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मानसिक सेहत के लिए इंस्टाग्राम सबसे ख़तरनाक, यूट्यूब बेहतर
इंस्टाग्राम को नौजवानों की मानसिक सेहत के लिहाज़ से सबसे ख़राब सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म आंका गया है.
ब्रिटेन के जिस सर्वे में यह बात सामने आई है, उसमें 14 से 24 साल के 1479 लोगों ने हिस्सा लिया था.
लोगों को पांच लोकप्रिय लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के विकल्प दिए गए थे. उन्हें हर प्लेटफ़ॉर्म को बेचैनी, डिप्रेशन, अकेलापन, टांग-खिंचाई और 'बॉडी इमेज' के लिहाज़ से स्कोर देना था.
'यूज़र्स को बचाया जाए'
सर्वे के नतीजे देखते हुए, मानसिक सेहत पर काम करने वाली एक संस्था ने यूज़र्स को ऐसे कंटेंट से बचाने की अपील की है.
'द रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ' (आरएसपीएच) ने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स को मानसिक सेहत से जूझ रहे यूज़र्स की पहचान करनी चाहिए. संस्था की रिपोर्ट में चेताया गया है कि हो सकता है कि सोशल मीडिया एक गंभीर मानसिक समस्या पैदा कर रहा हो.
करीब 90 फ़ीसदी नौजवान सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए इसका ख़तरा नौजवानों पर ही ज़्यादा होता है.
आइला की कहानी, जिन्होंने डिप्रेशन झेला
आइला 20-22 साल की हैं. किशोर उम्र में वह बुरे समय से जूझ रही थीं. तभी वह सोशल मीडिया पर आईं.
वह बताती हैं, 'ऑनलाइन कम्युनिटी ने मुझे महसूस कराया कि मैं उनमें शामिल हूं और मेरी भी कोई क़ीमत है. हालांकि मैंने असल ज़िंदग़ी के दोस्तों की अनदेखी शुरू कर दी और सारा वक़्त ऑनलाइन दोस्तों से बात करने में बिताने लगी.'
'16 की उम्र में मैं गहरे डिप्रेशन में चली गई. यह छह महीने तक चला और यह भयावह था.'
'इस दौरान सोशल मीडिया ने मुझे बहुत बुरा महसूस कराया. क्योंकि मैं और लोगों से अपनी तुलना करके बुरा महसूस करती रहती थी.'
'19 की उम्र में डिप्रेशन का एक और एपिसोड हुआ. मैं सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों को तरह-तरह की चीज़ें करते देखती और उन्हें देखकर कुढ़ती थी.'
हालांकि बाद में सोशल मीडिया का सकारात्मक पहलू भी आइला की ज़िंदग़ी में आया.
वह बताती हैं, 'मैंने मानसिक सेहत के बारे में ख़ूब ब्लॉग लिखे और लोगों से इस बारे में अच्छी बातचीत की. पांच-छह साल पहले मैंने जो ऑनलाइन दोस्त बनाए थे, उनमें से कुछ से मैं मिल भी चुकी हूं.'
यूट्यूब सबसे सकारात्मक
इस ऑनलाइन सर्वे में लोगों से फेसबुक, ट्विटर यूट्यूब, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट का मानसिक सेहत पर असर पूछा गया था. लोगों को सेहत से जुड़े 14 सवालों पर हर प्लेटफ़ॉर्म को स्कोर देना था.
इस आधार पर यूट्यूब को सबसे ज़्यादा सकारात्मक असर वाला माना गया, जिसके बाद ट्विटर और फिर फ़ेसबुक रहा.
आरएसपीएच से जुड़ी शर्ले क्रेमर कहती हैं, 'यह दिलचस्प है कि इंस्टाग्राम और स्नैपचैट को सबसे ख़राब आंका गया. दोनों प्लेटफ़ॉर्म बहुत छवि केंद्रित हैं और हो सकता है कि वो नौजवानों में नाक़ाबिलियत और बेचैनी पहुंचा रहे हों.'
उपाय भी सुझाए गए
इस सर्वे के नतीज़ों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स से कुछ क़दम उठाने की अपील की है. मसलन,
1. जब लोग लंबे समय तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें तो एक चेतावनी वाला पॉप-अप आ जाए. (सर्वे के 70 फीसदी लोगों ने इसका समर्थन किया.)
2. मानसिक सेहत की दिक्कत वाले यूज़र्स को पहचाना जाए और उन्हें उन जगहों के बारे में बताया जाए जहां उन्हें मदद मिल सकती है.
3. जब तस्वीरों को डिजिटल तरीकों से छेड़ा गया है, मसलन फ़ैशन ब्रांड, विज्ञापन या हस्तियों की तस्वीरों में, तो उन पर एक छोटा आइकन बना हुआ आ जाए, जिससे उनकी पहचान हो जाए.
बीबीसी ने इंस्टाग्राम से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया.
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