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चीन से नाराज़ ऑस्ट्रेलिया डब्ल्यूटीओ में करेगा शिकायत
चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ समय से व्यापार को लेकर जारी तनातनी अब विश्व व्यापार संगठन के चौखट तक पहुँच रही है.
ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वो उनके यहाँ बनी शराब पर चीन के शुल्क बढ़ाने के ख़िलाफ़ डब्ल्यूटीओ में शिकायत दर्ज करेगा.
चीन ने पिछले साल ऑस्ट्रेलियाई शराब पर 218% तक का टैरिफ़ लागू कर दिया था. उसने ऑस्ट्रेलिया से अपने यहां आने वाले शराब और बीफ़ पर पाबंदी भी लगा दी थी.
दरअसल ऑस्ट्रेलिया ने जब से कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जाँच की बात उठाई है और चीन की कंपनी ख़्वावे को 5जी नेटवर्क बनाने से रोका है तब से दोनों देशों के बीच रिश्ते ख़राब होते चले गए हैं.
चीन का कहना है कि उसने ऑस्ट्रेलिया की शराब पर शुल्क बढ़ाया क्योंकि उसे लगा कि इस कारोबार में भ्रष्ट तरीक़े अपनाए जा रहे हैं.
मगर ऑस्ट्रेलिया चीन के इन आरोपों से इनकार करता है. उसका कहना है कि वह इस मुद्दे को सुलझाने के लिए चीन से सीधे तौर पर बातचीत करने के लिए भी तैयार है.
ऑस्ट्रेलिया के शराब उद्योग के लिए चीन सबसे बड़ा बाज़ार है और उत्पादकों का कहना है कि टैरिफ़ में बढ़ोत्तरी का उन पर बहुत बुरा असर पड़ा है.
चीन का आरोप, डंपिंग करता है ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि इस मामले को विश्व व्यापार संगठन के समक्ष ले जाने का फ़ैसला शराब निर्माताओं के साथ गहन चिंतन और बातचीत के बाद लिया गया है.
व्यापार, पर्यटन और निवेश मंत्री डेन तेहान ने कहा, "सरकार मतभेदों को सुलझाने के लिए विश्व व्यापार संगठन प्रणाली का उपयोग करेगी और ऑस्ट्रेलियाई व्यापारियों के हितों की रक्षा करती रहेगी."
ऑस्ट्रेलिया के अंगूर और शराब उत्पादकों के राष्ट्रीय संघ के सीईओ टोनी बट्टाग्लीन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इस मामले को विश्व व्यापार संगठन के समक्ष रखना इसे सुलझाने के क्रम में सही तरीक़ा था क्योंकि इसका कोई जल्दी हल नहीं मिल रहा था.
उन्होंने कहा, "विश्व व्यापार संगठन की कार्रवाई के बारे में मुख्य बात यह है कि आप वास्तव में दूसरे देश के साथ बातचीत में शामिल होते हैं. इस मामले में चीन है तो ऐसे में सरकारें बातचीत के ज़रिए आगे बढ़कर समाधान की संभावना तलाश सकती हैं."
चीन सरकार ऑस्ट्रेलिया पर व्यापार में डंपिंग नामक प्रथा को अपनाने का आरोप लगाती है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार क़ानून के तहत अवैध है.
डंपिंग तब होती है जब कोई देश किसी उत्पाद को किसी दूसरे देश को उस क़ीमत पर निर्यात करता है जो उसके घरेलू बाज़ार में इससे सस्ती कीमत में बिकती है. इसका उद्देश्य संभवतः विदेशी बाज़ार में अपना हिस्सा बढ़ाना और अपने प्रतिस्पर्धियों को बाज़ार से बाहर कर देना होता है जो उससे महँगी कीमत पर सामान बेचते हैं.
कोरोना वायरस को लेकर बिगड़े संबंध
दोनों देश महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं लेकिन जब से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोविड19 की उत्पत्ति की जांच की मांग की तब से ही दोनों देशों के बीच संबंध ख़राब हो गए.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने बार-बार कहा है कि उनकी सरकार आर्थिक दबाव के आगे झुकेगी नहीं.
बीते साल के अंत में चीन ने ऑस्ट्रेलियाई शराब पर अपने टैरिफ़ की शुरुआत की और कहा कि टैरिफ़ पांच साल तक लागू रह सकते हैं. यह एक ऐसा क़दम था जिसके बाद कई महीनों तक ऑस्ट्रेलिया उत्पादों जैसे जौ, बीफ़ और कोयले पर प्रतिबंध लगाए गए.
व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई वाइनमेकर्स ने दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक चीन को सिर्फ़ नौ मिलियन डॉलर की वाइन चीन भेजी है.
इससे एक साल पहले इतने ही समयांतराल में ऑस्ट्रेलिया से क़रीब 325 मिलियन डॉलर की वाइन चीन को निर्यात हुई थी.
ऑस्ट्रेलिया के विदेशी मामलों और व्यापार के विभाग के अनुसार चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है और पूरी दुनिया से ऑस्ट्रेलिया जितना व्यापार करता है उसके अकेले 29 प्रतिशत व्यापार वो चीन से करता है.
साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया में चीनी निवेश में 61 फ़ीसद की कमी आई है जो कि पिछले छह साल में सबसे कम है.
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