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यरुशलम में यहूदियों के मार्च से पहले अल-अक़्सा के पास फिर हुईं हिंसक झड़पें
यरुशलम में इसराइली पुलिस और फ़लस्तीनियों के बीच एक बार फिर झड़पें हुई हैं. बताया गया है कि पुराने शहर में स्थित अल-अक़्सा मस्जिद के पास फ़लस्तीनियों ने इसराइली सुरक्षा बलों पर पत्थरबाज़ी की, जिसके जवाब में उन्होंने भीड़ पर ग्रेनेड दागे.
यह घटना यरुशलम में यहूदियों के नेशनलिस्ट मार्च से पहले हुई है, जिसकी वजह से इलाक़े में तनाव और बढ़ गया है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते तीन दिन से जारी हिंसा में 20 से ज़्यादा इसराइली पुलिसकर्मी और सैकड़ों फ़लस्तीनियों के घायल होने की ख़बर है.
अनुमान है कि सोमवार को यरुशलम दिवस पर होने वाले फ़्लैग मार्च के दौरान शहर में और हिंसा हो सकती है.
क्या है यरुशलम दिवस
यरुशलम दिवस वर्ष 1967 में इसराइल द्वारा पूर्वी-यरुशलम पर क़ब्ज़ा करने की याद में मनाया जाता है और इस अवसर पर यहूदी नौजवान मुस्लिम इलाक़ों से एक मार्च निकालते हैं.
अधिकांश फ़लस्तीनी इसे जानबूझकर उकसाने के लिए की जाने वाली हरकत मानते हैं. इस आयोजन में कई बार हज़ारों की भीड़ देखी गई है.
इस अवसर पर यहूदी लोग पुराने यरुशलम में स्थित वेस्टर्न वॉल तक मार्च करते हैं. वेस्टर्न वॉल को यहूदियों में एक पवित्र स्थल माना जाता है.
सोमवार को इसराइल के सुप्रीम कोर्ट में एक बेदख़ली आदेश के ख़िलाफ़ 70 से अधिक लोगों की अपील पर सुनवाई होनी थी, जिसे हिंसा की हालिया घटनाओं के बाद स्थगित कर दिया गया.
ताज़ा झड़पें अल-अक़्सा मस्जिद परिसर के पास हुई हैं जो पुराने यरुशलम शहर में स्थित है.
इस मस्जिद को मुसलमानों की सबसे पवित्र जगहों में से एक माना जाता है. लेकिन यहूदी उसे टेंपल माउंट कहते रहे हैं और यहूदियों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता रहा है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार, इसराइली पुलिसकर्मियों ने भीड़ पर आँसू गैस के गोले दागे और रबड़ बुलेट का प्रयोग किया.
एक बयान में इसराइली पुलिस ने कहा है कि पुलिसकर्मी टेंपल माउंट और उसके आसपास के इलाक़ों में शांति बहाल करने का प्रयास कर रहे हैं. साथ ही पुराने यरुशलम में जो अशांति फैली है, उसे भी शांत करने की कोशिशें जारी हैं.
यरुशलम में हालांकि पहले भी हिंसा होती रही है. लेकिन शुक्रवार का दिन पिछले कई सालों में हिंसा के मामले में सबसे ख़राब दिनों में से एक रहा.
शुक्रवार रात को रमज़ान के आख़िरी जुमे के मौक़े पर हज़ारों लोग यहाँ जमा हुए थे, जिसके बाद ही शहर में हिंसा शुरू हुई.
यरुशलम के अलावा उत्तरी इसराइल के शहर हइफ़ा और वेस्ट बैंक के शहर रमल्लाह के पास भी हिंसक झड़पें होने की ख़बरें हैं.
नेतन्याहू ने निर्माण कार्य पर दिया ज़ोर
इससे पहले इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने यरुशलम में निर्माण कार्य आगे ना बढ़ाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव को ख़ारिज कर दिया था.
यह निर्माण कार्य उसी जगह पर होना है जिस जगह पर यहूदी अपना दावा करते हैं. फ़लस्तीनियों को यहाँ से निकालने की संभावना को लेकर यहाँ अशांति बढ़ रही है.
नेतन्याहू ने कहा, "हम यरुशलम में निर्माण कार्य ना करने को लेकर बढ़ रहे दबाव को सिरे से ख़ारिज करते हैं. ये दुख की बात है कि हाल के दिनों में इसके लिए दबाव बढ़ा है."
टेलीविज़न पर प्रसारित एक संदेश में उन्होंने कहा, "मैं अपने मित्रों से ये कहना चाहता हूँ कि यरुशलम इसराइल की राजधानी है और जिस तरह हर देश अपनी राजधानी में निर्माण कार्य करता है, उसी तरह हमें भी अपनी राजधानी में निर्माण कार्य करने और यरुशलम को बनाने का अधिकार है. हम यही कर रहे हैं और आगे भी करेंगे."
यरुशलम में शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माँग की जा रही है और कई देशों ने यहाँ जारी हिंसा को लेकर चिंता जताई है.
ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने भी शांति बनाये रखने की अपील की है और कहा है कि "हिंसा, हिंसा को जन्म देती है."
क्या है विवाद?
1967 के मध्य पूर्व युद्ध के बाद इसराइल ने पूर्वी यरुशलम को नियंत्रण में ले लिया था और वो पूरे शहर को अपनी राजधानी मानता है.
हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसका समर्थन नहीं करता. फ़लस्तीनी पूर्वी यरुशलम को भविष्य के एक आज़ाद मुल्क की राजधानी के तौर पर देखते हैं.
पिछले कुछ दिनों से इलाक़े में तनाव बढ़ा है. आरोप है कि ज़मीन के इस हिस्से पर हक़ जताने वाले यहूदी फलस्तीनियों को बेदख़ल करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे लेकर विवाद है.
अक्तूबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक शाखा यूनेस्को के कार्यकारी बोर्ड ने एक विवादित प्रस्ताव को पारित करते हुए कहा था कि यरुशलम में मौजूद ऐतिहासिक अल-अक़्सा मस्जिद पर यहूदियों का कोई दावा नहीं है.
यूनेस्को की कार्यकारी समिति ने यह प्रस्ताव पास किया था.
इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अल-अक़्सा मस्जिद पर मुसलमानों का अधिकार है और यहूदियों से उसका कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है.
जबकि यहूदी उसे टेंपल माउंट कहते रहे हैं और यहूदियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता रहा है.
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