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INDvsNZ: न्यूज़ीलैंड में क्रिकेट मैच देखना लाजवाब क्यों
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, वेलिंग्टन के बेसिन रिजर्व से
- प्रकाशित
सिर्फ ग्यारह हज़ार छह सौ दर्शकों की क्षमता वाला मैदान है वेलिंगटन का बेसिन रिजर्व. लेकिन, सबसे मज़ेदार बात ये है कि ये शहर के बिल्कुल बीच में है.
क्रिकेट फैंस को मैदान तक पहुंचने के लिए किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है.
शनिवार और रविवार को जो दर्शक आए उन्होंने क्रिकेट का लुत्फ उठाने के साथ-साथ अपना वक़्त ऐसे बिताया जैसे मानो वो छुट्टियां बिताने के लिए किसी पयर्टन वाली जगह में गए हैं. क्या भारत में ऐसा नहीं हो सकता है?
स्टेडियम में पुलिस की मौजूदगी कितनी अलग?
हमारे यहां क्रिकेट का मतलब होता है सिर्फ़ खेल देखना और शोर मचाना लेकिन यहां के फैंस खेल देखने के अलावा सामाजिक मेलजोल के लिए भी टेस्ट मैच देखने पहुंचते हैं.
हमारे मैदानों में पुलिस की मौजूदगी आपको या तो डराएगी या परेशान करेगी लेकिन यहां की बात बिल्कुल जुदा है.
एक तो आपको मैदान के आसपास पुलिसकर्मी दिखेंगे ही नहीं और कभी दिख गए तो उनका रवैया इतना दोस्ताना रहेगा कि आप यक़ीन नहीं करेंगे कि आप पुलिस वाले से बातचीत कर रहे हैं!
मैदान पर दर्शकों का बहुत ख्याल रखा जाता है. स्टेडियम के अधिकारी समय-समय पर दर्शकों को सनक्रीम भी देते दिखे ताकि उनकी त्वचा को किसी तरह की परेशानी न झेलनी पड़ी.
बीसीसीआई के लिए सीख
ये इतना संवेदनशील मुल्क है कि आम लोगों के अलावा अगर किसी को थोड़ी सी भी शारीरिक परेशानी हो तो उनके लिए बैठने का ख़ास इंतज़ाम किया जाता है.
यहां तक कि मैनें ये भी देखा कि एक नेत्रहीन फैन जब मैदान में मैच देखने आया तो उनकी मदद के लिए ख़ास वॉलेन्टियर को उनके साथ भेजा गया. ये बातें बीसीसीआई निश्चित तौर पर न्यूज़ीलैंड क्रिकेट से सीख सकती है.
बच्चों के लिए ये टेस्ट मैच मानो किसी ज़बरदस्त मनोरंजन से कम नहीं. मैदान के हर हिस्से में 2-4 बच्चे आपको क्रिकेट खेलते दिख जाएंगे. थोड़ी देर मैच देखेंगे और फिर किसी खिलाड़ी विशेष की शैली की वहीं नक़ल करके वो आपको अपना अभ्यास मैच खेलते दिखाई पड़ जाएंगे.
भारतीय फैंस क्या कर रहे?
भारतीय फैंस के लिए सबसे अच्छी बात है खिलाड़ियों तक उनकी पहुंच. इस मैदान पर बाउंड्री लाइन पर खड़ें होकर भारतीय समर्थक कभी चेतेश्वर पुजारा तो कभी मयंक अग्रवाल का ऑटोग्राफ़ इत्मिनान से लेते दिखे.
इतना ही नहीं थोड़ी सी भी ऊंची आवाज़ में वो अपनी बात को कोहली और उनके साथियों तक पहुंचाते दिखे.
क़रीब 10 साल का एक बच्चा लगातार हाथ में तिरंगे को लेकर कभी कोहली तो कभी अश्विन का अभिवादन करता दिखा.
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया से भी एक ख़ास जत्था इस मैच में भारतीय टीम की हौसला अफज़ाई के लिए पहुंचा है. मशहूर भारत आर्मी की तरह अब 'फैंस इंडिया' की ये नई टीम पूरे दिन ढोल बजाती है, झूमती है, गाने गाती है और कीवी दर्शकों का भी मनोरंजन करती है.
100 नॉट आउट
बहरहाल, स्थानीय दर्शक भी भारतीयों से कम नहीं है. भले ही वो ऊंची आवाज़ में शोर नहीं करते लेकिन आपका ध्यान खींचने के लिए उनका भी अपना निराला अंदाज़ है.
अब देखिए न, अपने मशहूर बल्लेबाज़ रॉस टेलर के सम्मान में क़रीब दो दर्जन दर्शक एक ख़ास किस्म की टी-शर्ट पहनकर आए हैं. 100 NOT OUT. इनका कहना है कि वो टेलर के लिए ख़ास तौर पर अलग-अलग शहरों से आए हैं.
कुल मिलाकर देखी जाए तो मैं ये ज़रूर कहना चाहूंगा कि अगर टेस्ट क्रिकेट का लुत्फ उठाना है तो न्यूज़ीलैंड में आएं.
यहां पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की तरह आपको न भीड़ दिखेगी और न ही आपको उप-महाद्वीप में होने वाली परिचित मुश्किलें ही होंगी.
भारत की हालत टेस्ट में भले ही नाज़ुक है लेकिन भारतीय दर्शकों के लिए मैच देखने का अनुभव बेहद शानदार रहा है.
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