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ईरान में बदलाव, महिलाएँ बता रही हैं क्या झेलना पड़ता है उन्हें
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, ईरान
- प्रकाशित
मरियम कांपती हुई आवाज़ में बताती हैं कि कैसे उनके पति ने उन पर सबके सामने हमला किया था.
लोगों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थीं, जैसे एक पति का पत्नी को पीटना सामान्य बात हो. ना यहां कोई क़ानून है, ना ही कोई सुरक्षित घर है और यहां तक की पुलिस भी बहुत कुछ नहीं कर सकती है. कुछ परिवार भी ऐसी घटनाओं को निजी मामला बता कर पर्दा डाल देते हैं.
मरियम के देश ईरान में उनकी जैसी कहानी का सुना जाना एक दुर्लभ बात है. लेकिन एक नया पॉडकास्ट शुरू होने के बाद से बहुत सी महिलाएं सामने आकर अपनी कहानी सुना रही हैं. वो अपने साथ हुई घरेलू हिंसा को बयान कर रही हैं.
मरियम (बदला हुआ नाम) इन महिलाओं को अपनी कहानियां कहने, सामाजिक दायरे को तोड़ने और परंपराओं को चुनौती देने के लिए प्रेरित कर रही हैं.
मरियम इन महिलाओं से कहती हैं कि शहरज़ादी बनों. शहरजादी मिथकीय पारसी रानी का ही एक नाम है जिसने कहानियां सुनाने की अपनी कला से अपनी मौत को टाल दिया था. धारावाहिक अलिफ़ लैला ( द अरेबियन नाइट्स पर आधारित) की मुख्य किरदार वही थीं.
लेकिन इन महिलाओं की कहानियां प्राचीन कथाओं से बहुत अलग हैं. ये ऐसे समाज की कहानियां हैं जो अपनी महिलाओं को ख़ामोश रहने की शिक्षा देता रहा है.
बाल मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली मरियम (34 वर्ष) को उनके पति पढ़ाई के दौरान यूनिवर्सिटी में ही मिले थे.
मरियम ने अपने परिवार के ख़िलाफ़ जाकर उस पुरुष से शादी की थी जिसे वो प्यार करती थीं. शुरुआत में उनके पति की छवि एक ऐसे उदार व्यक्ति की थी जो मज़दूरों के अधिकार की बात करता था.
लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही मरियम को अहसास हुआ कि कुछ है जो ठीक नहीं है.
अपने पॉडकास्ट में मरियम बताती हैं कि कैसे इज्ज़त और हार न मानने की ज़िंद की वजह से वो अपने माता-पिता से मदद नहीं मांग सकीं.
अपनी शादी के दौरान उन्हें शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न से गुज़रना पड़ा और हालात तब और ख़राब हो गए जब उन्हें ये मनवाया गया कि जो भी कुछ हो रहा है वो उनकी ही ग़लती की वजह से हो रहा है.
मरियम भी बाक़ी ईरानी लड़कियों की ही तरह ये कहावत सुनते हुई बढ़ी हुईं थीं कि एक दुल्हन शादी के जोड़े में अपने पति के घर जाती है और सफ़ेद कफ़न में उसके घर से निकलती है.
सामाजिक दबाव
मरियम कहती हैं कि सामाजिक परंपराओं की वजह से वो अपनी शादी नहीं तोड़ पा रही थीं.
ईरान के लोग निजता को बेहद महत्व देते हैं और आमतौर पर पारिवारिक मामले घर के भीतर ही रहते हैं.
इसी वजह से घरेलू हिंसा किसी महामारी की तरह फैल गई है और महिलाओं को अपने पति के लिए समर्पित रहने, ख़ामोश रहने और सब्र करने के लिए कहा जाता है.
मरियम बार-बार की पिटाई के बाद अस्पताल के बिस्तर तक पहुंच गईं. इसके बाद उन्होंने अपने पति को छोड़ने का फ़ैसला किया.
अस्पताल में मरियम बेहोश थीं. चोटों की वजह से वो हिलडुल नहीं पा रहीं थीं. आधी-बेहोशी की हालत में वो ख़ुद से पूछ रहीं थीं कि 'मैं यहां क्यों हूं और मेरे साथ क्या हुआ है?'
कई सप्ताह बाद जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली तो उन्होंने तलाक़ की अर्ज़ी दे दी. उनके परिजनों ने इस क़दम में उनका साथ दिया. ईरान में आमतौर पर लड़कियों को ऐसी स्थिति में अपने परिजनों का साथ नहीं मिलता है.
मरियम अब घरेलू हिंसा पर पॉडकास्ट करती हैं. हर एपिसोड में उनके साथ घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाएं होती हैं जो अपने अनुभव साझा करती हैं.
पुरुषों की हिंसा का शिकार इन महिलाओं ने अब बोलना शुरू किया है.
नया क़ानून?
महिलाओं की व्यक्तिगत कहानियां कहने के अलावा ये पॉडकास्ट हिंसा, ख़ासकर घरेलू हिंसा झेल रही महिलाओं के लिए संस्थागत सुरक्षा की कमी पर भी बात करता है.
ईरान में इस बारे में अध्ययन सिर्फ़ एक ही बार 16 साल पहले किया गया था. इस शोध में पता चला था कि ईरान की कम से कम दो तिहाई महिलाओं ने कम से कम एक बार उत्पीड़न का सामना किया है.
लंदन स्थित मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने साल 2013 में ईरान पर प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में कहा था कि देश की महिलाएं 'क़ानून की नज़र में भेदभान का सामना करती हैं. वो शादी और तलाक़, पारिवारिक संपत्ति पर हक़, बच्चों पर हक़, राष्ट्रीयता और अंतरराष्ट्रीय यात्रा में भी भेदभाव झेलती हैं.'
ईरान में हाल ही में तथाकथित ऑनर किलिंग के एक मामले में एक पिता ने अपनी युवा बेटी की हत्या कर दी थी. इस हत्या के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए थे.
राष्ट्रपति हसन रूहानी ने हालात को समझते हुए प्रस्तावित महिला सुरक्षा क़ानून की तुरंत समीक्षा का ऐलान किया था. इस क़ानून का मसौदा दस साल पहले ही तैयार हो गया था.
क़ानून बनने से पहले इस विधेयक को देश की रूढ़िवादी संसद से पारित होना होगा. यदि ये क़ानून बन गया तो 1979 की क्रांति के बाद से ईरान में महिला अधिकारों में सबसे बड़ा परिवर्तन होगा.
इस क़ानून के तहत महिलाओं के ख़िलाफ़ शारीरिक हिंसा अपराध होगी और पहली बार सार्वजनिक स्थल या सोशल मीडिया पर महिला का उत्पीड़न करने पर सज़ा का प्रावधान भी किया गया है.
अपनी शादी के समाप्त होने के पांच साल बाद मरियम कहती हैं कि वो पहे इतनी ख़ुश कभी नहीं रही हैं.
पॉडकास्ट के अलावा वो हिंसा प्रभावित महिलाओं की काउंसिलिंग भी करती हैं.
वो उम्मीद करती हैं कि लोगों को बोलने का मौक़ा देकर वो हिंसा पर ख़ामोश रहने की संस्कृति पर चोट करेंगी. मरियम कहते हैं कि ख़ामोशी शोषण करने वालों को और मज़बूत करती है.
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