फ़िल्म रिव्यू: कितनी दमदार है 'मर्दानी'?

'मर्दानी'
    • Author, मयंक शेखर
    • पदनाम, वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

रेटिंग: *1/2

'मर्दानी' जो संदेश देना चाहती है वो इसके क्लाइमेक्स में ही सबके सामने आ पाता है.

रानी मुखर्जी मार-धाड़ करने वाली 'ऐक्शन क्वीन' किसी कोण से नज़र नहीं आतीं, लेकिन कैमरा यदा-कदा उनके नन्हे-मुन्ने बाइसेप्स दिखाता रहता है.

आख़िर में वह गन फेंक देती हैं और एक दुबले-पतले सिक्स पैक ऐब्स से युक्त खलनायक को मार-मारकर धूल चटा देती हैं. उसके बाद शुरू होते हैं उनके वन लाइनर्स, जिनमें वो ऊंची-ऊंची आवाज़ में डायलॉगबाज़ी करती हैं.

रानी के लात-घूंसे

'मर्दानी'

फ़िल्म का खलनायक (ताहिर राज भसीन) ड्रग्स और औरतों के देह व्यापार में लिप्त एक गुट का सरगना है.

रानी मुखर्जी एक बहादुर पुलिस अफ़सर है जो औरतों पर जुल्म कर रहे अपराधियों का भुर्ता बनाने के मिशन में निकली हैं.

सलमान ख़ान और अजय देवगन की तरह रानी को लात घूंसे चलाते देखकर कुछ दर्शकों को ज़रूर मज़ा आएगा.

मर्दानी की रानी, 'दबंग' और 'सिंघम' की क्रॉस ब्रीड लगती है. हालांकि पर्दे पर उन्हें देखकर ये विश्वास करना ज़रा मुश्किल है लेकिन फ़िल्म में ऐसा ही बताया गया है कि वह कुख्यात गुंडों को सड़क पर मार-मारकर चकनाचूर कर सकती हैं.

ऊबाऊ फ़िल्म

'मर्दानी'

हालांकि रानी का मर्दानी अवतार फ़िल्म के आख़िर में ही नज़र आता है लेकिन तब तक आप फ़िल्म को झेल लेंगे ये बड़ा सवाल है?

अगर आप मर्दानी को आख़िर तक झेल सकते हैं, तब आप ज़िंदगी के बेहद उबाऊ लम्हों को भी बहादुरी से झेलने का माद्दा रखते होंगे.

इस जॉनर की फ़िल्मों को एक जबरदस्त प्लॉट की ज़रूरत होती है. इसमें ऐसा नहीं है. पटकथा में कई बेतुके सबप्लॉट ठूंसे गए हैं.

कहानी

'मर्दानी'

रानी मुंबई क्राइम ब्रांच की एक पुलिस इंस्पेक्टर हैं. उनकी गोद ली हुई बच्ची को अगवा कर लिया जाता है.

बेटी की खोज में उनका सामना होता है देह व्यापार में संलिप्त एक गुट से जिसकी जड़ें मुंबई से दिल्ली तक फैली हुई हैं और कई बड़े राजनेता उसमें शामिल हैं.

कुछ पांडुओं (सहायकों) की मदद से रानी अकेले ही पूरे गिरोह से लोहा लेती हैं.

अतार्किक फ़िल्म

'मर्दानी'

वह अपराधियों की जड़ें खोदने के लिए एक ऑटो ड्राइवर के भेस में काम करती हैं.

क्या आपको लगता है कि ऑटो चलाने वाली महिला पर किसी का ख़ास ध्यान नहीं जाएगा. लेकिन बॉलीवुड में सब चलता है.

रानी और खलनायक के बीच चूहे बिल्ली का खेल पूरी फ़िल्म में चलता रहता है और आख़िर में जाकर रानी जब खलनायक को धूल चटाती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.

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