हिंदी-चीनी भाई-भाई मुमकिन क्यों नहीं

शी जिनपिंग नरेंद्र मोदी
इमेज कैप्शन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत आ चुके हैं.
    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
  • प्रकाशित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने चीन का दौरा करने वाले हैं. वो गुजरात के मुख्यमंत्री की हैसियत से चीन गए थे जहाँ उनका स्वागत एक राष्ट्रीय नेता की तरह हुआ था.

इस बार प्रधानमंत्री के रूप में बीजिंग में शायद उनका स्वागत और भी शानदार हो.

शायद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पाकिस्तान में चीनी मदद वाले उस इकोनोमिक कॉरिडोर पर भी बात हो जिस पर चीन और पाकिस्तान के बीच 46 अरब डॉलर का समझौता हुआ है.

इस आर्थिक गलियारे से चीन की पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के रास्ते अरब महासागर तक सीधी पहुँच हो जायेगी.

ये गलियारा चीन की उस विशाल योजना का एक हिस्सा है जिसे आम तौर से 'समुद्री सिल्क रोड' के नाम से जाना जाता है और जिसपर चीन 40 अरब डॉलर खर्च कर रहा है.

लगभग 3000 किलोमीटर लम्बा ये रास्ता कश्मीर के उस हिस्से से होकर गुज़रेगा जो भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित है.

चिंतित भारत

लद्दाख में चीन भारत सीमा
इमेज कैप्शन, लद्दाख में सीमाक्षेत्र को लेकर चीन और भारत के बीच विवाद है.

भारतीय मीडिया और विशेषज्ञों के अनुसार भारत इसे लेकर चिंतित है.

मैं वर्ष 1993 में गुवाहाटी में दिल्ली के एक अंग्रेजी अख़बार का संवाददाता था. उस समय चीन ने पहली बार बर्मा और नेपाल में रेल, सड़कें और दूसरी बुनियादी ढाँचे बनाने का काम शुरू किया था.

तब भी कहा जा रहा था कि ये भारत के लिए चिंता का विषय है.

मुझे याद है कि असम में इसको लेकर कितनी चिंता थी क्योंकि वर्ष 1962 की जंग में चीन इसकी राजधानी के एकदम क़रीब तक घुस गया था.

अरुणाचल प्रदेश
इमेज कैप्शन, चीन अरुणाचल के कुछ हिस्सों पर भी दावा ठोकता रहा है.

अब तो चीन भारत के अन्य पडोसी देशों में भी बंदरगाह, रेल और रोड बनाने का काम कर रहा है. एक तरह से देखें तो चीन ने भारत को चारों तरफ़ से अपने असर में घेर लिया है.

भारत चिंतित है. लेकिन ये भारत का नज़रिया है. चीन तो अमरीका की जगह पर दुनिया का सबसे प्रभावशाली देश बनने का सपना देख रहा है.

चीन पाकिस्तान
इमेज कैप्शन, चीन और पाकिस्तान के बीच 46 अरब डॉलर के आर्थिक समझौते हुए है.

बल्कि इस सपने को साकार करने के लिए जी-जान से कोशिश कर रहा है. समुद्री सिल्क रोड हो या अफ़्रीका, दक्षिण एशिया और लातिनी अमरीका, चीन ने दुनिया भर में निवेश का जाल बिछा दिया है.

दुनिया की अधिकतर बड़ी कंपनियों में चीनी निवेश आम बात है. अब तो हाल ये है कि अगर चीन की अर्थव्यवस्था डगमगाई तो दुनिया भर में आर्थिक भूकंप आ सकता है.

तो ये है असर चीन का दुनिया पर. लेकिन इसके बावजूद भारत में चीन से मुक़ाबला करने की एक आदत सी है.

चीन से मुक़ाबला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 'मेक इन इंडिया' योजना के तहत भारत को चीन की तरह निर्माण का गढ़ बनाने का लक्ष्य रखा है.

15 साल पहले तक भारत का मुक़ाबला पाकिस्तान से होता था. लेकिन धीरे-धीरे ये धारणा बनी कि अगर मुक़ाबला करना ही है तो चीन से करो, जो आबादी और साइज़ में भारत की तरह है.

दस साल पहले मुंबई के एक निर्यातक ने मुझसे कहा था कि हमें पाकिस्तान के बजाए चीन से अपनी तुलना करनी चाहिए.

भारत चीन
इमेज कैप्शन, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन से दोस्ती ही भारत के हित में है.

उनका कहना था कि भारत को चीन तक पहुँचने के लिए 20 साल लगेंगे. दस बरस के बाद चीन से फ़ासला और बढ़ गया है.

चीन से बराबरी करना एक अच्छा ख़्याल ज़रूर है लेकिन ये हक़ीक़त पर आधारित नहीं है.

चीन भारत से कहीं आगे निकल चुका है. इसके नज़दीक आने के लिए भारत की कई पीढ़ियों को इंतज़ार करना पड़ सकता है.

चीन अर्थव्यवस्था
इमेज कैप्शन, चीन इस समय विश्व में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.

आर्थिक फ़ासला

ज़रा साल 2014 के इन आर्थिक आंकड़ों पर एक नज़र डालें तो आपको भी यक़ीन हो जाएगा:

अर्थव्यवस्था: भारत दुनिया के दसवें नंबर पर, चीन नंबर दो पर.

सकल घरेलू उत्पाद: भारत 1. 9 ख़राब डॉलर, चीन 9. 2 ख़रब डॉलर

निर्यात: भारत 317 अरब डॉलर, चीन 2.3 ख़रब डॉलर

विदेशी मुद्रा भंडार: भारत 343 अरब डॉलर, चीन 4 ख़रब डॉलर

इन आंकड़ों से साफ़ समझ में आता है कि चीन की बराबरी करना बेहद मुश्किल है.

भारत और चीन
इमेज कैप्शन, भारत और चीन के बीच सीमा पर विवाद होता रहता है.

सहयोग में ही फ़ायदा

भारत ने चीन के साथ सरहदों के मतभेद के बावजूद एक मज़बूत व्यापारिक रिश्ता बना रखा है जो फल फूल रहा है.

लगभग 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के साथ चीन भारत का सब से बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है.

लेकिन अब ज़रुरत इस बात की है कि भारत चीन के उस निमंत्रण को स्वीकार कर ले जो उसने समुद्री सिल्क रोड के निर्माण में भारत को दिया है.

भारत चीनी राष्ट्रपति के उस हालिया बयान पर गंभीरता से चिंतन करे जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर भारत के सेवा उद्योग और चीन के उत्पादन उद्योग हाथ मिला लें तो दोनों देश दुनिया पर राज कर सकते हैं.

अंग्रेजी में एक कहावत है कि अगर अपने प्रतिद्वंद्वी को पछाड़ नहीं सकते तो उसके साथ हो जाएँ. क्या हिंदी-चीनी भाई-भाई का दूसरा अध्याय मुमकिन नहीं?

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