हाथियों को कैसे मिली उन्हें पकड़ने की ख़बर?

कर्नाटक में हाथी पकड़ने का अभियान
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

बीते एक दशक के दौरान भारत में जंगली हाथियों को पकड़ने के लिए शुरू किया गया सबसे बड़ा अभियान नाकामी की दहलीज़ पर खड़ा है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि हाथियों के बेहतरीन संवाद कौशल और संवेदनशीलता के कारण उन्हें पकड़ने में दिक्कत हो रही है.

क़रीब एक सप्ताह पहले इस अभियान की शुरुआत दक्षिणी राज्य कर्नाटक में हासन ज़िले के अलूर गांव में 23-30 हाथियों को पकड़ने के लिए की गई.

ये हाथी दशकों से स्थानीय लोगों के लिए ख़तरा बने हुए हैं. हाथी फसलों को काफ़ी नुक़सान पहुंचाते हैं और कई किसानों को मार चुके हैं.

ऐसे में वन विभाग ने हाथियों के साथ मनुष्यों के इस टकराव को हमेशा के लिए ख़त्म करने का फ़ैसला किया. लेकिन <link type="page"><caption> वन विभाग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140204_elephant_capturing_in_karnataka_aa.shtml" platform="highweb"/></link> की क़रीब 100 लोगों की टीम एक हफ़्ते से अधिक समय तक जंगलों में जूझती रही और केवल दो हाथियों को ही पकड़ सकी.

कवायद

इनमें एक हाथी दांत वाला है जबकि दूसरा बिना दांत वाला नर है.

बीते सप्ताह 10 पालतू हाथियों के साथ इस कवायद की शुरुआत हुई. पालतू हाथियों को साथ में इसलिए रखा गया ताकि बिगड़ैल हाथियों को पकड़ने में मदद मिले.

कर्नाटक में हाथी पकड़ने का अभियान

लेकिन इस अभियान की शुरुआत होते ही जंगली हाथी हेमवती नदी को पार करके पड़ोस के ज़िले कोडागू में चले गए.

चीफ़ वाइल्डलाइफ़ वार्डन विनय लूथरा ने बीबीसी को बताया, "हाथी काफी संवेदनशील होते हैं और वो आपस में अजीब तरह से बातचीत करते हैं.

जब दस पालतू हाथी जंगल में आए तो शायद उन्हें एहसास हो गया होगा और वो कोडागू के जंगलों में चले गए."

लूथरा ने बताया, "दस पालतू हाथियों में से चार हाथी ऐसे थे जिन्हें इसी इलाक़े से पकड़ा गया था और उन्हें कई साल पहले प्रशिक्षित किया गया था."

हेमवती नदी के बहाव को बदलने के लिए बांध बनाने से पहले तक कोडागू के जंगल अलूर से मिले हुए थे.

'बातचीत में माहिर'

बेंगलूर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस में एशियाई हाथियों के विशेषज्ञ रमण सुकुमार ने बताया, "हाथी लो फिक्वेंसी की आवाज़ के ज़रिए बातचीत करते हैं, लेकिन उस इलाक़े में किसी ख़तरे के बारे में दूसरे हाथियों को जानकारी देने की उनकी क्षमता काफ़ी विकसित है."

उन्होंने कहा, "हाथी अपने पुराने ठिकाने को आसानी से पहचान सकते है. उनकी याददाश्त बहुत तेज़ होती है. उनके पास केमिकल मैमोरी होती है और शायद उनकी आवाज़ में उसकी झलक होती है."

कर्नाटक में हाथियों को पकड़ने का अभियान

हासन ज़िले के वन संरक्षक जी वी रंगा राव ने बताया, "हमें दोनों <link type="page"><caption> हाथियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131008_elephant_story_part_four_aj.shtml" platform="highweb"/></link> को पकड़ने के लिए नदी पार करनी पड़ी. सोमवार को हमने दांत वाले हाथी को पकड़ा. हमने उसे बेहोश कर दिया और उसके बाद पालतू हाथियों ने उसे खींच लिया."

इन हाथियों को अब नागरहोल रिजर्व फ़ॉरेस्ट भेज दिया गया है.

उन्होंने बताया कि हाथी को पकड़ने के बाद उसे ट्रक में लादने और नागरहोल पहुंचने में एक दिन लग गया.

रंगा राव ने बताया कि बिना दांत वाले नर हाथी को गुरुवार को भेजा गया. अब हाथियों को पकड़ने का अभियान दो दिन बाद दोबारा शुरू किया जाएगा.

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