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ब्लॉग: पाकिस्तान में ग़ायब लोगों के परिजनों के लिए 9 सलाह
- Author, मोहम्मद हनीफ़
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार
- प्रकाशित
पाकिस्तान में पिछले हफ्ते 'अग़वा' किए गए चार सामाजिक कार्यकर्ताओं का पता लगाने की माँग को लेकर हज़ारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध किया.
इन लोगों ने आशंका जताई कि इन कार्यकर्ताओं को सुरक्षा बलों ने गुप्त तौर पर हिरासत में रखा हुआ है.
इन कार्यकर्ताओं को लेकर अभी तक किसी चरमपंथी समूह ने कोर्इ् ज़िम्मेदारी नहीं ली है. उनके पक्ष में पाकिस्तान के कई प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद हनीफ़ का ब्लॉग
हर महीने दो महीने बाद फोन आता है. एक दोस्त के दोस्त का. किसी जानने वाले के जानने वाले का. फलां-फलां को उठा लिया है. आप तो जानते हैं उसने कभी कोई ऐसा वैसा काम नहीं किया, आप कुछ मदद कर सकते हैं...किसी से बात कर सकते हैं, कुछ सलाह ही दे दें.
दिल में पहला ख़्याल आता है कि भाई आपने मुझे फोन क्यों किया? कभी जवानी में ग़ायब लोगों पर दो-ढाई ख़बरें चलाई होंगी. मैं क्या ग़ायब लोगों का 'मामा' लगता हूं?
एक ग़ायब व्यक्ति का असली और बड़ा मामा था जो एक सब्जी वाली रेहड़ी पर अपने ग़ुमशुदा की तस्वीरें सजाए पूरे देश में घूमता रहा. अब मैंने भी बाकी पत्रकारों की तरह उसका फोन नंबर डिलीट कर दिया है.
लेकिन जाहिर है ऐसी बातें किसी ऐसे व्यक्ति से नहीं की जा सकतीं जिसका कोई प्यारा ताज़ा-ताज़ा 'मिसिंग पर्सन' बना हो. दिल में ख्याल आता है कि अगर घर के पालतू जानवर यानी कुत्ता, बिल्ली भी कहीं गुम हो जाएं तो घर में खाना नहीं पकता, यहाँ तो जीता-जागता ट्वीट करता, फ़ेसबुक पर सक्रिय, मैसेज का तुरंत जवाब देने वाला इंसान गायब हुआ है.
घरवालों पर दहशत तारी है, दोस्त सोच रहे हैं कि काश हमने उसे समझाया होता. लेकिन बंदा ग़ायब है, अब करें तो क्या करें. कुछ अत्यंत व्यावहारिक सलाह देता हूं, जो मैंने अतीत में मिसिंग होने वाले लोगों की माओं, मामाओं, भान्जों, यारों से सुने हैं. हो सकता है इनमें आपको कोई तर्क नजर आ जाए. मुझे यह भी स्वीकार है कि कोई गारंटी नहीं कि इन सुझावों पर अमल करने से आपका बंदा जीवित सलामत वापस आ जाएगा लेकिन जब किसी की जान का मामला हो तो हमें बातें मजाक में नहीं उड़ानी चाहिए.
आपके पास समय कम है और मिसिंग पर्सन के मिसिंग होने के बाद पहले 72 घंटे महत्वपूर्ण हैं.
जैसे ही आप विश्वास आ जाए कि आपका बंदा अपनी मर्ज़ी से गायब नहीं हुआ बल्कि उसे ग़ायब किया गया है तो सबसे पहले .....
