इंडिया गठबंधन: मोदी सरकार में क्या यह विपक्ष के लिए सबसे अच्छा समय है?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, जुगल पुरोहित
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
विपक्षी गठबंधन इंडिया के शीर्ष नेताओं ने बुधवार दोपहर नई दिल्ली में एक बैठक के बाद कई अहम घोषणाएं कीं.
यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे हैं.
उनका आरोप है कि चुनाव आयोग के कामकाज़ और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को लेकर लगातार विवाद और सवाल सामने आए हैं.
गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफ़े की भी मांग की थी.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा था, "एसआईआर की पूरी प्रक्रिया और ज्ञानेश कुमार का यह घोटाला प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सहमति के बिना नहीं हो सकता."
सत्तारूढ़ बीजेपी ने इसके जवाब में इंडिया गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेदों को उजागर करने की कोशिश की. साथ ही, पार्टी ने कांग्रेस पर 'झूठ फैलाने और लोगों को गुमराह करने' का आरोप लगाया है.
तो बैठक का क्या नतीजा रहा?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश के मुताबिक़ क़रीब तीन घंटे तक चली बंद कमरे की चर्चा में इंडिया गठबंधन के लगभग 18 दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया.
बैठक में सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, उमर अब्दुल्ला, ममता बनर्जी, सुप्रिया सुले और तेजस्वी यादव जैसे नेता मौजूद रहे जबकि उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन जैसे कुछ नेता ऑनलाइन शामिल हुए.
बैठक ख़त्म होने के बाद मीडिया के सामने गठबंधन के नेताओं ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की.

इमेज स्रोत, Getty Images
ज्ञानेश कुमार को लेकर आक्रामक गठबंधन
एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को गले लगाया और मुस्कुराते हुए उनका स्वागत किया. ममता बनर्जी के बगल में बैठीं सोनिया गांधी ने भी वहाँ मौजूद लोगों का अभिवादन किया.
मंच पर पहली पंक्ति में जगह कम होने के कारण कुछ नेताओं को बैठने को लेकर परेशानी हुई. लेकिन बाद में अतिरिक्त कुर्सियां लगाई गईं और सभी नेताओं के बैठने की व्यवस्था कर दी गई.
मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इंडिया गठबंधन आने वाले हफ़्तों में छह प्रमुख क़दम उठाएगा.
इनमें ज़िला स्तर पर लोकतंत्र बचाओ मार्च, विपक्षी दलों का चुनाव आयोग तक मार्च और देशभर भर में रैलियां करना शामिल है.
ऐसी एक रैली राजधानी दिल्ली में भी की जाएगी. साथ ही चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राष्ट्रपति से मिलने का समय मांग जाएगा और एसआईआर से जुड़े सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के जल्दी निपटारे की अपील की जाएगी.
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला.
उन्होंने कहा, "अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो हमारा विरोध पूरे देश में फैल जाएगा. हम लड़ेंगे, जीतेंगे और संवैधानिक लोकतंत्र को वापस स्थापित करेंगे. यही हमारा वादा है."
उनके इस बयान के दौरान सोनिया गांधी भी मेज थपथपाकर समर्थन जताती नज़र आईं. ममता बनर्जी ने समाज के अलग-अलग वर्गों से इंडिया गठबंधन के आंदोलन में शामिल होने की अपील की.''
डीएमके और आप जैसी पार्टियां, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, अब गठबंधन की सक्रिय गतिविधियों का हिस्सा नहीं हैं.
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा "बैठक से पहले ही गठबंधन बिखर गया. कहां थे अखिलेश यादव? कहां हैं स्टालिन? डीएमके ने तो यहां तक कह दिया कि जहाँ कांग्रेस रहेगी, वहाँ हम बैठेंगे ही नहीं. कहाँ हैं अरविंद केजरीवाल? उद्धव ठाकरे भी वर्चुअली ही जुड़े और हेमंत सोरेन जी का तो अता-पता ही नहीं."
इस बीच, एक सवाल के जवाब में खड़गे ने कहा कि इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दल इस बात पर सहमत हैं कि देश में चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए.

