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बिहार एमएलसी चुनाव: बीजेपी के लिए बदली तस्वीर, नवल किशोर यादव हारे, जनसुराज की एंट्री
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
बिहार विधानपरिषद चुनाव में चार शिक्षक निर्वाचन सीट से एक भी मौजूदा एमएलसी अपनी सीट नहीं बचा पाया.
वहीं चार स्नातक निर्वाचन सीट में से तीन सीट के नतीजे आ गए हैं. दरभंगा स्नातक सीट पर बीजेपी उम्मीदवार सर्वेश कुमार बढ़त बनाए हुए हैं. दरभंगा स्नातक सीट पर प्रथम वरीयता के वोटों की गिनती में कोई नतीजा नहीं निकला है.
इन नतीजों में पटना शिक्षक सीट पर नवल किशोर यादव का 30 साल पुराना क़िला ढह गया.
बीजेपी के नवल किशोर को आरजेडी के संजीव कुमार ने शिकस्त दी. कभी आरजेडी में रहे नवल किशोर यादव साल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे.
इस चुनाव की हॉट सीट यानी पटना स्नातक पर नीरज कुमार अपना कब्जा जमाने में सफल रहे. जेडीयू के नीरज कुमार की इस सीट से लगातार चौथी जीत है. मोकामा विधायक अनंत सिंह समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह तीसरे नंबर पर रहे.
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद विधान परिषद में भी जनसुराज की एंट्री हो गई है.
दरभंगा शिक्षक सीट से जनसुराज उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मदन मोहन झा का शिकस्त दी है. वहीं सारण शिक्षक सीट बीजेपी से बाग़ी उम्मीदवार राहुल राज ने निर्दलीय लड़कर जीती है.
आठ सीटों पर पार्टीवार देखें तो बीजेपी ने इस बार दो, आरजेडी ने एक, जेडीयू ने एक, जनसुराज ने एक और निर्दलीय ने दो सीट जीती हैं.
साल 2020 में जब इन सीटों पर चुनाव हुआ था जो बीजेपी दो, जेडीयू एक, सीपीआई एक, कांग्रेस एक और निर्दलीय उम्मीदवारों ने तीन सीटें अपने नाम की थी.
इस चुनाव में एनडीए गठबंधन एकजुट होकर लड़ा, वहीं महागठबंधन में बिखराव दिखा.
रिपोर्ट लिखे जाने तक दरभंगा स्नातक पर कांउटिंग जारी है. हालांकि बीजेपी और जेडीयू के कई नेताओं ने दरभंगा स्नातक से बीजेपी उम्मीदवार सर्वेश कुमार को पहले ही बधाई दे दी है.
75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद की आठ सीटों को लेकर ये चुनाव था.
इसमें चार सीट शिक्षक निर्वाचन और चार सीट स्नातक निर्वाचन की था. पटना स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा स्नातक, दरभंगा शिक्षक, तिरहुत स्नातक, तिरहुत शिक्षक, सारण शिक्षक और कोसी स्नातक.
पटना स्नातक से नीरज कुमार (जेडीयू), पटना शिक्षक से संजीव कुमार (आरजेडी), दरभंगा शिक्षक से सुरेश प्रसाद राय (जनसुराज), तिरहुत स्नातक से वंशीधर ब्रजवासी (निर्दलीय), कोसी शिक्षक से एनके यादव (बीजेपी), तिरहुत शिक्षक से नरेन्द्र प्रसाद सिंह (बीजेपी) और सारण शिक्षक से राहुल राज (निर्दलीय) जीते हैं.
नीरज जीते, अनंत के 'अनुज' तीसरे नंबर पर
इस चुनाव में सबसे ज्यादा नज़र पटना स्नातक सीट पर थी. इस सीट से जेडीयू के नीरज कुमार ने जीत हासिल की.
उन्हें 19,930 वोट मिले, दूसरे नंबर पर आरजेडी के दिलीप कुमार को 15,275 और तीसरे नंबर पर जनसुराज के अनुज सिंह रहे, जिन्हें 11,278 वोट मिले हैं.
अनुज सिंह, मोकामा विधायक अनंत सिंह के समर्थन के कारण चर्चा में आए थे.
मोकामा के मोल्दियार टोले के रहने वाले नीरज कुमार और मोल्दियार से तकरीबन 25 किलोमीटर दूर नदवा गांव के अनंत सिंह के बीच टकराव पुराना है.
इस टकराव की शुरुआत साल 2015 को माना जाता है जब निर्दलीय अनंत सिंह और जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार विधानसभा इलेक्शन में आमने-सामने थे.
विधान परिषद चुनाव में भी नीरज कुमार और अनंत सिंह एक दूसरे पर व्यक्तिगत हमला करते रहे. दोनों के बीच विवाद सुलझाने की ज़िम्मेदारी पार्टी सांसद और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को सौंपी गई थी लेकिन बात नहीं बनी.
