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क्या सैर-सपाटे का भविष्य पानी के नीचे है?
- Author, उलरिक लेमिन-वूल्फ्रे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
तजुर्बेकार स्कूबा गोताखोर होने के बावजूद मैंने कभी 'बोमी' नहीं देखी थी. ग्रेट बैरियर रीफ में हेरॉन द्वीप इसी के लिए मशहूर है.
कुछ साल पहले मुझे वहां जाकर मूंगे की चट्टानों को देखने का मौका मिला. मेरा पहला बोमी दिखने में शानदार था.
पानी के नीचे वह एक छोटे द्वीप की तरह था जहां एक विशाल मंटा रे अपने पंख जैसे फिन फैलाकर बैले डांस कर रही थी. जब एक कछुआ तैरता हुआ वहां से गुजरा तो ग्रेट बैरियर रीफ ने पूरी तरह मेरा दिल जीत लिया.
मेरी तरह सभी दूसरे गोताखोर ग्रेट बैरियर रीफ में मूंगे की विशाल चट्टानों और वहां के पारिस्थितिकी आवास और समुद्री प्रजातियों की विविधता देखने पहुंचे थे.
हम सब रीफ की ख़ूबसूरती के कायल थे. साथ ही, इस अनमोल पर्यावरण को बचाने की अहमियत समझ रहे थे.
पानी के नीचे पर्यटन
पानी के अंदर पर्यटन समुद्र को सैलानियों के लिए खोल रहा है. समुद्री दुनिया को देखने का मौका मिलने पर ज़्यादा से ज़्यादा लोग समुद्र तक पहुंच रहे हैं.
2018 में पानी के अंदर पहला होटल- कॉनराड मालदीव्स रांगली आइलैंड खुला. 2019 में नॉर्वे में पानी के नीचे दुनिया का सबसे बड़ा रेस्तरां शुरू हुआ.
2019 में ही ऑस्ट्रेलिया के व्हिट्संडे आइलैंड पर पानी के भीतर गारो अंडरवाटर स्कल्पचर ट्रेल नाम की कला दीर्घा खोली गई.
पानी के अंदर पर्यटन नई अवधारणा नहीं है. जॉक कॉस्ट्यू ने 1942 में स्कूबा गियर तैयार किया था.
गोताखोरी प्रशिक्षकों के पेशेवर संगठन PADI ने 1967 से अब तक दुनिया भर के 2 करोड़ 70 लाख लोगों को गोताखोर होने का सर्टिफिकेट जारी किया है.
स्कूबानॉमिक्स के मुताबिक दुनिया में करीब 60 लाख सक्रिय स्कूबा गोताखोर हैं. उनके अलावा डाइविंग मास्क और सांस नली लगाकर समुद्र में उतरने वाले अनगिनत लोग हैं.
वे महासागरों में डूबे मलबे का पता लगाते हैं, व्हेल और कछुए के साथ तैराकी करते हैं और पानी के नीचे की गुफाओं में भी जाते हैं.
इनके अलावा, कुछ तटीय रिजॉर्ट लंबे अरसे से कांच की तली वाली नावों में सैर करा रहे हैं.
अब वे लोग भी स्कूबा जैसा रोमांच पा सकते हैं जो कुशल गोताखोर या तैराक नहीं हैं या जिनके पास गोताखोरी का सर्टिफिकेट लेने का न तो समय है न साधन.
ग्रेट बैरियर रीफ के ग्रीन आइलैंड ने सीवॉकर शुरू किया है जिसमें लोग कांच का बड़ा सा हेलमेट पहनकर समुद्र में उतर सकते हैं.
सुरक्षित सूट पहनाकर ऐसे "गोतोखोरों" को समुद्र तल तक उतारा जाता है जहां वे रेत पर चहलकदमी कर सकते हैं. वे पाइप से जुड़े रहते हैं जिनके सहारे पानी के नीचे रहते हुए भी वे आसानी से सांस ले सकते हैं.
समुद्र की सतरंगी दुनिया
सबमर्सिबल राइड में हवाई से लेकर मॉरीशस तक दुनिया के कुछ सबसे दिलचस्प द्वीपों और तटीय क्षेत्रों के रीफ की सैर कराई जाती है.
सैलानियों के लिए सुपर-लग्जरी निजी पनडुब्बियों का इस्तेमाल होता है. मालदीव का फोर सीजन्स रिजॉर्ट डीपफ्लाइट के लिए ऐसी ही पनडुब्बी का इस्तेमाल करता है.
पर्यावरण के अनुकूल इन वातानुकूलित पनडुब्बियों में पायलट के साथ दो लोगों के बैठने की जगह होती है. वे एकदम करीब से पानी के अंदर की ज़िंदगी को देख सकते हैं.
