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ब्रिक्स में पहली बार लिया गया जैश, लश्कर का नाम
चीन में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहली बार चरमपंथी संगठनों के नामों की लिस्ट रखी गई है. विदेश मंत्रालय में सचिव प्रीति सरन ने सम्मेलन को लेकर मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यह बताया.
प्रीति सरन ने कहा, ''आतंकवाद पर सभी को एकजुट होकर बात करने की जरूरत है. और ये बात अब लोगों को समझ आ रही है. ब्रिक्स देशों के सदस्य कहीं न कहीं आतंकवाद का शिकार रहे है. अब सभी को मिलकर इसके ख़िलाफ़ काम करने की जरूरत है. आप इस पर दोहरा रुख नहीं रख सकते.''
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स में आतंकवाद का मुद्दा उठाया. ब्रिक्स के बाकी सदस्य देशों के नेताओं ने भी आतंकवाद की कड़ी निंदा की और इसके ख़िलाफ़ ऐक्शन की ज़रूरत पर जोर दिया.
सरन ने बताया कि पहली बार ब्रिक्स में हक्कानी नेटवर्क, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तोएबा जैसे चरमपंथी संगठनों का नाम सार्वजनिक तौर पर लिस्ट किया गया.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कट्टरता के ख़िलाफ़ विश्व के सभी देशों से एकजुट होने की अपील की और यह भी कहा कि भारत कट्टरता के ख़िलाफ एक ग्लोबल समिट बुलाएगा.
पीएम मोदी ने कहा- युवाओं को दें मौका
इसके पहले प्लैनरी सेशन में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रिक्स देश युवाओं को लेकर काम करें और युवाओं को महत्वपूर्ण योजनाओं का हिस्सा बनाएं.
उन्होंने सभी देशों को आपस में संबंध मज़बूत करने और महिला सशक्तिकरण पर भी जोर दिया.
प्रधानमंत्री ने आपदा प्रबंधन, कृषि में सहयोग के साथ स्किल, स्वास्थ्य, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के योगदान को भी सराहा.
प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे केंद्रीय बैंकों को अपनी क्षमताओं को और बढ़ाना होगा और प्रत्यावर्तनीय रिजर्व व्यवस्था और आईएमएफ के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा गठबंधन से सौर ऊर्जा एजेंडे को और मज़बूत कर सकते हैं.
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