कितनी फ़िल्मी है 'फ़िल्मिस्तान'?

फ़िल्मिस्तान
    • Author, कोमल नाहटा
    • पदनाम, वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक
  • प्रकाशित

रेटिंग : *1/2

'फ़िल्मिस्तान' कहानी है एक बॉलीवुड के दीवाने और एक्टर बनने की चाह रखने वाले सनी अरोड़ा (शारिब हाशमी) की, जिसे पाकिस्तानी चरमपंथी ग़लती से भारत-पाकिस्तान के सरहद के पास से अग़वा कर लेते हैं.

सनी को बंदी बनाकर रखने के लिए उन्हें कोई जगह नहीं मिलती तो वो उसे पाकिस्तान में एक घर पर क़ैद कर देते हैं.

घर होता है आफ़ताब (इनामुलहक़) का. सनी की दोस्ती आफ़ताब से हो जाती है जो बॉलीवुड फ़िल्मों की पायरेटेड डीवीडी का धंधा करता है.

सनी इस क़ैद से भागने की कोशिश करता है पर दो चरमपंथी महमूद (कुमुद मिश्रा) और जावेद (गोपाल दत्त) उसे पकड़ कर वापस ले आते हैं.

(<link type="page"><caption> फ़िल्म रिव्यू: 'सिटीलाइट्स' की हलचल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/05/140530_citylights_film_review_pkp.shtml" platform="highweb"/></link>)

आफ़ताब, जो अपने पिता (वसीम ख़ान) और छोटे भाई महताब (मास्टर तुषार झा) के साथ घर पर रहता है, उसे पता चलता है कि सनी को बेवजह क़ैद करके रखा गया है और वो सनी से वादा करता है कि वो उसे हिफ़ाज़त के साथ भारत छोड़ देगा.

सनी और आफ़ताब बॉर्डर की तरफ़ निकल जाते हैं ताकि सनी भारत चला जाए. क्या सनी भारत पहुंच पाता है? यही फ़िल्म की कहानी है.

कहानी और पटकथा

निर्देशक नितिन कक्कड़ की कहानी काफ़ी फ़ीकी है और इसकी पटकथा में भी कोई जान नहीं नज़र आती.

फ़िल्मिस्तान

(<link type="page"><caption> रिव्यू:'द एक्सपोज़े'</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/05/140516_film_review_expose_vm.shtml" platform="highweb"/></link>)

ये बात अटपटी लगती है कि क्यों आफ़ताब सनी की मदद करता है जबकि ऐसा करने से उसके बूढ़े बाप और छोटे भाई की जान को ख़तरा हो सकता है.

सबसे अहम बात उन दोनों के बीच कोई इतना मज़बूत रिश्ता भी नहीं होता जिसकी वजह से आफ़ताब ऐसा करे.

(<link type="page"><caption> रिव्यू:'हीरोपंती'</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/05/140523_film_review_heropanti_sb.shtml" platform="highweb"/></link>)

पटकथा में बिल्कुल भी वज़न नहीं है पर हां, कुछ दृश्य ऐसे हैं जिन्हें देखकर दर्शक बहुत ज़ोर से हंसेंगे और कुछ तो उनके दिल में घर कर जाएंगे.

शारिब हाशमी द्वारा लिखे गए संवाद काफी वास्तविक और मज़ेदार हैं.

अभिनय और निर्देशन

शारिब हाशमी 'हीरो' की तरह बिल्कुल नहीं लगते लेकिन उन्होंने सनी का किरदार अच्छा निभाया है.

फ़िल्मिस्तान

वो दर्शकों को बॉलीवुड के अभिनेताओं की मिमिक्री करके बहुत प्रभावित करते हैं.

(<link type="page"><caption> फ़िल्म रिव्यू: कोचेडियान-द लेजेंड</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/05/140523_kochediyan_review_pkp.shtml" platform="highweb"/></link>)

इनामुलहक़ ने 'आफ़ताब' के किरदार को काफ़ी वास्तविक रूप से निभाया है और दर्शकों पर अपने अभिनय की छाप छोड़ देते हैं.

कुमुद मिश्रा ने 'महमूद' का किरदार ठीक ठाक निभाया है और 'जावेद' के किरदार को गोपाल दत्त ने काफ़ी अच्छे तरीक़े से निभाया है.

फ़िल्मिस्तान

नितिन कक्कड़ का निर्देशन उनकी कहानी और पटकथा की ही तरह काफ़ी सीमित दर्शकों को ही अच्छा लगेगा.

कुछ लोगों को जहां फ़िल्म का ड्रामा और कथन का तरीका पसंद आएगा वहीं कई लोगों को ये बेहद बेकार लगेगा क्योंकि इसमें वो मसाला नहीं है जो एक आम फ़िल्म में दर्शक देखना चाहता है.

अरिजीत दत्ता का संगीत ठीक ठाक है और रविन्द्र रंधावा के गीत बहुत औसत हैं.

कुल मिलाकर फ़िल्मिस्तान समाज के एक सीमित हिस्से को ही पसंद आएगी.

<bold>(बीबीसी हिंदी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. </bold><bold>आप हमें </bold><bold><link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>