किम जोंग-उन के मरने की अफ़वाह बार-बार क्यों फैलती है?

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- Author, लॉरा बिकर
- पदनाम, चीन संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया में किम जोंग उन की नई तस्वीरें सामने आई हैं.
इन तस्वीरों में वह एक ऐसे व्यक्ति के लिहाज़ से काफ़ी स्वस्थ दिख रहे हैं, जिसके बारे में कुछ ही घंटे पहले अफ़वाह फैली थी कि ब्रेन हैमरेज से उनकी मौत हो गई है.
उत्तर कोरिया के सरकारी अख़बार 'रोडोंग सिनमुन' ने ये तस्वीरें प्रकाशित की हैं.
इनमें 42 साल के शासक किम जोंग उन अपनी बेटी के साथ कपड़ों और जूतों की एक प्रदर्शनी देखते दिखाई दे रहे हैं.
ये तस्वीरें एक ऐसे दावे के कुछ घंटे बाद सामने आईं, जिसे अमेरिका में रहने वाले चीन के एक असंतुष्ट कार्यकर्ता ने बिना किसी सबूत के किया था.
उसने दावा किया था कि किम कोमा में चले गए थे, उन्हें इलाज के लिए बीजिंग के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और फिर उनकी मौत हो गई.
हालांकि, उत्तर कोरिया पर क़रीबी नज़र रखने वालों के लिए ऐसी अफ़वाहें अब लगभग आम हो चुकी हैं.
उत्तर कोरिया दुनिया के सबसे गोपनीय देशों में से एक है. वहाँ से आने वाली जानकारियों की पुष्टि करना अक्सर मुश्किल होता है. यही वजह है कि अटकलों और अफ़वाहों को आसानी से जगह मिल जाती है.
किम की मौत का दावा कहाँ से आया?
इस बार यह दावा वानजुन शी नाम के व्यक्ति ने किया.
वह ख़ुद को 'चाइनीज़ डेमोक्रेटिक पार्टी' का अध्यक्ष बताते हैं. इस संगठन पर चीन के अधिकारियों ने प्रतिबंध लगा रखा है.
शी इससे पहले भी ऐसे दावे कर चुके हैं, जिनकी पुष्टि नहीं हुई. इनमें चीन के नेता शी जिनपिंग की मौत को लेकर लगाई गई अटकलें भी शामिल हैं.
वानजुन शी ने दावा किया कि किम जोंग उन को गंभीर ब्रेन हैमरेज हुआ था.
उनका कहना था कि उत्तर कोरिया में इलाज की ज़रूरी सुविधाएं नहीं होने के कारण किम को बीजिंग ले जाया गया.
उन्होंने दावा किया कि बाद में किम की मौत हो गई और उनका शव गुपचुप तरीक़े से उत्तर कोरिया वापस भेज दिया गया. उनका यह भी कहना था कि उत्तर कोरिया का शासन उनकी मौत को छिपा रहा है.
लेकिन सामने आई नई तस्वीरें एक अलग कहानी कहती हैं.
2020 में भी मौत का दावा किया गया

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तस्वीरों में किम अपनी बेटी किम जू ऐ और हमेशा उनके साथ दिखाई देने वाले अधिकारियों के बीच प्रदर्शनी देखते नज़र आ रहे हैं.
हालांकि, यह ठीक-ठीक जानने का कोई तरीक़ा नहीं है कि ये तस्वीरें कब ली गई थीं. फिर भी इस दावे पर शक करने की दूसरी वजहें भी हैं.
उत्तर कोरिया की सीमाओं पर कोई हलचल नहीं है.
अगर किम जोंग उन की सेहत अचानक इतनी गंभीर हो जाती, तो शायद उत्तर कोरिया की सीमाओं के बाहर भी इसके कुछ संकेत दिखाई देते.
संभावित अस्थिरता या शरणार्थियों के आने की आशंका को देखते हुए चीन अपनी सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर सकता था.
उत्तर कोरिया के राजनयिक मिशनों के आसपास भी गतिविधियां बढ़ सकती थीं.
दक्षिण कोरिया में रहने वाले उत्तर कोरियाई लोग अक्सर चीन की सीमा पर बने अनौपचारिक संपर्कों के ज़रिए जानकारी हासिल करते हैं.
लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ.
दक्षिण कोरिया के ख़ुफ़िया अधिकारियों ने भी समाचार एजेंसी योनहाप से कहा कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है, जिससे इन ख़बरों की पुष्टि होती हो.
किम जोंग उन की मौत की यह अफ़वाह इससे पहले फैल चुकी झूठी ख़बरों जैसी ही है.
साल 2020 में उत्तर कोरिया से भागकर आए एक चर्चित व्यक्ति ने दावा किया था कि उन्हें "99 प्रतिशत यक़ीन" है कि दिल की सर्जरी के बाद किम की मौत हो गई है.
इसके कुछ ही समय बाद किम सार्वजनिक रूप से सामने आए और वह दावा ग़लत साबित हो गया.
बार-बार क्यों लौट आती हैं, ऐसी अफ़वाहें?
इसकी पहली वजह उत्तर कोरिया में सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर बनी अनिश्चितता है.
उत्तर कोरिया पर किम परिवार की तीन पीढ़ियों ने शासन किया है. लेकिन किम जोंग उन के बाद क्या होगा, इसे लेकर स्थिति उनके पूर्ववर्तियों के समय की तुलना में कम स्पष्ट है.
किम इल सुंग ने अपने बेटे किम जोंग इल को सत्ता सौंपने के लिए दशकों तक तैयार किया था.
साल 1994 में जब किम इल सुंग की मौत हुई, तब तक उत्तराधिकार की योजना पूरी तरह तैयार थी. इसलिए किम जोंग इल का सत्ता संभालना अपेक्षाकृत आसानी से हो गया.
लेकिन किम जोंग उन का सत्ता तक पहुंचना ज़्यादा तेज़ और अनिश्चित था.
साल 2008 में किम जोंग इल को स्ट्रोक आने के बाद उनके सबसे छोटे बेटे को तेज़ी से सत्ता के अलग-अलग स्तरों पर आगे बढ़ाया गया.
साल 2011 में जब उनके पिता की मौत हुई, तब तक किम जोंग उन को सार्वजनिक रूप से भावी नेता के तौर पर पेश किया जा चुका था.
इसके बावजूद किम जोंग उन को सत्ता पर अपनी पकड़ मज़बूत करने में कई साल लगे. इस दौरान उन्होंने विरोधियों को हटाया और उन लोगों को ख़त्म किया, जिन्हें वह अपने लिए ख़तरा मानते थे.
क्या बेटी किम जू ऐ बन सकती हैं उत्तराधिकारी?

