनीकें हैं."
डॉक्टर वर्मा का कहना है कि कीगल व्यायाम करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है.
उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी गलतियाँ गलत मांसपेशियों को कसना, पेट, नितंब या जांघ की मांसपेशियों का अत्यधिक उपयोग करना, सांस रोकना, अनियमित रूप से व्यायाम करना या कुछ ही दिनों में फौरन नतीजे की उम्मीद करना हैं."
वह कहते हैं, "कई पुरुष 'कसने' वाले (स्क्वीजिंग) व्यायाम करते हैं, लेकिन उन्हें पेल्विक फ़्लोर की मांसपेशियों को ठीक से संकुचित (कॉन्ट्रैक्ट) करना नहीं सिखाया जाता है. उनके व्यायाम की तकनीक व्यायाम कितना इन्टेंस है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है."
पीएमडी का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
हालांकि इलाज के लिहाज से यह गंभीर समस्या नहीं है , फिर भी पीएमडी कई पुरुषों में शर्मिंदगी, चिंता और आत्मविश्वास में कमी का कारण बन सकता है.
इससे परेशान लोगों में कपड़ों पर दाग लगने के डर से या सामाजिक तौर पर उपहास के हालात से बचने की आदत भी देखी जाती है.
डॉक्टर वर्मा ने कहा, "कई मरीज पीएमडी के बारे में बात करने में हिचकिचाते हैं. लेकिन इसमें शर्मिंदा होने का कोई कारण नहीं है क्योंकि यह एक सामान्य और इलाज होने लायक परेशानी है."
यदि आप अपनी जीवनशैली में कोई महत्वपूर्ण बदलाव करना चाहते हैं, अपने आहार में बदलाव करना चाहते हैं, या शारीरिक व्यायाम शुरू करना चाहते हैं, तो डॉक्टर और एक योग्य प्रशिक्षक की मदद लेना महत्वपूर्ण है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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