1. शोर मचाओ
कोई टीवी वाला दोस्त ढूँढें, फिर मिन्नत करें कि कुछ और नहीं तो टिकर पर ही चला दें. अख़बार वालों को प्रेस विज्ञप्ति भेजें जिसमें आरोप लगाने से बचें. अस्मा जहांगीर और आईए रहमान का फोन नंबर, ईमेल किसी से लें और उन्हें लंबी कहानी मत सुनाएं, बुनियादी तथ्य बताएं. उन्हें ऐसे कई संदेश आते हैं. कोई दयालु थानेदार एफ़आईआर दर्ज करने को तैयार है तो करवा लें, लेकिन इससे कोई त्वरित लाभ नहीं होने वाला. अपने मिसिंग पर्सन की कोई अच्छी तस्वीर ढूंढ कर फ्लेक्स करने वाले के पास जाएं, प्रेस क्लब के बाहर विरोध में काम आएगी. मोमबत्तियाँ न खरीदें और प्रार्थना करें कि आने वाले दिनों में भी न खरीदनी पड़ें.
अगर, आपको मिसिंग पर्सन के फ़ोन से कॉल आ जाए तो (और ऐसा बहुत कम होता है )..
2: चुप हो जाएं
बंदा उठाने वालों ने आपको बताया है कि आपका बंदा जीवित है. इसे अच्छी ख़बर समझें, ये ऐलान-ए-जंग नहीं है. आप निश्चित रूप से पूछेंगे कि क्यों उठाया है और कब छोड़ेंगे? पहले सवाल का जवाब आपको पता है, दूसरे सवाल का जवाब वे नहीं देंगे. इस वक़्त का तकाजा है कि...
3: नाम मत पूछो
आपको शायद यह लगेगा कि आपका मिसिंग पर्सन इतना भी मिसिंग नहीं है. तो आप शायद मिसिंग करने वाले से फ्री होने की कोशिश करें. उनका नाम पूछें. वह अपना नाम साजिद, जफ़र या अकबर बताएंगे. बेहतरी इसी में है कि आपको उसका सही नाम पता न चले. वह भी अपनी नौकरी कर रहे हैं आप भी वही कर रहे हैं. आप भी वही कर रहे हैं जो आप को करना है. अधिक संभावना यह है कि 72 घंटे बीत गए हैं, आपके मिसिंग पर्सन के फ़ोन से किसी साजिद, जफ़र या अकबर ने फ़ोन नहीं किया. बैनर, पोस्टर, नारे तैयार हैं, निश्चित रूप से दोस्तों से सलाह के बाद विरोध का समय तय करें.
लेकिन इससे पहले...
4: प्रार्थना करें
हो सकता है आप का मिसिंग पर्सन धर्म से निराश हो, दुआओं से अधिक कविता में विश्वास रखता हो, लेकिन फिलहाल वह ग़ायब है. आपकी प्रार्थना शायद सुनी जाए शायद न सुनी जाए, लेकिन इससे आपको थोड़ा मानसिक आराम मिलेगा, डर में कमी होगी. इसके बाद विरोध में निकलें और गला खोलकर नारे लगवाएं, लेकिन इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बात ध्यान रखें कि ....
5: ग़ायब करने वाले का सम्मान करें
आप अपने बयानों और भाषणों में ज़रूर संस्थानों पर आरोप लगाएंगे, लेकिन संस्थान भी लोगों से मिलकर बनते हैं. जो चार-पांच लोग एक वीगो पर आए थे और आपके बंदे को उठाकर ले गए वह भी वास्तव में पाकिस्तानी हैं और संभावना है कि कम वेतन पर नौकरी कर रहे हैं. वह भी अपने आप को अच्छा पाकिस्तानी मानते हैं, कोई सरकारी नौकरी इसलिए नहीं करता कि वह अपहरणकर्ता बन जाए और अपने ही देशवासियों की हड्डियां तोड़े. वे केवल ऊपर वालों के आदेश बजा रहा है, ऊपर वाले अपने ऊपर वालों को खुश कर रहे हैं. आप भी किसी संस्थान में काम करते होंगे. आपको अंदाज़ा होगा कि संस्थान ऐसे ही चलते हैं. इसलिए आवश्यक है कि...