इसके बाद अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को जेडीयू ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
बात इतने पर ही नहीं रुकी, नीलम देवी को राज्य स्तरीय कार्यान्वयन समिति से बाहर का रास्ता दिखाया गया. साथ ही नीलम देवी को पटना स्थित सरकारी आवास 25 नवंबर तक ख़ाली करने का आदेश भवन निर्माण विभाग ने दिया है.
वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र बीबीसी न्यूज हिन्दी से कहते हैं, "इस चुनाव में अनंत सिंह की एंट्री को लेकर मीडिया में सरगर्मियाँ रहीं लेकिन हमें ध्यान रखना होगा कि ये विधानसभा चुनाव से अलग होते हैं. इसकी मतदाता सूची लगभग एक साल पहले ही तैयार हो जाती है. जैसे अभी हुए इलेक्शन के लिए सितंबर 2025 में ही नोटिस जारी हुआ था. मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में जो उम्मीदवार जितना ज़्यादा सक्रिय रहता है, उसको चुनाव में उतना ज़्यादा फ़ायदा मिलता है. जैसा नीरज कुमार को मिला."
नवल का 30 साल पुराना क़िला ढहा
पटना स्नातक सीट पर जहां जेडीयू अपनी सीट बचाने में सफल रहा, वहीं पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव हार गए.
विधान परिषद में शिक्षकों के मुद्दे पर मुखर रहने वाले नवल किशोर यादव बीते तीन दशक से इस सीट पर काबिज थे. वो इस सीट पर पहले आरजेडी और बीजेपी के सिंबल पर जीत चुके हैं.
बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी की पहल पर नवल किशोर यादव ने फ़रवरी 2014 में आरजेडी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन की थी.
नवल किशोर यादव को आरजेडी उम्मीदवार संजीव कुमार ने एक हजार से ज़्यादा वोटों से शिकस्त दी है.
कभी जेडीयू में रहे संजीव कुमार ने साल 2025 में आरजेडी ज्वाइन की थी. वो खगड़िया के परबत्ता से विधायक रहे हैं. उनके पिता रामानंद प्रसाद सिंह भी परबत्ता से जेडीयू विधायक रहे थे.
पेशे से डॉक्टर संजीव कुमार की इस जीत पर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद शर्मा कहते हैं, "बिहार में बीजेपी की ज़मीन खिसकने लगी है. बांकीपुर उपचुनाव में पीके की जीत चेतावनी थी. बीजेपी को इसको गंभीरता से लेना होगा वर्ना उसके एक-एक क़िले इसी तरह ढहते रहेंगे. बीजेपी का संकट विपक्ष नहीं बल्कि उसका अपना आत्मविश्वास है. आप देखिए दो महीने के अंदर बिहार बीजेपी को दो झटके लगे है."
यहाँ ये महत्वपूर्ण है कि विधानसभा में बांकीपुर सीट बीजेपी जीतती रही थी जबकि नवल किशोर यादव पटना शिक्षक सीट से आरजेडी के उम्मीदवार के तौर पर भी जीते हैं.
इस जीत ने पार्टी में उत्साह का संचार किया है.
आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन कहते हैं, "बीजेपी पटना शिक्षक हारी है और पटना स्नातक में भी उसे आरजेडी उम्मीदवार दिलीप कुमार ने अच्छी टक्कर दी है. ये हाल तब है जब बीजेपी और जेडीयू सारे सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं. बांकीपुर और पटना शिक्षक में बीजेपी की हार संकेत दे रहा है कि इनका झूठ का क़िला ढह रहा है."
कौन हैं जनसुराज के सुरेश प्रसाद?
पटना शिक्षक और स्नातक के अलावा सारण शिक्षक और दरभंगा शिक्षक के नतीजे भी दिलचस्प रहे.
दरभंगा शिक्षक सीट से जनसुराज ने विधान परिषद में अपना खाता खोल लिया है. पार्टी उम्मीदवार सुरेश प्रसाद ने इस सीट पर कांग्रेस के मदन मोहन झा को हराया है.
पेशे से शिक्षक सुरेश प्रसाद राय ने नौकरी से वीआरएस लेकर चुनाव लड़ा है. साल 2020 में भी उन्होंने दरभंगा शिक्षक सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन मदन मोहन झा ने उन्हें शिकस्त दी थी.
मदन मोहन झा इस सीट से दो बार एमएलसी रह चुके हैं. बिहार कांग्रेस में वो एक प्रमुख चेहरा हैं और प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं.
मूल रूप से समस्तीपुर के रहने वाले सुरेश राय ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "इस सीट पर हमारा लगातार संघर्ष रंग लाया है. अब जब हम जीत गए हैं, तो हमारी प्राथमिकता होगी कि सातवाँ वेतन आयोग शिक्षकों के लिए लागू हो, पुरानी पेंशन की बहाली हो और विश्वविद्यालय की स्वायत्ता पर हो रहे हमलों को रोका जाए. शिक्षकों का हित सबसे ऊपर होगा."
वहीं सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय राहुल राज ने जेडीयू के आनंद पुष्कर को हराया. बीजेपी में रहे राहुल राज ने बाग़ी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा था.