कई लोगों का मानना है कि पानी के नीचे इस तरह की सैर में ही पर्यटन का भविष्य है क्योंकि इसमें स्कूबा या तैराकी के तजुर्बे की ज़रूरत नहीं होती.
बैटरी से चलने वाली और कम आवाज़ करने वाली पनडुब्बी में बैठकर नीचे उतरने का तजुर्बा स्थायी होता है. दिक्कत यह है कि इसमें ख़र्च बहुत आता है.
ख़र्चीला पर्यटन
डीपफ्लाइट की एक घंटे की सैर में दो लोगों के लिए 1,500 डॉलर का ख़र्च आता है. इतना ख़र्च करना आम लोगों के लिए मुमकिन नहीं है.
ब्रिटेन की पर्यटन अकादमिक और "टूरिज्म टीचर" की लेखिका डॉ. हेली स्टैन्टन कहती हैं, "समुद्र के नीचे पर्यटन हमारे अंदर गहरे समुद्र की काल्पनिक छवियों को जगाता है, लेकिन हक़ीक़त में वैसे नजारे कम ही दिखते हैं."
"वे बहुत महंगे भी हैं. मुझे नहीं लगता कि समुद्र के नीचे पर्यटन का बाजार है. मुझे लगता है कि यह सिर्फ़ कुछ दौलतमंद लोगों तक ही सीमित रहेगा."
2019 में पहली स्पेस एंड अंडरवाटर टूरिज्म यूनिवर्सल समिट आयोजित कराने वाले लेस रोच्स की पीआर मैनेजर पैट्रिसिया रोडिलेस मार्टिनेज़ इससे सहमत नहीं हैं.
वह कहती हैं, "समय के साथ जैसे-जैसे मांग बढ़ेगी इसकी लागत कम होती जाएगी और यह सभी की पहुंच में आ जाएगा. हवाई जहाज, क्रूज और होटलों के साथ ऐसा ही हुआ है."
समुद्र के नीचे की सैर मुख्यधारा में आए या न आए, ऐसे तजुर्बों का एक दूसरा फायदा है. सैलानियों को भी पता चल रहा है कि समुद्र कई ख़तरों से जूझ रहा है और उसका संरक्षण ज़रूरी है.
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से कोरल ब्लीचिंग, अधिक मछली पकड़ने और प्रदूषण से महासागरों को नुकसान हो रहा है.
कोविड-19 महामारी के कारण लॉकडाउन हुआ तो पर्यावरण को राहत मिली जिसके स्पष्ट संकेत दिखे. इसने भी याद दिलाया कि हमें पर्यावरण का ख्याल रखते हुए पर्यटन की ज़रूरत है.
पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण
संरक्षणवादियों और समुद्री जीव विज्ञानियों की मदद से सैर-सपाटे को न सिर्फ़ मज़ेदार बल्कि शैक्षणिक भी बनाया जा रहा है. इसमें समुद्र और समुद्री जीवों के ख़तरों के बारे में जागरुकता बढ़ाई जाती है.
गोताखोरी केंद्र अपनी जगह के ख़तरों को लेकर आगाह करते हैं. रिसर्च सेंटर, ख़ासकर ग्रेट बैरियर रीफ के रिसर्च सेंटर कोरल ब्लीचिंग, प्लास्टिक कचरे और रीफ क्षरण के बारे में अपनी रिसर्च दिखाते हैं.
वे सैलानियों से गुजारिश करते हैं कि वे अच्छे तजुर्बे के साथ साथ में कुछ अहम जानकारियां भी लेकर जाएं.
वाशिंगटन तट पर समुद्री शैवाल की प्रजातियों की मैंपिंग से लेकर ग्रेट बैरियर रीफ में शार्क और कछुओं की ट्रैकिंग जैसे कुछ नागरिक प्रयास भी हैं.
इससे सैलानियों और स्वयंसेवकों को समुद्री पर्यावरण पर नज़र रखने में मदद मिलती है, पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है और शोध के लिए अहम आंकड़े मिलते हैं.
2010 में मेक्सिको में कानकुन जलवायु सम्मेलन के दौरान कानकुन अंडरवाटर म्यूजियम ऑफ़ आर्ट खोला गया था.
समुद्र के नीचे इस तरह के शिल्प उद्यानों की कामयाबी से नये तरह के सैलानी आकर्षित हो रहे हैं. वे समुद्र के बारे में जानने में पहले से अधिक दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
पानी के लिए आर्ट गैलरी
2019 में खुले गारो अंडरवाटर स्कल्पचर ट्रेल में 6 कलाकृतियां लगाई गई हैं, जैसे एक विशाल कछुआ, एक बड़ी स्थानीय मछली और एक मंटा रे.