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दक्षिण कोरिया की ख़ुफ़िया एजेंसी का मानना है कि किम जोंग उन शायद अपनी बेटी को उत्तराधिकारी बनाने की तैयारी कर रहे हैं.
किम जू ऐ अब बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों और सैन्य प्रदर्शनों में पहले के मुक़ाबले अधिक दिखाई देने लगी हैं.
लेकिन माना जाता है कि उनकी उम्र केवल 13 साल है.
उत्तर कोरिया का नेतृत्व अब तक किसी महिला ने नहीं किया है और किम जू ऐ को औपचारिक रूप से उत्तराधिकारी भी घोषित नहीं किया गया है.
कम उम्र के कारण सत्ता के किसी भी संघर्ष में उनकी स्थिति कमज़ोर भी हो सकती है.
उत्तराधिकार को लेकर यही अनिश्चितता बताती है कि किम जोंग उन की सेहत से जुड़ी अफ़वाहें इतना ध्यान क्यों खींचती हैं.
अफ़वाहें पूरी तरह नामुमकिन क्यों नहीं लगतीं?
इसकी दूसरी वजह यह है कि किम जोंग उन की सेहत को लेकर फैलने वाली बातें पूरी तरह असंभव भी नहीं लगतीं.
किम का वज़न ज़्यादा है और वह काफ़ी धूम्रपान करते हैं.
दक्षिण कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस कई बार चेतावनी दे चुकी है कि उनकी जीवनशैली के कारण उन्हें दिल और धमनियों से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा अधिक है.
किम परिवार में दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का इतिहास भी रहा है.
अगर किम जोंग उन के साथ कुछ होता है, तो पड़ोसी देशों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए इसके मायने बहुत गंभीर होंगे.
नेतृत्व का कोई भी अचानक पैदा हुआ संकट उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के नियंत्रण और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर मुश्किल सवाल खड़े कर सकता है.
क्या सत्ता के लिए संघर्ष कट्टरपंथी नेताओं को आक्रामक क़दम उठाने के लिए उकसा सकता है?
क्या अशांति के कारण चीन की सीमा पर शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है?
ये सवाल केवल बीजिंग और सोल को ही परेशान नहीं करते. वॉशिंगटन भी इन पर नज़र रखता है, जिसके क़रीब 28 हज़ार सैनिक दक्षिण कोरिया में तैनात हैं.
यही वजह है कि ख़ुफ़िया एजेंसियां किम जोंग उन पर बहुत क़रीबी नज़र रखती हैं, ताकि उनसे जुड़ी किसी भी ख़बर के लिए तैयार रहा जा सके.
जानकारी के मामले में 'ब्लैक होल'
उत्तर कोरिया जानकारी के मामले में अब भी एक 'ब्लैक होल' की तरह है. इसलिए वह झूठी ख़बरों का आसान निशाना भी बन जाता है.
बहुत कम लोगों को उत्तर कोरियाई नेता तक नियमित पहुँच हासिल है.
यहां तक कि ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए भी भरोसेमंद जानकारी जुटाना मुश्किल होता है.
जो जानकारी बाहर आती है, उसके साथ भी अक्सर कई सावधानियां जोड़ी जाती हैं. उसे पक्के तथ्य के बजाय 'अपुष्ट' या 'बहुत संभव' बताया जाता है.
उत्तर कोरियाई शासन पर यह शक भी किया जाता है कि वह जानबूझकर भ्रम को बढ़ावा देता है और देश के भीतर वास्तव में क्या हो रहा है, उसे छिपाने के लिए ग़लत जानकारियां बाहर आने देता है.
ऐसे में इस बात पर यक़ीन करना मुश्किल है कि वानजुन शी को इतनी अहम ख़बर मिल गई, जबकि उत्तर कोरिया पर नज़र रखना जिन लोगों का काम है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली.
हो सकता है कि वह केवल लोगों का ध्यान खींचना चाहते हों.
यह भी संभव है कि उनका मक़सद उत्तर कोरिया के साथ चीन के संबंधों को सामने लाकर बीजिंग को शर्मिंदा करना रहा हो. हालांकि, बीजिंग और प्योंगयांग के संबंधों के बारे में दुनिया पहले से जानती है.
उनका मक़सद चाहे जो भी रहा हो, उत्तर कोरिया के नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता का फ़ायदा उठाने वाले वानजुन शी पहले व्यक्ति नहीं हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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