ग़ज़ा: इन मुश्किलों में गुज़रती है ज़िंदगी

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पहले तीन इसराइली युवकों को अगवा करके की गई हत्या और फिर एक फ़लस्तीनी युवक की हत्या ने एक बार फिर ग़ज़ा और आसपास के इलाकों में तनाव बढ़ा दिया है.

ग़ज़ा भूमध्य-सागर, इसराइल और मिस्र से घिरा इलाक़ा है. क़रीब 40 किलोमीटर लंबे और 10 किलोमीटर चौड़ाई वाले ग़ज़ा में क़रीब 17 लाख लोग रहते हैं. ग़ज़ा पट्टी से जुड़ी आठ बातें जो आपको मालूम होनी चाहिए.

ग़ज़ा का संघर्ष

ग़ज़ा के दक्षिणी हिस्से पर मिस्र का नियंत्रण है. जबकि तटीय इलाक़े पर 2005 तक इसराइल का क़ब्ज़ा था. 2005 में इसराइल ने ग़ज़ा से अपनी सेना हटा ली. एक साल बाद चरमपंथी संगठन हमास ने फ़लीस्तीनी चुनाव में जीत हासिल की और इसके बाद यहां हमास का शासन हो गया. हमास के शासन में आने के बाद ग़ज़ा पर मिस्र और इसराइल ने तरह तरह की पाबंदी लगा दी. इसके विरोध में यहां आए दिन संघर्ष देखने को मिलता है.

आबादी

ग़ज़ा दुनिया भर में सबसे घनी आबादी वाला इलाक़ा है. प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में 4,505 लोग रहते हैं. अनुमान के मुताबिक़ 2020 तक यहां प्रति वर्ग किलोमीटर 5,835 लोग रहने लगेंगे. 2020 तक इसकी आबादी 21 लाख के क़रीब होगी. आबादी में 53 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग युवा हैं.

अर्थव्यवस्था

ग़ज़ा की 21 फ़ीसदी आबादी बेहद ग़रीब है. ये लोग रोज़ाना 18 डॉलर से कम पर गुज़र बसर करने को मजबूर हैं. यहां बेरोज़गारी दर 40.8 फ़ीसदी है. युवाओं में बेरोज़गारी दर 50 फ़ीसदी से भी ज़्यादा है. यहां की सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वे अपने 50 हज़ार कर्मचारियों को समय पर वेतन दे पाएं.

शिक्षा

ग़ज़ा के 694 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में क़रीब 4.63 लाख बच्चे पढ़ते हैं. ज़्यादातर स्कूल संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित होते हैं. इनमें से अधिकांश स्कूल दोहरी शिफ़्ट में चलते हैं. हालांकि यहां शिक्षा की दर काफ़ी ऊंची है. 93 फ़ीसदी महिलाएं और 98 फ़ीसदी पुरुष साक्षर हैं.

स्वास्थ्य

ग़ज़ा में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है. बिजली के अभाव में अस्पताल में समय से लोगों को उपचार नहीं मिल पाता. इसके लिए ग़ज़ा मिस्र और इसराइल पर निर्भर रहा है. क़रीब 20 फ़ीसदी लोग इलाज के लिए और 25 फ़ीसदी लोग दवाओं के लिए मिस्र जाते रहे थे, लेकिन मिस्र ने भी अपनी सीमा बंद कर दी. हालांकि इलाज के लिए ग़ज़ा के लोगों को इसराइल में प्रवेश की सुविधा मिली हुई है.

खाद्य सुरक्षा

ग़ज़ा की 80 फ़ीसदी आबादी भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर है. लोगों के पास अनाज ख़रीदने के लिए पैसे नहीं हैं. 2012 से 2013 के बीच ग़ज़ा में ख़ाद्य असुरक्षा 44 फ़ीसदी से बढ़कर 57 फ़ीसदी पर पहुंच गई है. इसराइल की ओर से घोषित संघर्ष क्षेत्र में खेती पर रोक से ग़ज़ा का अनाज उत्पादन 75 हज़ार टन कम हो गया है. समुद्री क्षेत्र में मछली मारने के लिए लगाए प्रतिबंध से भी ग़ज़ा के लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं.

ऊर्जा

ग़ज़ा के लोग हर दिन बिजली संकट का सामना करते हैं. ग़ज़ा को बिजली इसराइल और मिस्र से मिलती है. देश में एक ही बिजली प्लांट है. कई घरों में जेनरेटर की सुविधा है, लेकिन इसके लिए काफ़ी महंगा ईंधन ख़रीदना पड़ता है. बिजली की कमी का असर दूसरी सुविधाओं पर भी होता है.

जल संकट

ग़ज़ा में नाममात्र की बारिश होती है. जल की खपत बढ़ रही है, ऐसे में संकट भी बढ़ रहा है. देश में 5.5 फ़ीसदी लोगों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मापदंडों के मुताबिक़ पीने का पानी मिलता है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ करीब 3.5 लाख लोग दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं. यहां गंदे पानी के निकास का समुचित प्रबंध नहीं है. क़रीब नौ करोड़ लीटर गंदा पानी हर रोज़ भूमध्य सागर में गिरता है, जिसका असर आम लोगों की सेहत और जलीय जीव जंतुओं पर पड़ रहा है.

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