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टैक्स वार: अमरीका ने लगाया शुल्क, चीन ने दिया जवाब
चीन और अमरीका के बीच चल रही कारोबारी लड़ाई नए मुकाम पर पहुंच गई है.
सैकड़ों चीनी उत्पादों पर 25 फ़ीसदी आयात शुल्क लगाने के अमरीकी फ़ैसले के बाद चीन ने भी जवाबी कार्रवाई की है.
अब चीन ने कहा है कि वह 106 अमरीकी उत्पादों पर 25 फ़ीसदी आयात शुल्क लगाएगा.
इससे पहले अमरीका ने 1300 चीनी उत्पादों की लिस्ट जारी की थी जिन पर 25 फ़ीसदी शुल्क लगेगा.
इसके कुछ घंटे बाद चीन ने जैसे को तैसा वाली कार्रवाई की है.
ध्यान देने वाली बात ये है कि दोनों ही देशों ने एक दूसरे के उत्पादों पर एकसमान 25 फ़ीसदी आयात शुल्क लगाया है.
बौद्धिक सम्पदा की चोरी की शिकायत
अमरीका का कहना है कि चीनी उत्पादों के आयात पर ये अतिरिक्त टैक्स चीन के अमरीकी बौद्धिक सम्पदा की चोरी की वजह से लगाया गया है.
इन उत्पादों में मेडिकल संबंधित उत्पादों से लेकर टेलीविज़न और मोटरसाइकिल तक शामिल हैं.
अमरीका में चीन के दूतावास ने अपने बयान में अमरीका के इस क़दम की आलोचना की है.
बुधवार को चीन ने कहा, "इस एकतरफ़ा और संरक्षणवादी क़दम ने विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन किया है."
चीन का कहना है कि अमरीका के फ़ैसले से दोनों देशों के नुकसान होगा और विश्व अर्थ व्यवस्था के हितों के मुताबिक नहीं है.
"चीन अब विश्व व्यापार संगठन में विवाद सुलझाने के विकल्प का सहारा लेगा और चीन के क़ानून के हिसाब से अमरीकी उत्पादों के ख़िलाफ़ बराबर क़दम उठाएगा."
अमरीकी उत्पादों पर शुल्क
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अमरीका का ये क़दम चीन को जवाबी कार्रवाई के लिए उकसाएगा और अमरीकी उपभोक्ताओं को भी बढ़े हुए दामों को झेलना होगा.
ये लिस्ट आई है जब चीन ने तीन अरब डॉलर के अमरीकी उत्पादों पर शुल्क लगाया.
चीन का ये फ़ैसला अमरीका के स्टील और एल्यूमिनियम उत्पादों पर शुल्क लगाने के फ़ैसले के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है.
अमरीका ने जिन उत्पादों की लिस्ट मंगलवार को जारी की है, अमरीका में उन उत्पादों का सालाना आयात 50 अरब डॉलर का है.
पिछले साल अमरीका ने चीन से 506 अरब डॉलर का सामान आयात किया था.
अमरीका के व्यापार प्रतिनिधि के दफ़्तर के मुताबिक अमरीका को होने वाले नुकसान और चीन की नुकसानदेह करतूतों और नीतियों से छुटकारे की बात हो तो उसके हिसाब से ये क़ीमत एकदम वाजिब है.
व्यापार युद्ध का डर
अंतिम लिस्ट जनता की टिप्पणियों के बाद ही बनेगी और समीक्षा में करीब दो महीने का वक्त लग सकता है.
शुल्क लगाने का फ़ैसला उस जांच का नतीजा है जो राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पिछले साल बौद्धिक सम्पदा की चोरी को लेकर चीन के ख़िलाफ़ शुरू करवाई थी.
पिछले महीने ही ट्रंप ने बताया था कि जांच के बाद सबूत मिले हैं कि चीन ऐसी कार्य पद्धति इस्तेमाल कर रहा है जिससे अमरीकी कंपनियां चीनी कंपनियों के साथ तकनीक साझा करने को मजबूर हो जाती हैं. इसलिए ही अमरीका ने शुल्क लगाने के लिए उत्पादों की लिस्ट निकाली.
अमरीका के व्यापार जगत ने दोनों देशों से बातचीत से इस मुद्दे को हल करने की अपील की है क्योंकि ये चिंता बढ़ रही है कि शुल्क लगाने की इस लड़ाई में अमरीका की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है.
यूएस चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ने कहा, "सरकार चीन के साथ हमारे व्यापार संबंधों में बराबरी और पारदर्शिता लाना चाहती है और ये सही भी है."
लेकिन इस मक़सद को पाने के लिए अमरीकी लोगों के इस्तेमाल में आने वाले रोज़मर्रा के उत्पादों पर टैक्स बढ़ाना ठीक रास्ता नहीं है.
चीन की अर्थव्यवस्था
हाल के कुछ सालों में चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात पर बहुत कम निर्भर रह गई है.
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग और जानकारों के मुताबिक शुल्क लगाने के क़दम से ज़्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा.
उनका कहना है कि चीन का सिर्फ़ 15 फ़ीसदी निर्यात ही अमरीका में होता है.
इस लिस्ट में उपग्रहों के हिस्से, सेमीकंडक्टर, विमान संबंधित उपकरण, बीयर बनाने की मशीनें से लेकर दूसरे आला उत्पाद जैसे बेकरी ओवन और रॉकेट लांचर शामिल हैं.
कंसल्टिग कंपनी आरएसएम यूएस के प्रमुख अर्थशास्त्री जोसेफ ब्रसलस का कहना है कि चीन इस लिस्ट को गंभीरता से नहीं लेगा.
उनका इशारा लिस्ट में शामिल बेहद कम मांग वाले उत्पाद जैसे मॉनीटर और वीडियो कैसेट रिकॉर्डर पर था.
बल्कि उनका कहना है कि इस क़दम से अमरीका के निर्माण उद्योगों पर असर पड़ेगा और आख़िरकार उपभोक्ताओं पर.
वह कहते हैं कि ये तर्क ट्रंप सरकार के लिए दूसरी रणनीति अपनाने के लिए शायद पर्याप्त ना हो.
जोसेफ कहते हैं,"अगर ट्रंप सरकार अपने फ़ैसले पर नहीं टिकती है तो वो अपनी पहचान और भरोसा खो देगी."
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