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मानव सभ्यता के इतिहास की सबसे डेंजरस पार्टी ट्रंप की पार्टी: नॉम चोम्स्की
जाने माने अमरीकी विद्वान नॉम चोम्स्की ने कहा है कि अमरीका की रिपब्लिकन पार्टी मानव सभ्यता के इतिहास की सबसे ख़तरनाक पार्टी है.
लंदन में यूनिवर्सिटी ऑफ़ रीडिंग के दौरे पर आए चोम्स्की ने बीबीसी से ख़ास मुलाक़ात में ये बात कही.
दशकों से सार्वजनिक रूप से समाजवाद का समर्थन करते रहे 88 साल के नॉम चोम्स्की अमरीका के सत्ताधारी वर्ग की तीखी आलोचना के लिए जाने जाते रहे हैं.
बीबीसी के साथ साक्षात्कार में उन्होंने ट्रंप की नीति को गोरों के दबदबे को बढ़ावा देने वाला बताया.
पढ़ें चोम्स्की के साक्षात्कार के अंश-
अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों में डोनल्ड ट्रंप के जीतने का क्या कारण था?
विकल्प के रूप में डेमोक्रेटिक पार्टी ने 40 साल पहले ही मेहनतकश वर्ग के सामने घुटने टेक दिए थे.
कोई भी राजनीतिक दल अब उनकी नुमाइंदगी नहीं करता. रिपब्लिकन ये दावा करते हैं कि वो उनके नुमाइंदे हैं, लेकिन असल में वो उनके दुश्मन हैं.
हालांकि ट्रंप का राजनीतिक संदेश धार्मिक आबादी और गोरों के दबदबे को संबोधित था.
क्या आप सोचते हैं कि कोई नस्लवादी रुख था?
बेशक! हालांकि इस तरह के मतदाताओं की तादाद कितनी थी इस पर विवाद है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि ईसाई चरमपंथियों के एक बड़े हिस्से को ट्रंप ने उकसाया, जो कि अमरीकी आबादी में खासी बड़ी संख्या में हैं.
ट्रंप के आने से अमरीकी संस्थानों को जो नुकसान पहुंचा है, क्या थोड़े समय के लिए है या स्थायी है?
ये नुकसान कर रहा है और पूरे ग्रह को नुक़सान पहुंचा रहा है.
ट्रंप के चुनाव का अहम पहलू खुद डोनल्ड ट्रंप नहीं है, बल्कि इसका संबंध रिपब्लिकन पार्टी से भी है, जिसने जलवायु परिवर्तन के मामले में दुनिया को अकेला छोड़ दिया है.
आप रिपब्लिकन पार्टी को धरती का सबसे ख़तरनाक संगठन बताते हैं, ऐसा क्यों?
और मानवता के इतिहास का भी. जिस समय मैंने ये कहा था तो इस पर बहुत विवाद हुआ था, लेकिन ये सच्चाई है.
क्या ये उत्तर कोरिया के किम जोंग उन या कथित इस्लामिक स्टेट से भी ख़तरनाक है? क्या कथित इस्लामिक स्टेट इंसानी वजूद के दृष्टिकोण को ख़त्म करने की कोशिश कर रहा है?
मेरे कहने का मतलब है कि हम केवल जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं बल्कि इस दौड़ में रफ़्तार को और बढ़ा रहे हैं.
रिपब्लिकन इस बात को मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है, आपका क्या कहना है?
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप वाकई मानते हैं या नहीं. जो लोग ईशा मसीह में सच्चा विश्वास करते हैं उन्हें बड़ा भरोसा होता है कि उन्हें बचाने के लिए वो ज़रूर आएंगे.
लेकिन अगर लोगों का विज्ञान में भरोसा है या नहीं, इसका नतीजा ये होगा कि हम अधिक से अधिक जीवाश्म ईंधन खर्च करेंगे, हम विकासशील देशों को सब्सिडी नहीं देंगे और हम ग्रीन हाउस गैसों को कम करने वाले वाले नियमों को ख़त्म करेंगे तो इसके नतीज़े और भयंकर होंगे.
अगर आप शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में नहीं गड़ाए हुए हैं तो आपको इन गंभीर ख़तरों को पहचानना होगा.
यूरोपीय संघ की वकालत करने वाले इमैनुएल मैक्रों फ़्रांस का आम चुनाव जीत गए हैं. क्या आप समझते हैं कि आप सफल होंगे? क्या यूरोप में यह लोकप्रियतावाद का ख़ात्मा है?
मैक्रों की जीत, बड़े संस्थानों के ढहने का एक बढ़िया उदाहरण है.
वो एक स्वतंत्र उम्मीदवार हैं और जिन्होंने उन्हें वोट किया, उन्होंने ली पेन की वजह से ऐसा किया. ली पेन वाकई ख़तरनाक हैं.
ब्रिटेन में चुनाव और लेबर पार्टी के उम्मीदवार जेरेमी कोर्बिन को लेकर आपकी क्या राय है?
अगर मैं ब्रितानी वोटर होता, मैं जेरेमी कोर्बिन को वोट देता. मैं समझता हूं कि कोर्बिन एक बढ़िया और सभ्य इंसान हैं.
मैं सालों से उन्हें क़रीब से देख रहा हूं. मैं समझता हूं कि लेबर पार्टी की मुख्य समस्या प्रोग्राम की कमी का होना और मेहनतकश वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं करना है.
आप जूलियन असांज और विकिलीक्स के बड़े समर्थक रहे हैं. हालांकि अधिकांश प्रगतिशील इस संगठन पर भरोसा नहीं करते. आप क्या सोचते हैं?
मैं मानता हूं कि असांज के ख़िलाफ़ उत्पीड़न के आरोप ग़लत है और उन पर लगाए आरोप बेबुनियाद हैं. आरोप वापस ले लेने चाहिए ताकि वो आज़ाद हो सकें.
मैं समझता हूं कि उनके ख़िलाफ़ मुकदमा फर्जी है. स्वीडन के अधिकारियों द्वारा पूछताछ किए जाने का कोई कारण नहीं है. अगर वो क़ैद रहते हैं (दूतावास में) तो ऐसा इस डर के कारण होगा कि कहीं अमरीका पकड़कर उन पर मुकदमा न दायर कर दे.
इसी कारण से एवर्ड स्नोडेन अभी भी रूस में हैं.
क्या असांज के लिए चिंता की कोई बात है?
बिल्कुल. बहस इस बात पर है कि क्या विकिलीक्स सूचनाओं को प्रकाशित करना जारी रखेगा.
विकिलीक्स ने निजी और क़ानूनी ईमेल्स को चुराया और उसे सार्वजनिक कर दिया. इस बारे में आपकी क्या राय है?
हालांकि उन्होंने जो कुछ किया उससे मैं सहमत नहीं हूं और नहीं जानता कि वे क्या छापते हैं क्या नहीं.
लेकिन मैं सोचता हूं कि राजनीतिक प्रतिनिधि क्या करते हैं और क्या छिपाते हैं, इसकी जानकारी जनता तक पहुंचाने का विचार अच्छा है.
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