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महेंद्र सिंह धोनी के दस्ताने: 'कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी ऐसा करे तो?'
- Author, नवीन नेगी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के दस्ताने इस समय चर्चा का केंद्र बने हुए हैं.
धोनी ने क्रिकेट विश्व कप में भारत के पहले मुक़ाबले में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ ये दस्ताने पहने थे जिस पर 'रेजिमेंटल डैगर' का निशान बना हुआ था.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने इंडियन पैरा स्पेशल फ़ोर्सेज़ से जुड़े इस चिह्न पर आपत्ति ज़ाहिर करते हुए इसे हटाने का आदेश दिया है.
वहीं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और भारत सरकार इसे देशभक्ति और राष्ट्र की भावना से जोड़कर देख रहे हैं.
पर आईसीसी ने दो-टूक कह दिया कि धोनी ने नियमों का उल्लंघन किया है और उन्हें अपने दस्तानों को बदलना ही होगा.
इस पर बीसीसाई ने विवाद आगे न बढ़ाने के संकेत दिए हैं. क्रिकेट प्रशासक समिति के प्रमुख विनोद राय ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "हमारा रुख़ साफ़ है. हम आईसीसी के नियमों के साथ ही चलेंगे. हम किसी नियम के ख़िलाफ़ नहीं जाना चाहते, हम खेल भावना वाले देश हैं."
क्या कहते हैं नियम?
पर इससे पहले देश के खेल मंत्री किरेन रिजिजू से लेकर सोशल मीडिया पर तमाम लोग इसे राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ चुके थे. शुक्रवार को भारत में #DhoniKeepTheGlove यानी 'धोनी दस्ताने पहने रहिए' जैसे ट्रेंड ट्विटर पर बने रहे .
सवाल उठता है कि आखिर धोनी का विशेष बलों के प्रतीक चिह्न वाले दस्ताने पहनना कितना जायज़ था और कितना ग़लत?
बात करते हैं आईसीसी के खिलाड़ियों पर लागू होने वाले ड्रेस कोड और उससे जुड़े नियम की.
आईसीसी के नियम D.1 के मुताबिकः
खिलाड़ी के कपड़ों और खेल की अन्य वस्तुओं पर राष्ट्रीय चिह्न, व्यवसायिक लोगो, प्रतियोगिता का लोगो, उत्पाद को बनाने वाली कंपनी का लोगो, बल्ले के स्पॉन्सर का लोगो, किसी चैरिटी या गैर-व्यवसायिक लोगो को तय नियमों के आधार पर ही लगाने की अनुमति मिलती है. अगर कोई भी खिलाड़ी इन तय नियमों से बाहर कोई अन्य प्रतीक चिह्न का प्रदर्शन करता है तो मैच के अधिकारी, जैसे ही उस पर ग़ौर करेंगे, वो उस प्रतीक चिह्न को हटाने या छिपाने का आदेश दे सकते हैं.
आईसीसी के नियम L के मुताबिक
अगर तय नियमों के बाहर किसी विशेष प्रतियोगिता या मैच के लिए कोई टीम अलग से प्रतीक चिह्नों का इस्तेमाल करना चाहती है तो इसके लिए उस टीम के क्रिकेट बोर्ड को मैच या सिरीज़ शुरू होने से पहले आईसीसी से उसकी अनुमति लेनी होगी.
आईसीसी के नियम G.1 के मुताबिकः
किसी खिलाड़ी या टीम के अधिकारी को ऐसा कोई भी संदेश दर्शाने वाला कपड़ा या अन्य चीज़ मैच के दौरान अपने पास रखने की इजाज़त नहीं है जिसके बारे में आईसीसी को नहीं पता हो. इसके अलावा आईसीसी किसी भी खिलाड़ी या अधिकारी को ऐसा उत्पाद मैदान में ले जाने की इजाज़त नहीं दे सकता जिससे किसी तरह का राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय संदेश दिया जा रहा हो. इस मामले में आईसीसी के पास अंतिम निर्णय करने का अधिकार रहेगा. अगर किसी भी तरह के प्रतीक चिह्न को देश का क्रिकेट बोर्ड इजाज़त दे देता है लेकिन आईसीसी उस पर आपत्ति दर्ज करवाता है तो उस प्रतीक चिह्न के साथ अंतरराष्ट्रीय मैच में उतरने की इजाज़त नहीं मिलेगी.''
क्या धोनी ने तोड़ा नियम?
महेंद्र सिंह धोनी ने अपने दस्तानों में सुरक्षा बलों से जुड़े विशेष प्रतीक चिह्न को लगाया था. इस चिह्न से भले ही किसी तरह का राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय संदेश प्रसारित नहीं होता हो लेकिन फिर भी यह आईसीसी के उस नियम का उल्लंघन है जिसमें बताया गया है कि इस तरह के चिह्न पहनने से पहले आईसीसी की अनुमति लेना ज़रूरी है.
क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली इस संबंध में कहते हैं, ''विश्व कप एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है जहां भारत के अलावा बाकी के नौ देश भी हिस्सा ले रहे हैं. इसमें सिर्फ बीसीसीआई की नहीं चल सकती.''