इनको बहुत गहरे समुद्र में नहीं लगाया गया है जिससे स्कूबा डाइव लगाकर या नाव से भी इनको देखा जा सकता है.
2017 में चक्रवातीय तूफान डेबी से रीफ को बहुत नुकसान हुआ था. उसी के बाद स्कल्पचर ट्रेल स्थापित करने के बारे में सोचा गया. यह रीफ संरक्षण परियोजना का हिस्सा है जो मंटा रे पलायन जैसे विषयों पर भी ध्यान खींचता है.
क्वींसलैंड तट से थोड़ा और आगे टाउंसविले में एक और कला परियोजना उद्घाटन के लिए तैयार है. म्यूजियम ऑफ़ अंडरवाटर आर्ट (एमओयूए) चार हिस्सों में बंटा होगा. इसके एक हिस्से तक स्कूबा गोताखोरों की ही पहुंच होगी.
एमओयूए में ब्रिटिश शिल्पकार जेसन डिकेयर्स के शिल्प प्रदर्शित होंगे जो रीफ और समुद्र की दुर्दशा बयां करेंगे.
कोरल ग्रीनहाउस जॉन ब्रेवर रीफ पर है. एमओयूए के इस सबसे बड़े केंद्र में 20 "रीफ अभिभावक" होंगे. ये वैज्ञानिकों की मूर्तियां हैं जिनको मूंगे की चट्टानों की देखरेख करते और प्रयोगशाला में शोध करते हुए दिखाया गया है.
इसका आकर्षण नया नहीं है. तुर्की के कास में पानी के नीचे कई पुरातात्विक जगहें हैं जहां लोग डूबे हुए शहरों और पत्थर के मक़बरों को देखने आते हैं.
इसराइल के हैफ़ा तट के करीब समुद्र में डूबे नियोलिथिक गांव हैं जहां गोताखोर सबसे पुराने तटीय सुरक्षा दीवार को देखने के लिए गोता लगाते हैं.
समुद्र को आपकी ज़रूरत है
समुद्र के नीचे ऐतिहासिक, प्राकृतिक और कलात्मक आकर्षण होने पर स्थानीय सरकार और टूर ऑपरेटरों की जिम्मेदारी होती है कि वे उनकी सुरक्षा और पर्यावरण का संरक्षण सुनिश्चित करें.
ख़तरा यह है कि कोई साइट बहुत लोकप्रिय हो जाए तो इतने सैलानी जुट जाएंगे कि प्राकृतिक आवास नष्ट होने लगेंगे.
नावों, रास्तों और सैर की निगरानी और नियमों का पालन कराने की ज़रूरत होती है. जागरुक स्कूबा गोताखोर भी अनजाने में उस जगह को नुकसान पहुंचा सकते हैं जहां वे लुत्फ उठाने आए हैं.
स्थायी पर्यटन विकास पर यूनेस्को जैसे संगठनों के अध्ययन से पता चलता है कि बुनियादी सुविधाओं, निगरानी व्यवस्था और सख्त नियम बनाने के बारे में स्थानीय सरकारों और समुदायों को शिक्षित करने में ही समाधान है.
कुछ परियोजनाएं पहले से चालू हैं. वैश्विक निगरानी में वे स्थानीय कारोबार को अपने साथ जोड़ रही हैं. स्कूबा गोताखोरों और शौकिया तैराकों को शिक्षित करके रीफ को बचाया जा रहा है.
मिसाल के लिए, ग्रीन फिन्स पहल ने 2004 में गोताखोरों के बारे में दिशानिर्देश बनाए जिनको 11 देशों और 600 समुद्री पर्यटन कंपनियों ने अपनाया है. इनमें बाली और मिस्र जैसे लोकप्रिय पर्यटन केंद्र भी शामिल हैं.
डॉ. स्टैन्टन कहती हैं, "समुद्र के अंदर पर्यटन के स्थायी विकास के तरीके हैं जिनके सकारात्मक प्रभाव हैं. मिसाल के लिए, तुर्की में कृत्रिम रीफ का निर्माण करके समुद्री जीवन को प्रोत्साहित किया गया है."
समुद्र के नीचे पर्यटन की लोकप्रियता बढ़ रही है ऐसे में हमारे पास मौका है कि नये केंद्र न सिर्फ़ पर्यावरण के स्थायित्व को अहमियत दें बल्कि यात्रियों को रीफ और समुद्री जगत की दुर्दशा के बारे में शिक्षित भी करें.
अगर यह काम अच्छे से किया गया तो यह सैर-सपाटा महासागरों को बचाने में मददगार हो सकता है.
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