इंस्टाग्राम से ज़ाहिर होता है आपका डिप्रेशन

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- Author, एमा एटकिंसन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
- प्रकाशित
चाहे आप एक बेहतरीन नज़ारे के बीच तस्वीर ले रहे हों, एक प्यारे से पालतू जानवर के साथ या फिर लज़ीज़ खाने की थाली के साथ. इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें यह दिखाती हैं कि ज़िंदगी बहुत ही खुबसूरत है. लेकिन एक नए शोध के मुताबिक़ सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई कई तस्वीरें असल में यह भी बता सकती हैं कि कहीं आप अवसाद से तो नहीं घिरे हैं.
हार्वर्ड के एक अध्ययन के मुताबिक़ ब्लू, ग्रे, गहरे रंग के, या फिर फ़िल्टर का इस्तेमाल कर रंगीन तस्वीरों को ब्लैक एंड व्हाइट में बदला गया हो, तो ऐसी तस्वीरें अवसाद में घिरे होने का इशारा हो सकती हैं.

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शोधकर्ताओं का मानना है कि फोटो शेयरिंग ऐप मानसिक रोग को जानने का एक नया तरीक़ा हो सकता है, लेकिन क्या सोशल मीडिया पर बहुत ज़्यादा शेयर करने या फिर डींगे मारने की आदत भी हमें इस हालत में पहुंचाने के लिए ज़िम्मेदार है.
जर्मनी की दो यूनिवर्सिटी के एक पुराने अध्ययन से पता चलता है कि फ़ेसबुक पर पेसिव फ़ॉलॉइंग से कई यूज़र्स में जलन और अपमान की भावना पैदा हो जाती है, इसमें छुट्टियों के दौरान ली गई तस्वीरों की सबसे बड़ी भूमिका होती है.
पत्रकार जेसिका विंटर के मुताबिक, "असल में सोशल मीडिया कॉकटेल पार्टी में सबसे ज़्यादा नाश करने वाला फ़ेसबुक नहीं है... यह उपाधि तो इंस्टाग्राम को जाती है."
वो कहती हैं कि सुंदर, फ़िल्टर्ड सेल्फ़ी और पिक्चर परफ़ैक्ट लाइफ़स्टाइल दूसरे स्तर पर पहुंच चुका है.

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बॉडी डिस्मोर्फिया, अवसाद और चिंता को झेल चुके हास्य कलाकार जुलियट बर्टन भी मानते हैं कि सोशल मीडिया बेकार हो सकता है.
विंटर कहती हैं, "लोगों का मानना है कि एक तस्वीर में हज़ारों शब्द होते हैं, लेकिन ये पूरी कहानी नहीं होती. आप नहीं जानते कि इन तस्वीरों के पीछे क्या चल रहा होता है. सोशल मीडिया पर होने के नाते यह पूरी तरह से हमारे व्यक्तित्व, हमारे बारे में एक संदेश देता है, लेकिन अब भी हम नहीं जानते कि इन सबका क्या मतलब है."
'मैड गर्ल' की लेखक और पत्रकार ब्रायनी गोर्डन कहती हैं कि सेल्फ़ीज़ में एक तरह से दिलासा होती है.
ओसीडी डिप्रेशन को झेलने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक ग्रुप बनाया है.

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वो बताती हैं, "मैं अपने को पूरी तरह से अकेला महसूस करती थी. ठीक वैसे ही जैसे कोई मानसिक रोगी महसूस करता है. इस विषय पर लिखने के बाद ही मैंने सकून में महसूस किया."
तो क्या सोशल मीडिया से सेहत को भी लाभ मिल सकता है?
ब्रायनी के मुताबिक, सोशल मीडिया के माध्यम से ही मैं बहुत सारे नए लोगों से मिली और उनसे मुझे बहुत सपोर्ट मिला. आपकी मदद का यह केवल एक तरीक़ा तो नहीं हो सकता, लेकिन यह आपको एहसास दिलाने के लिए मददगार हो सकता है कि आप अकेले नहीं है.
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