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जब सचिन पर लगा था बॉल टैम्परिंग का इल्ज़ाम
एक ब्रिटिश अख़बार ने राजकोट में खेले गए पहले भारत-इंग्लैंड टेस्ट के दौरान कप्तान विराट कोहली के बॉल से छेड़छाड़ के आरोप से जुड़ी ख़बर छापी है.
हालांकि, इंग्लैंड की टीम ने इस बारे में कोई शिकायत नहीं की है और नियमों के मुताबिक़ अब इस मामले में कोई संज्ञान लिया भी नहीं जा सकता.
कुछ दिन पहले दक्षिण अफ़्रीका के कप्तान फ़ेफ़ डु प्लेसी पर भी इसी तरह का इल्ज़ाम लगा था और सज़ा के तौर पर उनकी मैच फ़ीस काट ली गई.
हालांकि, इस तरह का आरोपों का सामना करने वाले ये दोनों अकेले नहीं हैं. इनसे पहले कई खिलाड़ियों पर ये आरोप लग चुका है.
लेकिन क्रिकेट की दुनिया उस वक़्त सकते में आ गई थी कि जब इस जगत के सबसे सम्मानीय खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर पर इस तरह का आरोप लगा.
साल 2001 में जब भारतीय टीम दक्षिण अफ़्रीकी दौरे पर थी, तो दूसरे टेस्ट के अंतिम दिन मैच रेफ़री माइक डेनिस के फ़ैसले ने तूफ़ान मचा दिया.
उन्होंने सिरीज़ के आख़िरी टेस्ट में तेंदुलकर पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया और ये सब कुछ सिरीज़ के दूसरे टेस्ट में हुआ.
आरोप था कि तेंदुलकर ने गेंद से छेड़छाड़ की है. ज़िक्र किया गया उस वीडियो फ़ुटेज का, जिसमें तेंदुलकर बॉल की सीम पर उंगलियां घुमाते दिख रहे थे.
मैच रेफ़री ने इसी मैच में अलग-अलग कारणों से अन्य भारतीय खिलाड़ियों पर भी कार्रवाई का फ़ैसला किया, लेकिन सबसे ज़्यादा बवाल हुआ सचिन पर लगे आरोप को लेकर.
वीडियो फ़ुटेज को देखकर ये नहीं कहा जा सकता था कि तेंदुलकर ने बॉल की स्थिति में कोई बदलाव किया है.
अपनी सफ़ाई में सचिन ने कहा कि वो गेंद की सीम से मिट्टी हटाने की कोशिश कर रहे थे.
इस घटना के बाद टीम इंडिया ने स्पष्ट कर दिया कि अगले मैच में डेनिस की मौजूदगी बर्दाश्त से बाहर है. भारतीय बोर्ड भी टीम के साथ खड़ा था.
डेनिस के ख़िलाफ़ भारत में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए.
दौरा संकट में था, सो दक्षिण अफ़्रीकी बोर्ड ने डेनिस को अगले मैच से हटा दिया और आईसीसी ने तीसरे टेस्ट का आधिकारिक दर्जा वापस ले लिया.