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सोशल-'विफलताओं का स्मारक बनाने के लिए 48000 करोड़'
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को संसद में 2017-18 के लिए बजट पेश किया. जेटली ने जैसे ही बजट भाषण में यूपीए सरकार की चर्चित महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा का बजट बढ़ाने की घोषणा की, सोशल मीडिया में इस पर चर्चा होने लगी.
अरुण जेटली ने मनरेगा के लिए बजट राशि 37,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 48,000 हज़ार करोड़ रुपए करने का ऐलान किया, ट्विटर पर मनरेगा ट्रेंड करने लगा.
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वो भाषण शेयर होने लगा जिसमें उन्होंने कहा था, "मनरेगा आपकी (यूपीए) की विफलताओं का जीता-जागता स्मारक है. क्योंकि आज़ादी के 60 साल के बाद आपको लोगों को गड्ढे खोदने के लिए भेजना पड़ा."
वारिंदर बरार ने ट्वीट किया, "एक सनकी बंदे ने दूसरों की "विफलताओं का स्मारक" बनाने के लिए आज आम बजट में 48 हजार करोड़ रख दिए!"
सुवोजीत ने ट्वीट किया, "मनरेगा का बजट 48 हज़ार करोड़. प्रधानमंत्री मोदी के लिए आज का दिन निश्चित तौर पर दुख देने वाला होगा."
अमित तिवारी ने लिखा, "जिस व्यक्ति ने मनरेगा की कड़ी आलोचना की थी, वो उसी योजना को सबसे अधिक पैसा दे रहा है."
एक यूजर ने ट्वीट किया, "कहां गई बुलेट ट्रेन....लौट के फिर मनरेगा पर आए."
नवीन खेतान ने ट्वीट किया, "बजट में मोदी की स्मार्ट सिटी और बुलेट ट्रेन नहीं थी. वे अब यूपीए के मनरेगा पर फोकस कर रहे हैं."
भारतीय जनता पार्टी ने मनरेगा के बजट में बढ़ोतरी का स्वागत किया है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट किया, "मनरेगा का बजट बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी."
कांग्रेस नेता संजय झा ने ट्वीट किया, "उस वक्त को याद कीजिए जब आप लोगों ने ट्विटर पर मनरेगा का मज़ाक उड़ाया था. आपके मोदीजी अब हमारी विरासत पर ज़िंदा हैं."
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