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कैशलेस अर्थव्यवस्था की राह पर कैसे बढ़ा स्वीडन?
- Author, मैडी सैवेज
- पदनाम, बीबीसी, स्टॉकहोम
- प्रकाशित
स्वीडन, एक ऐसा देश है जहां 99 फीसदी लेनदेन कैशलेस होता है.
पिछले साल स्वीडन में कुल आर्थिक लेनदेन में महज एक फीसदी में ही नोट और सिक्कों का इस्तेमाल किया गया.
स्वीडन के राष्ट्रीय बैंक रिक्सबैंक के मुताबिक देशभर के रिटेल बिज़नेस में महज 20 फ़ीसदी लेनदेन ही नकद में किए गए हैं. पांच साल पहले यह आंकड़ा दोगुना था.
चालकों की सुरक्षा पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार ने सालों पहले बसों में सिक्के और नोट से भुगतान करने पर पाबंदी लगा दी थी.
क्रेडिट कार्ड से कहीं भी भुगतान करने वाली स्थानीय तकनीक के विकास के बाद छोटे व्यापारों में भी कैशलेश लेनदेन को बढ़ावा मिला.
इस तकनीक के जरिए छोटे व्यापारी कैशलेश भुगतान स्वीकार करने लगे.
मोबाइल भुगतान प्रणाली
सेनोबर जॉनसेन कहते हैं, "मैं अपने बच्चे को अम्यूजमेंट पार्क ले गया, जहां एक गुब्बारे वाला कैशलेश लेनदेन कर रहा था."
स्विस, एक ऐसी मोबाइल भुगतान प्रणाली है जो, देश में कैशलेश भुगतान के लिए लोकप्रिय है. इसे देश की तकरीबन आधी आबादी इस्तेमाल करती है.
बैंकों की मदद से इस प्रणाली से कोई भी किसी को अपने मोबाइल से आसानी से पैसे भेज सकता है.
इस ऐप का इस्तेमाल बाजारों और स्कूलों में किया जा रहा है.
स्टॉकहोम स्थित रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर निकलैस अरविडस्सन कहते हैं, "यहां के लोग नई तकनीक में काफी रुचि लेते हैं."
नोटबंदी
उन्होंने कहा, "यूरोपीय देशों में स्वीडन के लोग एक-दूसरे के काफी जुड़े हुए हैं. इसका कारण यह है कि यहां की जनसंख्या कम है. यहां नई तकनीकों का परीक्षण आसान है और यहां भ्रष्टाचार काफी कम है."
"स्वीडन के लोग बैंकों और संस्थानों पर विश्वास करते हैं. उन्हें इस बात का डर नहीं है कि कोई उनपर निगरानी रख रहा है. उन्हें यह भी डर नहीं है कि कोई उनके कार्ड से पैसे चोरी कर सकता है."
प्रोफेसर अरविडस्सन कहते हैं, "रिक्सबैंक ने 2010 में यहां की मुद्राओं और नोटों को बदलने की प्रक्रिया शुरू की थी, जो इस साल पूरी हुई है. इसने कैशलेश लेनदेन को बढ़ावा दिया."
वो कहते हैं, "आपको लगता होगा कि नए नोटों में लोग रुचि लेंगे, पर ऐसा नहीं है. जैसे-जैसे व्यापारी कैशलेश प्रक्रिया को अपनाते गए, यह लोकप्रिय होता चला गया."
2030 तक कैशलेश व्यवस्था
रिक्सबैंक के मुताबिक 2009 में 833 अरब रुपए कैश में लेनदेन होते थे, जो 2016 में 512 अरब रुपए हो गई.
प्रोफेसर अरविडस्सन के मुताबिक 2020 तक कैश लेनदेन बहुत ही कम हो जाएगा.
एक सर्वे के मुताबिक 800 में से दो-तिहाई छोटे व्यापारियों ने यह माना है कि 2030 तक वह पूरी तरह कैशलेश लेनदेन में शामिल हो जाएंगे.
पूर्व पुलिस कमिश्नर बजॉर्न इरिक्शन कहते हैं, "लेकिन सभी लोग इस नई व्यवस्था से खुश नहीं हैं."
उनके स्थानीय कॉफी हाउस आज भी कैश लेते हैं, जबकि कुछ बैंकों ने कैश जमा करने और निकासी पर रोक लगा दी है.
चुनाव पर असर
"मैं कार्ड से भुगतान करना पसंद करता हूं, लेकिन 10 लाख ऐसे भी हैं जो इसके उपयोग करने के बारे में नहीं जानते. इनमें बूढे लोग, पर्यटक और अप्रवासी लोग हैं. बैंकों के लिए ये लोग लाभ देने वाले नहीं हैं."
विशेषज्ञों के मुताबिक सितंबर 2018 में यहां चुनाव होने वाले हैं और ग्रामीण और वृद्ध वोटरों की भूमिका अहम है.
अरविडस्सन के मुताबिक दो-तिहाई लोग बैंक नोट और सिक्कों को खत्म नहीं होते देखना चाहते हैं. वो कहते हैं, "स्वीडन के लोग भले की कैशलेश भुगतान कर रहे हैं लेकिन उनलोगों की भावना मुद्राओं के साथ जुड़ी है."
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