इमेज स्रोत, Getty Images
गठबंधन के लिए 'अच्छा समय'
द हिंदू पब्लिशिंग ग्रुप के निदेशक और वरिष्ठ पत्रकार एन. राम के अनुसार, हाल के समय में विपक्ष के लिए हालात इतने अनुकूल शायद ही कभी रहे हों.
उनका कहना है कि "चुनाव आयोग से जुड़े विवादों, परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों ने युवाओं में असंतोष पैदा किया है, जिससे राजनीतिक माहौल में हलचल दिखाई दे रही है."
हालांकि, एन. राम का मानना है कि असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इंडिया गठबंधन को सही दिशा में ले जा पाएगी. उनके मुताबिक, कई राज्यों में गठबंधन का आधार मज़बूत दिखाई देता है, लेकिन तमिलनाडु में उसे बड़ी कमी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि डीएमके अब उसके साथ नहीं है. डीएमके के पास संसद के दोनों सदनों में मिलाकर 30 सांसद हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने राज्य चुनावों के बाद टीवीके के साथ गठबंधन किया है, लेकिन इस पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर अभी सीमित मौजूदगी है. ऐसे में अगर डीएमके गठबंधन से बाहर ही रहती है, तो तमिलनाडु में विपक्ष अपनी राजनीतिक ताक़त की भरपाई कैसे करेगा?
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि चुनौतियां केवल इंडिया गठबंधन के सामने नहीं हैं. सत्तारूढ़ एनडीए को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अदिति फडणीस ने बीबीसी से कहा, "बीजेपी भी यह समझने की कोशिश कर रही है कि उसका अगला क़दम क्या होना चाहिए. बीजेपी यह नहीं कह सकती कि चुनाव आयोग के कामकाज़ में कोई समस्या ही नहीं है. लेकिन वह इसे स्वीकार भी नहीं कर सकती."
"मेरा मानना है कि समाज और जनता भी इस समय बीजेपी को एक विकल्प के रूप में नए सिरे से परख रही है. देश में रोज़गार, शिक्षा और क़ानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे हैं और इनके स्पष्ट समाधान नज़र नहीं आ रहे हैं. सच कहूं तो अच्छे से अच्छे समय में भी ये आसान मुद्दे नहीं होते. मुझे लगता है कि हम एक अहम सियासी मोड़ के क़रीब पहुँच रहे हैं."
लेकिन एन. राम के अनुसार, इंडिया गठबंधन फ़िलहाल एक तय रणनीति के साथ आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है.

इमेज स्रोत, Getty Images
उन्होंने कहा, "इंडिया गठबंधन की बैठक से जो समझ में आता है, उसके अनुसार उनका मुख्य फोकस चुनाव आयोग पर है और मेरे विचार से यह एक सही रणनीति है. बीजेपी ने लोगों का ध्यान इस मुद्दे से हटाने की कोशिश की है, लेकिन अभी तक वह इसमें पूरी तरह सफल नहीं दिखी है. वहीं, राहुल गांधी ने जिस आक्रामक तरीक़े से इस मुद्दे को उठाया है, उसका असर होता दिखाई दे रहा है."
अदिति फडणीस सावधानी के साथ इससे सहमति जताती हैं.
वह कहती हैं, "राहुल गांधी लंबी सियासी रणनीति पर काम करते दिख रहे हैं और इस मुद्दे को जितना संभव हो, उतना जीवित रखना चाहते हैं. हालांकि यह उतना सरल नहीं है कि इंडिया गठबंधन वही कर रहा है जो उसे करना चाहिए. लेकिन हां, अगर वे अपनी रणनीति सही ढंग से अपनाते हैं, तो उन्हें मौजूदा हालात का फ़ायदा मिल सकता है."
इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों के बाद एनडीए को अपने राजनीतिक दायरे का विस्तार करने और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हुए देखा गया था. इस दौरान पहली बार बंगाल में बीजेपी की सरकार सत्ता में आई.
इसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और परिसीमन विधेयक जैसे प्रस्ताव भी शामिल थे.
इस पर अदिति फडणीस ने कहा, "मुझे फिलहाल संसद के ज़रिए बड़े सुधारों और महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने की संभावना बहुत कम नज़र आती है. राजनीतिक माहौल में इस समय काफ़ी कड़वाहट है और ग़ैर-एनडीए दल शायद इस बात को लेकर बेहद सतर्क रहेंगे कि वे सत्तारूढ़ गठबंधन के कितने क़रीब दिखाई दें."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.





