''आईसीसी का भी अपना एक कद है, अगर वह इस तरह नियमों के उल्लंघन के बाद भी चुप रह जाता तो उसकी साख के लिए यह अच्छा नहीं होता. भले ही बीसीसीआई बहुत शक्तिशाली बोर्ड हो लेकिन उसे भी आईसीसी के नियमों के तहत ही खेलना होगा.''
वहीं वरिष्ठ खेल पत्रकार बिनो जॉन इस संबंध में कहते हैं कि आईसीसी अगर इस मामले में धोनी को रियायत बरत देता तो आने वाले वक़्त में इसके बहुत बुरे परिणाम देखने को मिलते.
'पाकिस्तान अगर ऐसा करे तो कैसे रोकेंगे?'
महेंद्र सिंह धोनी को पैराशूट रेजिमेंट में लेफ़्टिनेंट कर्नल की मानद रैंक दी गई है, ऐसे में कहा जा रहा है कि उनके पास सेना से जुड़े ख़ास बैच को पहनने का अधिकार मिल जाता है.
इस मामले में वरिष्ठ खेल पत्रकार बिनो जॉन कहते हैं, ''क्या सेना का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं किया जाता, कई देशों में तो सेना सीधे तौर पर सत्ता से जुड़ी होती है. ऐसे में धोनी अगर राष्ट्रभक्ति दिखाने के लिए भी यह चिह्न लगा रहे थे तो वह ग़लत था.''
बिनो जॉन कहते हैं, ''मान लीजिए अगले दिन पाकिस्तानी खिलाड़ी अपनी सेना के किसी ऐसे प्रतीक चिह्न के साथ मैदान में उतर जाएं जिससे भारत के हितों का टकराव होता हो, फिर आप कैसे उन्हें रोक पाएंगे.''
कुछ-कुछ ऐसी ही राय क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली की भी है. वो कहते हैं, ''महेंद्र सिंह धोनी को अपनी देशभक्ति दिखाने के लिए किसी तरह के प्रतीक चिह्न लगाने की ज़रूरत नहीं है. वो भारत के सम्मानित खिलाड़ी हैं, उन्होंने भारत के लिए क्रिकेट में जो किया है वह अपने-आप में देश का गौरव है. इस तरह के प्रतीकों के ज़रिए सिर्फ़ ग़लत उदाहरण ही पेश किए जा सकेंगे.''
विजय लोकपल्ली कहते हैं कि अगर धोनी इस प्रतीक चिह्न को दस्तानों पर लगाना ही चाहते थे तो उन्हें बीसीसीआई से आग्रह करना चाहिए था कि आईसीसी से इस संबंध में मंजूरी ले ली जाए.
ठीक इसी तरह की इजाज़त बीसीसीआई ने इसी साल भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए एक वनडे मैच के लिए भी ली थी. जिसमें पूरी भारतीय टीम ने फ़ौजी रंग वाली टोपी पहनी थी. उस समय बीसीसीआई ने इसके लिए आईसीसी से अनुमित मांगी थी और आईसीसी इसके लिए मान भी गया था.
हेलमेट पर राष्ट्रीय ध्वज या तिरंगा
राष्ट्रीय चिह्नों या प्रतीकों को मैच के दौरान इस्तेमाल करने पर कई बार विवाद हो चुके हैं. भारतीय क्रिकेटर्स अपने हेलमेट पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने की मांग करते रहते थे. कई क्रिकेटर अपने हेलमेट पर तिरंगा लगाते रहे हैं.
साल 2005 में भारत सरकार ने बीसीसीआई की अपील के बाद यह आदेश दिया था कि खिलाड़ी अपने हेलमेट पर तिरंगा लगा सकते हैं लेकिन वह पूरा राष्ट्रीय ध्वज ना हो. इसका मतलब था कि तिरंगे के बीच अशोक चक्र ना लगा हो.
भारत सरकार का मानना था कि खिलाड़ी मैच के दौरान कई बार मैदान पर गिरते हैं, ऐसे में राष्ट्रीय ध्वज को लगाने से उसका अपमान माना जा सकता है.
तिरंगे से ही जुड़ा किस्सा महेंद्र सिंह धोनी के साथ भी जुड़ा है. जिसमें बताया जाता है कि वो अपने हेलमेट पर तिरंगा नहीं लगाते. इसके पीछे वजह बताई जाती है कि धोनी को अक्सर विकेटकीपिंग करते वक़्त अपना हेलमेट उतारकर ज़मीन पर रखना पड़ता है.
मैदान पर खिलाड़ी जिन चीजों का इस्तेमाल करते हैं, उसके कई तरह के मतलब निकाले जाते हैं. ऐसे में उनसे जुड़े नियमों का पालन होना भी बहुत आवश्यक है.
हाल ही देखा गया था रविंद्र जडेजा क्रिकेट के मैदान में जिन जूतों को पहनकर उतरे थे उन पर 'राजपूत' शब्द लिखा था. इसके बाद रविंद्र जडेजा को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था.
धोनी दस्तानों के मामले में एक तबका इसे देशभक्ति की अभिव्यक्ति से जोड़ रहा है लेकिन आईसीसी इसे दो बार इसे नियमों का उल्लंघन बता चुका है.
रविवार को जब धोनी ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ ओवल के मैदान पर उतरेंगे तो सबकी नज़र उनके विकेटकीपिंग दस्तानों पर होगी.
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