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ईरान: पेट्रोल का कोटा तय किए जाने पर भड़के लोग, विरोध प्रदर्शन
ईरान में पेट्रोल का राशन तय किए जाने और दाम बढ़ाने के सरकारी फ़ैसले के ख़िलाफ़ लोग सड़कों पर उतर आए हैं.
शुक्रवार को पेट्रोल पर सब्सिडी कम कर दी गई जिसके बाद दाम कम से कम 50 फ़ीसदी बढ़ गए.
प्रशासन का कहना है कि वो ग़रीबों के कल्याण के लिए पैसा बचाना चाहते हैं.
ईरान अमरीकी पाबंदियों की वजह से पहले ही आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष कर रहा है. 2015 में अमरीका ने ईरान से परमाणु समझौते से अपने क़दम पीछे खींच लिए थे और उस पर आर्थिक पाबंदियों का ऐलान किया था.
झड़प की ख़बर
सिरजन शहर में हुए प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई है. सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने ख़बर दी है कि प्रदर्शनकारियों ने जब एक ईंधन गोदाम में आग लगाने की कोशिश की तो उनकी पुलिसकर्मियों से झड़प हुई. कई लोगों के घायल होने की ख़बर है.
विरोध प्रदर्शनों से राजधानी तेहरान, करमंशाह, इस्फ़ाहान, तबरीज़, कराद्ज, शिराज़, यज़्द, बूशेहर और सरी जैसे शहर भी प्रभावित हुए हैं.
कई शहरों में दर्जनों आक्रोशित लोगों ने अपने वाहनें सड़कों पर लगाकर यातायात जाम कर दिया.
इंटरनेट पर पोस्ट किए गए वीडियोज़ में दिख रहा है कि राजधानी तेहरान में कार सवार लोग इमाम अली हाइवे पर ट्रैफ़िक रोक रहे हैं और नारेबाज़ी करके पुलिस से उन्हें समर्थन देने की अपील कर रहे हैं.
नए नियमों में क्या है?
नए नियमों के मुताबिक, हर वाहन मालिक को एक महीने में 60 लीटर पेट्रोल ख़रीदने की ही इजाज़त होगी और इसके लिए उसे 15 हज़ार रियाल यानी क़रीब 32 रुपये प्रति लीटर की कीमत चुकानी होगी. अगर उन्हें 60 लीटर से ज़्यादा पेट्रोल की ज़रूरत होगी तो हर लीटर के लिए उन्हें दोगुने दाम यानी 30 हज़ार रियाल देने होंगे.
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, इससे पहले महीने में 250 लीटर पेट्रोल 10 हज़ार रुपये प्रति लीटर की दर से ख़रीदा जा सकता था.
सरकार का कहना है कि पेट्रोल से सब्सिडी हटाने से बचने वाले पैसे को कम आमदनी वाले परिवारों के नगद भत्ते पर ख़र्च किया जाएगा.
ईरान में प्लानिंग और बजट संस्था के प्रमुख मोहम्मद बाक़र नोबाख़्त ने कहा है कि इस महीने से 1.8 करोड़ परिवारों को अतिरिक्त नगद भत्ता मिलना शुरू हो जाएगा.
राष्ट्रपति हसन रूहानी ने शनिवार को कहा था कि ईरान के 75 फ़ीसदी लोग अभी 'दबाव' में हैं और नए नियमों से आने वाला राजस्व सरकारी ख़जाने में नहीं जाएगा, बल्कि उन लोगों पर ख़र्च किया जाएगा.
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अमरीकी पाबंदियों का ईरान पर असर
ईरान में दुनिया के सबसे सस्ते ईंधन वाले देशों में है. यह दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में भी है और हर साल वह खरबों डॉलर का तेल आयात करता है.
लेकिन ईरान की रिफ़ाइनिंग क्षमता सीमित है और अमरीकी पाबंदियों के बाद तेल प्लांट्स के पुर्जे ख़रीदना ईरान के लिए मुश्किल हो गया है.
ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच हुए परमाणु समझौते से अमरीका ने पिछले साल अपने पांव वापस खींच लिए थे, जिसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ फिर से पाबंदियां लगा दी थीं.
उस समझौते के मुताबिक, ईरान पाबंदियों में राहत के बदले अपने विवादित परमाणु गतिविधियों को रोकने और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को प्रवेश देने पर सहमत हो गया था.
अमरीका के इस समझौते से पीछे हटने के बाद ईरान धीरे-धीरे अपनी परमाणु गतिविधियां भी बढ़ा रहा है, हालांकि वह परमाणु हथियार बनाने को लेकर लगातार अनिच्छा ज़ाहिर करता रहा है.
इन पाबंदियों से ईरान की अर्थव्यवस्था में काफ़ी गिरावट आई है. यहां की मुद्रा रियाल की कीमत काफ़ी घट गई है, सालाना महंगाई दर आसमान पर है और विदेशी निवेशक अपने पांव पीछे खींच रहे हैं.
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