राहुल राज ने स्थानीय मीडिया से कहा, "इस चुनाव की तैयारी विधानसभा चुनाव की तरह एक या डेढ़ महीने में नहीं की जाती. इस चुनाव का वोटर लिस्ट का प्रकाशन जो एक साल पहले हो चुका है, वो अंतिम तैयारी होती है. मैंने लगातार ये काम किया. लेकिन ऐन वक्त में सीपीआई से जेडीयू में आए व्यक्ति को टिकट दे दिया. मेरी मेहनत को कार्यकर्ताओं ने देखा था. बल्कि शिक्षकों ने तो मुझे साढ़े पाँच लाख चंदा देकर मदद की."
हालाँकि बीजेपी ने धांधली के आरोपों से इनकार किया है. बीजेपी के मीडिया हेड दानिश इक़बाल ने कहा कि पहले विपक्ष ईवीएम का रोना रोता था, ये चुनाव तो बैलेट पेपर से हुए हैं.
सातवां वेतनमान- तुरुप का पत्ता
दरअसल अगर इस चुनाव में देखें, तो शिक्षक निर्वाचन सीट से सभी सीटिंग एमएलसी अपना चुनाव हार गए.
दरअसल शिक्षकों में अपने प्रतिनिधियों से कई मुद्दों को लेकर नाराज़गी थी. जिसमें एक बड़ी वजह सातवाँ वेतनमान लागू नहीं होना था.
दो अक्तूबर को शिक्षकों ने इसे लेकर पटना के गर्दनीबाग़ धरनास्थल पर प्रदर्शन भी किया था.
बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन(गोपगुट) के प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पांडेय बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं, "ये पहली बार है जब शिक्षकों के मुद्दे पर चुनाव हुआ है. हर बार उनके मुद्दे बैकफ़ुट पर चले जाते थे. बिहार में चपरासी से लेकर सचिव तक सातवें वेतनमान का लाभ उठा रहे हैं लेकिन राज्यकर्मी घोषित हो चुके छह लाख शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. ऐसे में शिक्षक सीट पर सीटिंग एमएलसी की हार प्रतिनिधियों के लिए चेतावनी है कि हमारे प्रतिनिधियों को शिक्षक हित में काम करना होगा."
नतीजों का बिहार की राजनीति पर असर पड़ेगा?
इस सवाल पर पत्रकार पुष्यमित्र कहते हैं, "सरकार की सेहत पर तो कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन पार्टियों या गठबंधन के भीतर की राजनीति प्रभावित होगी. जैसे बीजेपी शायद आत्ममंथन करे, जेडीयू में नंबर दो की लड़ाई तेज़ होगी, अनंत सिंह का भविष्य तय हो सकता है और अगर विपक्ष की बात करें, तो जनसुराज विपक्ष में एक नया स्पेस बनाने के प्रोसेस में है जिसे इस जीत ने गति दी है."
बीजेपी का कहना है कि इस चुनाव ने ये साबित किया है कि राज्य का बौद्धिक समाज पार्टी के साथ है.
बीजेपी के मीडिया हेड दानिश इक़बाल ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "बीजेपी ने इस चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है. एनडीए ने पाँच सीटें जीती हैं. दरभंगा स्नातक की सीट हम जीतेंगे और सारण शिक्षक में राहुल राज हमारी ही पार्टी के हैं. इस जीत ने ये ज़ाहिर कर दिया है कि बिहार का बौद्धिक समाज हमारे साथ है. अब तेजस्वी धांधली की बात कर रहे हैं लेकिन उनकी पार्टी के संजीव कुमार भी जीते हैं. तेजस्वी पहले ईवीएम का रोना रोते थे, लेकिन अब तो बैलेट से चुनाव हुआ है."
दरअसल बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे. उन्होंने ख़ासतौर पर दरभंगा स्नातक सीट के नतीजे में हो रही देरी का हवाले देते हुए बीजेपी को भी घेरा है.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट पर लिखा है, "हम लोग बीते कई सालों में पहली बार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीते हैं, ये ख़ुशी की बात है. लेकिन इलेक्शन कमीशन की भूमिका में पारदर्शिता की कमी दिखती है. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बहुत कम वोटर होते हैं लेकिन कई जगह पर वोटों की गिनती में देरी हुई. सीसीटीवी की व्यवस्था नहीं थी, सूचनाएँ नहीं मिल रही थीं. दरभंगा स्नातक में 10 फ़ीसदी मत अवैध घोषित किया गया है ताकि हमारे उम्मीदवार को हराया जा सके. चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर नाच रहा है."
दूसरी ओर जेडीयू प्रवक्ता अंजुम आरा का कहना है कि विपक्ष को विक्टिम कार्ड खेलने की आदत हो गई है.
उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में कहा, "आरजेडी और कांग्रेस को आत्ममंथन करने की ज़रूरत है. किसी भी नेता को ईमानदारी से जनता से मिले मतों का क्रिटिकल इवैल्यूएशन करना चाहिए. अगर ऐसा विपक्ष नहीं करेगा तो एक दिन ख़त्म हो जाएगा. ये परिणाम हमारी सरकार के शिक्षकों के लिए किए गए शानदार काम का नतीजा है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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