क्या आप डोरेमोन और शिन चेन को जानते हैं?

'छोटा भीम'
इमेज कैप्शन, 'छोटा भीम', भारत में सबसे लोकप्रिय कार्टून किरदारों में से एक है.
    • Author, सुशांत एस मोहन
    • पदनाम, बीबीसी सवांददाता
  • प्रकाशित

अगर टीवी कार्टून के नाम से आपको आज भी याद आता है - मिकी माउस, डोनाल्ड डक या टॉम एंड जेरी और अगर निंजा हट्टोरी, डोरेमोन या शिन चेन आपके लिए अजूबे-अनजाने से नाम हैं तो जनाब आपको अपना कार्टून ज्ञान जल्द से जल्द रिफ़्रेश करने की ज़रूरत है. एक्शन और रोमांच से भरपूर ये कार्टून आपके बच्चों के टेलीविज़न देखने के अंदाज को बदल रहे हैं.

80 और 90 के दशक में जब भारत में छोटे पर्दे पर कार्टूनों का पदार्पण हुआ तब लोगों के सामने कुछ ही विकल्प थे जिनमें डिज़्नी के मिकी माउस, डोनाल्ड डक या हन्ना-बारबरा कृत टॉम एंड जेरी का नाम लिया जा सकता है.

लेकिन माहौल बदल चुका है. आजकल शरारती बच्चा शिन चेन, अपनी क्लासमेट को इंप्रेस करने की कोशिश करता नाबालिग नोबिता और दुश्मनों की पिटाई करता छोटा भीम बच्चों के दिलों पर राज कर रहे हैं.

पांचवीं क्लास में पढ़ने वाले रोहित का हीरो डोरेमोन है और उसे भी अपनी क्लासमेट शुजुका जैसी नज़र आती है जिससे वह “दोस्ती” करना चाहता है.

वहीं रोशनी जो नौवीं क्लास में पढ़ती है, उसके हिसाब से शिन चेन से अच्छा किरदार कोई है ही नहीं क्योंकि शिन चेन से बातों में कोई नहीं जीत सकता.

शिन-चेन
इमेज कैप्शन, मनोचिकित्सों के हिसाब से शिन-चेन जैसे कार्टून किरदारों की बढ़ती लोकप्रियता चिंता का विषय है.

बच्चे भले ही इन कार्टूनों को कितना भी पसंद करें लेकिन अभिभावकों को लगता है कि इनमें ऐसा कंटेंट आता है जो किसी भी तरह से बच्चों के लिए सही नहीं है.

फ़िक्र करने की बात

आठवीं क्लास के शुभम की मां ने बताया “शुभम को होमवर्क कराने में काफ़ी परेशानी होने लगी है क्योंकि वह अक़सर शिन चेन से सीखकर पेट दर्द का बहाना करता है.”

वहीं प्राइवेट स्कूल में टीचर और एक बच्चे की मां रूपा ने बताया, “क्लास में बच्चे अक़सर शिन चेन की तरह बर्ताव करते हैं और काफ़ी अजीब तरह के जवाब देते हैं, जो एक सामान्य बच्चा कभी नहीं करेगा.”

ये बात वाकई चिंता का सबब है क्योंकि 90 के दशक में कार्टून्स जैसे गूफ़ी, अलादीन, डक टेल्स कुछ सामाजिक संदेश समेटे होते थे लेकिन आजकल कार्टून चरित्रों में अश्लीलता और तिरस्कार की भावना ज़्यादा भरी है. इन कार्टून किरदारों के लिए आवाज़ देने वाले कलाकारों का मानना है कि आजकल का ट्रेंड यही है.

परीग्ना हैरी पॉटर में हरमायनी और कार्टून किरदार छोटा भीम की आवाज़ डब करती हैं. उन्होंने बताया, “हम ये ध्यान देते हैं कि कोई भी ऐसी बात या कंटेंट न जाए जो बच्चों के लिए हानिकारक है.”

