आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
ट्रंप के बचाव में सामने आए रूसी राष्ट्रपति पुतिन
रूस के साथ संबंधों को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर उठ रहे सवालों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब सामने आए हैं.
अमरीकी मीडिया ने ट्रंप पर आरोप लगाया था कि उन्होंने रूसी विदेश मंत्री के साथ ख़ुफ़िया गोपनीय सूचनाएं साझा की हैं. ट्रंप ने अब तक इन आरोपों से इनकार किया है. अब पुतिन ने भी इससे इनकार किया है.
पुतिन ने कहा कि अगर अमरीकी कांग्रेस और सीनेट अनुरोध करते हैं तो वो उस मीटिंग का रिकॉर्ड जारी कर देंगे.
इससे पहले ट्रंप पर आरोप लगे थे कि उनकी टीम के संबध रूस से हैं और ट्रंप ने इससे संबंधित जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी.
अमरीकी मीडिया में पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी के एक मेमो के हवाले से कहा है कि ट्रंप ने अपने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक फ्लिन और रूस के संबंधों की जांच रोकने को कहा था.
इन दोनों मुद्दों के कारण व्हाइट हाउस विवादों मे है.
पहला मुद्दा: रूसी मीटिंग
पिछले बुधवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोफ़ और रूसी राजदूत किसल्याक से मुलाक़ात की थी.
यह मुलाकात तब हुई जब एफ़बीआई और अमरीकी कांग्रेस 2016 में हुए अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में कथित रूसी हस्तक्षेप की जांच कर रही है. इस मुलाकात के एक दिन पहले ही ट्रंप ने कोमी को एफ़बीआई निदेशक के पद से बर्खास्त कर दिया था.
सोमवार को वॉशिंगटन पोस्ट ने ख़बर छापी कि ट्रंप ने रूसी अधिकारियों को इस्लामिक स्टेट से जुड़ी गोपनीय सूचना दी थी. वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा कि इस वजह से सूचना का स्रोत यानी इसराइल संकट में पड़ सकता है.
अख़बार के मुताबिक ये सूचनाएं काफ़ी संवेदनशील थीं और अमरीका को इन्हें साझा करने का अधिकार नहीं था.
ट्रंप का बचाव
ट्रंप ने रूसी विदेश मंत्री के साथ सूचना साझा करने के क़दम का बचाव किया. उन्होंने कहा कि कथित इस्लामिक स्टेट समूह के खिलाफ लड़ाई मजबूत करने के लिए रूस के साथ जानकारी साझा करने का उन्हें पूरा अधिकार है.
उधर अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एचआर मैकमास्टर ने कहा कि इस मामले में राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ भी ग़लत नहीं किया है.
बुधवार को पुतिन ने कहा कि मीटिंग के बारे में जैसा कहा जा रहा है वैसा था नहीं. उन्होंने कहा, ''मैंने लावरोफ़ से बात की है. मुझे इस मामले में फटकारने के लिए मजबूर होना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने कुछ भी गोपनीय जानकारी साझा नहीं की है.''
इसराइल की सफ़ाई
इसराइल ने मंगलवार को कहा कि अमरीका को इसराइली खुफिया तंत्र से मिली जानकारी रूस के साथ साझा करने के आरोपों के कारण दोनों देशों के संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
अमरीका के लिए इसराइली दूत रॉन डरमर का कहना था कि अमरीका के साथ साझा किए जा रही गोपनीय सूचनाओं के मामले में उनके देश को अमरीका पर पूरा भरोसा है.
अमरीकी राजनीति में उथलपुथल
इस मामले में डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने औपचारिक तौर पर राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और रूस के बीच संबंधों की जांच करने के लिए एक स्वतंत्र जांच कमीशन बनाए जाने की मांग की है.
प्रतिनिधि सभा की इंटेलिजेंस कमेटी के एडम स्चिफ के अनुसार ये कमीशन राजनीतिक दवाब से परे होगा और मौजूदा जांच दलों की तुलना में इसके पास अधिक संसाधन होंगे.
उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन नेताओं को भी इस प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए.
हालांकि रिपब्लिकन स्पीकर पॉल रायन ने इस संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है.
दूसरा मुद्दा: कोमी का मेमो
एफ़बीआई निदेशक जेम्स कोमी अमरीकी चुनाव में कथित रूसी हस्तक्षेप की जांच कर रहे थे. इस मामले में ट्रंप के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्लिन को रूसी राजदूत से मुलाकात पर सरकार को गुमराह करने के मामले में पद छोड़ना पड़ा था.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार को कहा कि कोमी ने एक मेमो में लिखा था कि ट्रंप के साथ 14 फ़रवरी को उनकी बैठक हुई थी.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कोमी को फ्लिन मामले में जांच बंद करने को कहा था.