आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में अमरीका ने पाकिस्तान को किया ब्लैकलिस्टः पाक उर्दू प्रेस
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में अमरीका का पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करना, इमरान ख़ान की अपने मंत्रियों को फटकार, पाकिस्तान और तालिबान की बातचीत जैसे मुद्दे छाए रहे.
सबसे पहले बात अमरीका और पाकिस्तान की.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार अमरीका ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है.
अमरीका ने पाकिस्तान को उन दूसरे देशों के साथ ब्लैक लिस्ट कर दिया है जहाँ अमरीका के अनुसार अल्पसंख्यकों को धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है.
चीन, ईरान, सऊदी अरब, इरीट्रिया, म्यांमार, उत्तर कोरिया, सूडान, तज़ाकिस्तान, तुर्केमेनिस्तान इस लिस्ट में पहले से शामिल हैं और पाकिस्तान उसमें नया नाम जुड़ गया है.
पाक एक साल से वॉच लिस्ट में था
अख़बार के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि अमरीकी संसद की वार्षिक रिपोर्ट की सिफ़ारिश पर पाकिस्तान को उस सूची में डाला गया है.
एक साल पहले ही अमरीका ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए उसे वॉच लिस्ट में डाल रखा था और कहा था कि वो अपने घर में अल्पसंख्यकों को मिलने वाली धार्मिक स्वतंत्रता में और सुधार करे.
अख़बार जंग के अनुसार ब्लैक लिस्ट किए जाने के बाद अमरीका पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगा सकता था पर पाकिस्तान के कड़े विरोध के कारण फ़िलहाल अमरीका ने पाबंदी का फ़ैसला टाल दिया है.
'अमरीका का पक्षपातपूर्ण फ़ैसला'
पाकिस्तान ने अमरीका के इस फ़ैसले को एक तरफ़ा और पक्षपातपूर्ण क़रार दिया था.
पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता डॉक्टर फ़ैसल ने एक बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान को अपने अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए किसी दूसरे के मशविरे की ज़रूरत नहीं.
अख़बार जंग के अनुसार अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एक आदेश जारी कर पाकिस्तान को किसी भी आर्थिक पाबंदी से छूट दे दी है.
अख़बार एक्सप्रेस ने सुर्ख़ी लगाई है, ''अमरीका ने घुटने टेक दिए, पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट पर छूट दे दी.''
अख़बार के अनुसार अमरीका के फ़ैसले पर पाकिस्तान ने सख़्त विरोध जताया था. अमरीकी राजदूत को विदेश मंत्रालय बुलाकर पाकिस्तान की नाराज़गी बता दी गई थी और दूसरे ही दिन अमरीका ने ये कह दिया कि पाकिस्तान पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगेगी.
विदेश मंत्रालय का कहना था कि ये बेहतरीन मौक़ा है कि अमरीका में इस्लामोफ़ोबिया की बढ़ोतरी के कारण की निष्पक्ष जांच करवाई जाए.
और अब बात इमरान ख़ान के कड़े तेवर की.
इमरान ख़ान ने ख़ैबर पख़्तूख़्वान प्रांत में अपनी पार्टी की सरकार के मंत्रियों को जमकर फटकार लगाई है.
पेशावर में शेल्टर होम के उद्घाटन समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि उनकी सरकार ने इस प्रांत में अच्छा काम किया है तभी जनता ने उनकी पार्टी को दोबारा मौक़ा दिया है.
लेकिन इस मौक़े पर अपने मंत्रियों को नसीहत देते हुए कहा कि अगर किसी मंत्री ने काम नहीं किया तो उसकी ख़ैर नहीं. इमरान के इस भाषण को सारे अख़बारों ने पहले पन्ने पर छापा है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त ने सुर्ख़ी लगाई है, ''डिलेवर नहीं किया तो डंडे पड़ेंगे. जो ब्यूरोक्रेट काम नहीं करता उसे निकाल दें: इमरान ख़ान''.
अख़बार दुनिया ने सुर्ख़ी लगाई है, ''जो काम करेगा, वही रहेगा: इमरान ख़ान''.
अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा कि जो मंत्री ऑफ़िस नहीं जाएगा तो उन्हें पता चल जाएगा और फिर उस मंत्री को निकाल दिया जाएगा.
उन्होंने अपने मंत्रियों को नसीहत देते हुए कहा कि बाद में ये मत कहना कि मंत्रालय चला गया.
इसी मौक़े पर इमरान ख़ान ने कहा कि अमरीका और तालिबान के बीच बातचीत शुरू हो रही है.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार इमरान ख़ान का कहना था, ''हमने अमरीका के 'डू मोर' की मांग पर ऐसा जवाब दिया कि वो आज हमसे तालिबान के साथ बातचीत कराने की बात करता है.''
इमरान ख़ान ने अपने विरोधियों पर और विदेशी मीडिया पर तंज़ करते हुए कहा, ''यही बात मैं पहले भी करता था, जिसपर मुझे तालिबान ख़ान का ख़िताब दे दिया गया.''
अख़बार दुनिया के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा है कि सोमवार यानी 17 दिसंबर से अमरीका और तालिबान के बीच बातचीत शुरु होगी और पाकिस्तान ने ही इन दोनों की बातचीत करवाई है.