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गोलान हाइट्स को लेकर क्यों झगड़ते हैं इसराइल और सीरिया
इसराइल और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद चरम पर है.
इसराइल ने सीरिया में ईरान के कई सैन्य अड्डों पर हवाई हमले किए है. इससे पहले गोलान पहाड़ियों पर स्थित इसराइली सैन्य ठिकाने पर रॉकेट से हमले हुए थे.
इस बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और रूस ने दोनों देशों से संयम बनाए रखने की अपील की है.
सीरियाई कार्यकर्ताओं के मुताबिक इस हमले में कम से कम 23 लोगों की मौत हुई है.
रूस ने कहा है कि इन हमलों में 28 इसराइली प्लेन ने करीब 70 मिसाइलें दागीं.
लेकिन इसराइल का कहना है कि उसने ऐसा जवाबी कार्रवाई के तहत किया.
उसका आरोप है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने गोलान हाइट्स पर मौजूद इसराइली सैनिक अड्डों पर सीरिया से करीब 20 रॉकेट दागे थे.
गोलान हाइट्स क्या है?
गोलान हाइट्स दक्षिणी-पश्चिमी सीरिया में स्थित एक पहाड़ी इलाका है. ये इलाका राजनीतिक और रणनीतिक रूप से खासा अहम है.
इसराइल ने 1967 में सीरिया के साथ छह दिन के युद्ध के बाद गोलान हाइट्स पर कब्ज़ा कर लिया था.
उस वक्त इलाके में रहने वाले ज्यादातर सीरियाई अरब लोग अपना-अपना घर छोड़कर चले गए थे.
सीरिया ने 1973 में हुए मध्य पूर्व युद्ध के दौरान गोलान हाइट्स को दोबारा हासिल करने की कोशिश की. लेकिन युद्ध में इसराइल को भारी नुकसान पहुंचाने के बावजूद सीरिया ऐसा करने में नाकाम रहा.
1974 में दोनों देशों ने इलाके में युद्ध विराम लागू कर दिया. संयुक्त राष्ट्र की सेना 1974 से युद्धविराम रेखा पर तैनात है.
1981 में इसराइल ने गोलान हाइट्स को अपने क्षेत्र में मिलाने की एकतरफा घोषणा कर दी. लेकिन इसराइल के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं दी गई.
गोलान हाइट्स पर यहूदियों की 30 से ज्यादा बस्तियां हैं, जिनमें क़रीब 20,000 लोग रहते हैं. इलाके में 20,000 सीरियाई लोग भी रहते हैं.
रणनीतिक महत्व
गोलान हाइट्स की चोटी से दक्षिणी सीरिया और सीरिया की राजधानी दमिश्क साफ नज़र आते हैं. ये दोनों इलाके यहां से करीब 60 किलोमीटर ही दूर है.
1948 से 1967 तक जब गोलान हाइट्स पर इसराइल का कब्ज़ा था, तब सीरिया ने भी उत्तरी इसराइल में अपनी सैन्य हलचल बढ़ा दी थी.
गोलान हाइट्स से इसराइल को ये फायदा मिलता है कि वो यहां से सीरिया की गतिविधियों पर बराबर नज़र रख सकता है.
ये पहाड़ी इलाका सीरिया से इसराइल की सुरक्षा के लिए ढाल का काम भी करता है.
गोलान हाइट्स इसराइल के लिए दूसरी कई वजहों से भी अहम है. गोलान इस सूखे इलाके के पानी का मुख्य स्रोत है.
गोलान में होने वाली बारिश का पानी जॉर्डन की नदी में जाकर मिल जाता है. ये इसराइल की एक तिहाई पानी की ज़रूरत पूरा करता है.
गोलान की ज़मीन उपजाऊ है, जहां अंगूर और मेवों के बगीचे लगाए जाते हैं. गोलान इसराइल का इकलौता स्की रिसोर्ट भी है.
शांति वार्ता में बाधा
2003 के अंत में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने कहा था कि वो इसराइल के साथ शांति वार्ता को फिर से शुरू करना चाहते हैं.
1999-2000 में जब अमरीका ने शांति वार्ता को रद्द कर दिया था, तब इसराइल के प्रधानमंत्री एहुद बराक ने सीरिया को गोलान का ज्यादातर हिस्सा लौटाने की पेशकश की थी.
लेकिन उस वक्त सीरिया की मांग थी कि इसराइल पूरा इलाका दोबारा लौटाए. इससे सीरिया को 'सी ऑफ़ गैलिली' के पूर्वी छोर पर नियंत्रण मिला जाता. लेकिन ये हिस्सा इसराइल के लिए बहुत अहम है क्योंकि उसे पीने का पानी यहीं से मिलता है.
यही वजह रही कि ये बातचीत रद्द हो गई और भविष्य में भी शांति वार्ता को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई.
इसराइल सी ऑफ़ गैलिली पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है. उसे ये भी डर है कि इस पूर्वी छोर से कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही उसकी सीमा है.
अगर इसराइल सीरिया के साथ डील करता है तो उसे गोलाना हाइट्स में रह रहे यहूदी लोगों को भी हटाना होगा.
बनती-बिगड़ती बात
2008 में इसराइल और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता फिरसे शुरू हुई थी. इस वार्ता को शुरू करवाने में तुर्की की सरकार ने अहम भूमिका निभाई थी.
लेकिन जब इसराइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते इस्तीफा देना पड़ा, तो ये बातचीत भी रद्द हो गई.
जब फरवरी 2009 में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की सरकार बनी तो इसराइल ने स्पष्ट कर दिया कि वो गोलान पर अपना रवैया सख्त रखेगा.
जून 2009 में सीरियाई नेता ने कहा कि इसराइल की तरफ़ से कोई बातचीत को तैयार नहीं है.
सीरिया का गृह युद्ध
जब 2009 में अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपना पदभार संभाला, तो उन्होंने कहा था कि इसराइल और सीरिया के बीच बातचीत शुरू कराना उनकी विदेश नीति का अहम लक्ष्य होगा.
लेकिन सीरिया में 2011 से शुरू हुए गृह युद्ध के बाद बातचीत के हालात नहीं बन पाए.
2013 में जब सीरियाई विद्रोहियों ने युद्धविराम रेखा से गोलान में गोलीबारी की तो इसराइल ने भी इसका जवाब दिया.
मई में दोनों देशों की सेनाओं ने नियंत्रण रेखा पर गोलियां चलाईं.
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