जावेद जाफ़री
इमेज कैप्शन, जावेद जाफ़री, नए कार्टून किरदारों पर बदतमीज़ी के आरोपों को नकारते हैं.

वहीं नचिकेत जो कई कार्टून किरदारों की आवाज़ निकालते हैं उनके अनुसार, “ये वयस्क कंटेंट वाले कार्टून वो हैं जो बाहर नहीं चल पाए और चैनलों को कम दाम पर मिल जाते हैं ऐसे में चैनल भी इन्हें खूब दिखाते हैं. बच्चों को इनकी आदत हो जाती है और फिर बच्चे उनकी नकल करते हैं.”

लेकिन हिंदी भाषा के लिए सबसे पहले मिकी माउस के किरदार को अपनी आवाज़ दे चुके मशहूर एक्टर जावेद जाफ़री इस बात से सहमति नहीं रखते कि ये नए कार्टून बदतमीजी की सीमा लांघ रहे हैं.

उन्होंने कहा, “मेरे हिसाब से ये कार्टून चरित्र एक नई लेयर ऑफ ह्यूमर लेकर आ रहे हैं और बच्चों से ज़्यादा ये बड़ों के लिए हैं और समय के साथ टेस्ट भी तो बदल जाता है.”

लेकिन लेयर्स या परतों के नाम पर परोसी जा रही अश्लीलता को क्या जावेद अपने बच्चों को दिखाएंगे तो उनका जवाब “ना” में था.

दबाव बनाते कार्टून

मनोचिकित्सक विशाल छाबड़ा का मानना है कि ट्रेंड के नाम पर ये कार्टून बच्चों को 'पियर प्रेशर' दे रहे हैं.

डॉक्टर विशाल ने बताया, “अभी हाल ही में एक ऐसा मामला मेरे सामने आया जहां बच्चे ने एक कार्टून किरदार नोबिता जैसे व्यवहार करना शुरू कर दिया था. उसके अभिभावकों को काफी देर बाद बच्चे में इस बदलाव का पता चला.”

उनकी मानें तो, "ये पूरी तरह से अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों पर निगरानी रखें, कार्टून लगाकर बच्चों को छोड़ देने से काम नहीं चलता उनके साथ बैठकर उन्हें गलत और सही में फ़र्क समझाना पड़ता है."

'टॉम एंड जेरी'
इमेज कैप्शन, बच्चों के लोकप्रिय रहे 'टॉम एंड जेरी' की लोकप्रियता भारतीय टेलीविज़न में अब कम हो रही है

ऐसा नहीं है कि अच्छे और आदर्शवादी कार्टून मौजूद नहीं हैं लेकिन आजकल बच्चों को “ही-मैन” की सीख नहीं “निंजा हट्टोरी” की किक ही पसंद आती है ऐसा कहना है टेलीविज़न समीक्षक पूनम सक्सेना का.

उन्होंने कहा, “डिज़्नी के कार्टून्स भले ही साफ सुथरे और प्यारे लगें लेकिन ये वक़्त के साथ उबाऊ हो चुके हैं. समाज बदल गया है, आजकल बच्चे भी थोड़ा मसाला और ऐक्शन पसंद करते हैं. रहस्य-रोमांच उन्हें भी आकर्षित करते हैं. ऐसे में शिन चेन या डोरेमोन से उन्हें ये मिलता है तो क्या बुरा है. कार्टून से ज़्यादा बच्चे अपने आसपास के वातावरण और अभिभावकों से सीखते हैं इसलिए अभिभावकों को अपने आचरण पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है.”

बात यहां पर आदर्शवादी होने की नहीं है. बात है बच्चों पर पड़ रहे बुरे असर की. अगर आपका बच्चा भी ऐसे ही कार्टून पसंद कर रहा है तो उसे डांटने की नहीं उसके साथ बैठकर समझाने की ज़रूरत है कि कार्टून क्या है और क्या हक़ीक़त.

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