6: बेकार बहस से बचें
आप लगातार कह रहे हैं कि हमारा बंदा मासूम है उसने कुछ नहीं किया. अगर कुछ है तो अदालत में पेश करो. दूसरी ओर से दलील एक सेवानिवृत्त जनरल साहब ने बड़ी खूबसूरती से टीवी पर दी कि हमारी एजेंसियां बंदे नहीं उठातीं हैं और अगर उठाया ही है तो जाहिर है अपहरण के लिए नहीं उठाया. कोई और वजह होगी.
दोनों से बात एक जैसी हो रही हो, यह एक हौलनाक़ डैडलॉक है. इसमें जानें ज़ाया हो जाती हैं. मुख्य बात याद रखें कि आप आपके पास आपके बंदे की तस्वीरों वाले पोस्टर और नैतिक बढ़त है. बंदा अभी भी उनके पास है. आपको बंदा वापस चाहिए या पूरे जीवन पोस्टर ही लहराते रहोगे. इसलिए हर मामले में...
7: संस्थानों से टकराव से बचें
मिसिंग पर्सन के मामा का एक भांजा है नसरुल्लाह बगलज़ई. उसका चाचा ग़ायब हो गया था. आपको विरोध करते अभी एक सप्ताह ही हुआ है नसरुल्लाह ने सालों साल पोस्टर लहराए. याचिकाएं दायर कीं फिर एक दिन उसकी सुनी गई, उसे एक बैठक में बुलाया गया जिसमें संयोग से साजिद, जफर और अकबर सब मौजूद थे. नसरुल्लाह ने कहा कि आप लोग मेरे सामने क़ुरान पर हाथ रखकर कहें कि आपने मेरे चाचा को नहीं उठाया. मैं आपको कभी तंग नहीं करूंगा. यदि आपने मेरे चाचा को मार दिया है या गलती से आपके हाथों मारा गया है तो मुझे वह जगह दिखा दो जहां उसे दबाया है. फ़ातिहा पढूंगा और घर चला जाऊँगा. साजिद, ज़फ़र और अकबर ने सिर हिलाते हुए कहा, अफ़सोस है कि हम आपको ऐसे लगते हैं. नसरुल्लाह को दस साल बाद भी अपना चाचा नहीं मिला.
लेकिन आप निराश न हों. संघर्ष जारी रखो और जब आपका मिसिंग पर्सन वापस आ जाए तो अल्लाह का और संस्थानों का धन्यवाद करें, लेकिन उनसे...
8: सवाल मत पूछो
आपके मन में सीधे सवाल होंगे क्यों उठाया था, क्या पूछते थे, खाने को क्या देते थे अधिक ठुकाई तो नहीं हुई आदि लेकिन जाने दें. मिसिंग पर्सन इन सब सवालों का जवाब इसलिए नहीं देंगे क्योंकि वे फिर मिसिंग नहीं होना चाहता. मैंने ऐसे ही एक भाग्यशाली मिसिंग पर्सन से ऐसे ही सवाल पूछे थे. उसने कहा जो भी हुआ वह ज़िंदगी में एक ही बार होना चाहिए, दोबारा की हिम्मत नहीं है.
वह इस शायरी की जीती जागती तस्वीर है.
कभी लौट आएँ तो पूछना, नहीं देखना उन्हें ग़ौर से
जिन्हें रास्ते में खबर हुई कि ये रास्ता कोई और है
9: प्रार्थना करना मत भूलें
कुछ साल पहले हमारे एक हिंदू दोस्त मिसिंग हो गए थे हम जब भी उनके घर हाल अहवाल के लिए जाते तो वहाँ कभी खत्म कुरान हो रहा होता तो कभी महफ़िल मीलाद. मुझे यकीन है कि किसी अंदर के कमरे में भगवान की पूजा भी चल रही होगी लेकिन याद रखें कि इस देश में रहकर हिंदुओं ने भी सीखा है कि मुक्ति का मार्ग यही है. आप भी सीख लें और हाथ उठाएं.
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