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इमरान ख़ान का भाषण झूठा, भड़काऊ और नफ़रत भरा- संयुक्त राष्ट्र में भारत का जवाब
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'राइट टू रिप्लाई' के तहत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के भाषण का जवाब दिया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कहा कि 'इमरान ख़ान का भाषण भड़काऊ था और उनकी कही हर बात झूठ थी."
गुरुवार को इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए अपने लगभग 50 मिनट के भाषण में कहा था कि भारत ने पाकिस्तान की तरफ़ से की गई शांति की सभी कोशिशों को नकार दिया.
इमरान ख़ान ने अपने भाषण में दुनिया को आगाह करते हुए कहा था अगर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग होती है तो 'कुछ भी हो सकता है.'
विदिशा मैत्रा ने शुक्रवार को अपने एक विस्तृत बयान में इमरान ख़ान के आरोपों का जवाब दिया और भारत का पक्ष रखा.
विदिशा मैत्रा ने अपने जवाब में जो कहा, वो कुछ इस तरह है:
चूंकि अब इमरान ख़ान ने दावा किया है कि पाकिस्तान में कोई चरमपंथी संगठन सक्रिय नहीं है और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों को इसकी पुष्टि के लिए आमंत्रित किया है, तो हम चाहेंगे कि दुनिया उनसे इस वादे को पूरा करने को कहे.
हमारे पास कुछ सवाल हैं जिनका जवाब पाकिस्तान को अपने दावों की पुष्टि कराने से पहले दे देना चाहिए-
-क्या पाकिस्तान इसकी पुष्टि कर सकता है कि उसके यहां संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल 130 आतंकवादी और 25 आतंकी संगठन मौजूद हैं?
-क्या पाकिस्तान ये मानेगा कि पूरी दुनिया में सिर्फ़ उसकी सरकार ऐसी है जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिंबधित अल क़ायदा से ताल्लुक रखने वाले व्यक्तियों को पेंशन देती है?
-क्या पाकिस्तान ये समझा सकता है कि यहां न्यूयॉर्क में उसे अपने प्रतिष्ठित हबीब बैंक को क्यों बंद करना पड़ा? क्या इसलिए क्योंकि वो आतंकी गतिविधयों के लिए लाखों डॉलर का लेनदेन कर रहा था?
-क्या पाकिस्तान ये नकार सकता है कि 'फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स' ने 27 में 20 से अधिक मानकों के उल्लंघन के लिए इसे नोटिस दिया था?
-और आख़िर में, क्या प्रधानमंत्री इमरान ख़ान इस न्यूयॉर्क शहर के सामने इनकार कर सकेंगे कि वो ओसामा बिन लादेन का खुले तौर पर समर्थन करते रहे हैं?
'इमरान का भाषण असभ्यता भरा'
विदिशा मैत्रा ने कहा कि इमरान ख़ान ने यूनजीए में जिस तरह की बातें कहीं वो अंतरराष्ट्रीय मंच का दुरुपयोग है.
उन्होंने कहा, "कूटनीति में शब्दों की अहमियत होती है. इक्कीसवीं सदी में 'नरसंहार', 'रक्तपात', 'नस्लीय श्रेष्ठता', 'बंदूक उठाएं' और 'अंत तक लड़ेंगे' जैसे शब्दों का इस्तेमाल मध्यकालीन मानसिकता को दर्शाता है.''
विदिशा मैत्रा ने कहा कि इमरान ख़ान कभी क्रिकेटर थे और 'जेंटलमेन्स गेम' में यक़ीन रखते थे, आज उनका भाषण असभ्यता की चरम सीमा तक पहुंच गया है.
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विदिशा मैत्रा के जवाब एक अन्य अंश कुछ इस तरह है:
राष्ट्रपति महोदय, आतंकवाद और नफ़रत बढ़े भाषण को बढ़ावा देकर और इस तरह 'वाइल्ड कार्ड एंट्री' लेकर पाकिस्तान मानवाधिकारों का नया चैंपियन बनना चाहता है.
ये वही देश है जिसने अपने यहां की अल्पसंख्यक आबादी को 23% (1947 में) से घटाकर आज 3% कर दिया है.
यह वही देश है जिसने ईसाई, सिख, अहमदिया, हिंदू, शिया, पश्तून, सिंधी और बलोच समुदाय के लोगों को ईशनिंदा क़ानून के जरिए लगातार उत्पीड़न किया है और जबरन धर्मांतरण करवाया है.
पाकिस्तान ने यहां आतंकवाद और नफ़रत भरी बातों को बढ़ावा दिया है जबकि भारत जम्मू-कश्मीर में विकास को बढ़ावा दे रहा है.
भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में स्वस्थ लोकतंत्र के साथ-साथ उसके हज़ारों साल पुरानी विविधतापूर्ण विरासत, बहुसंख्यकवाद और सहिष्णुता को भी बनाए रखना चाहता है.
भारत के नागरिकों की तरफ़ से किसी और को बोलने की ज़रूरत नहीं है. कम से कम उन्हें तो नहीं जिन्होंने नफ़रत की विचारधारा से आतंकवाद का उद्योग बनाया है.
इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने ट्वीट किया, "पाकिस्तान आतंकवाद और नफ़रत भरे भाषण को बढ़ावा दे रहा है जबकि भारत जम्मू-कश्मीर में विकास को बढ़ावा दे रहा है."
वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने पाकिस्तान पर तंज़ करते हुए ट्वीट किया, ''हर किसी को ये अहसास नहीं होता कि परमाणु युद्ध के अंध राष्ट्रवाद, जिहाद, आतंकवाद को बढ़ावा देने, युद्धालाप, झूठ, धोखे और सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय मंच के दुरुपयोग से ऊपर भी ज़िंदगी है.''
इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए अपने भाषण में कहा था कि भारत को कश्मीर से 'अमानवीय कर्फ़्यू' हटाना चाहिए.
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