बीजेपी को कश्मीर में इनसे है उम्मीद

जम्मू कश्मीर चुनावों में भाग ले रहे भाजपा उम्मीदवार
    • Author, रियाज़ मसरूर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में 25 नवंबर से होने वाले विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 87 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है.

बीजेपी की 45 उम्मीदवारों की पहली सूची में 14 मुसलमान हैं.

स्थानीय पत्रकार रियाज़ मसरूर ने भाजपा के कुछ उम्मीदवारों से बात करके उनकी संभावनाओं का जायज़ा लिया.

डॉक्टर हिना बट, अमीरा कदाल, श्रीनगर

डॉक्टर हिना शफी भट

31 साल की हिना पेशे से डेंटल सर्जन हैं. डॉक्टरी का पेशा छोड़कर सियासी मैदान में उतरने वाली डॉक्टर हिना कदाल कहती हैं कि वे बीजेपी के टिकट पर श्रीनगर के अमीरा कदाल निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव इसलिए लड़ रही हैं क्योंकि उन्हें अपनी जीत पर पूरा भरोसा है.

उनका कहना है, "मैं एक सेक्यूलर नागरिक हूं और बीजेपी की जीत से कश्मीर का सेक्यूलरिज़्म और मजबूत होगा."

हिना कहती हैं, "जम्मू-कश्मीर में बीजेपी जात-पात या धर्म के नाम पर चुनाव नहीं लड़ेगी. बीजेपी सांप्रदायिक नहीं है. आप गुजरात की बात करते हैं. वे सारे केस कोर्ट में खारिज हो चुके हैं. आप गुजरात का विकास देखिए. वहां के मुसलमानों का भी विकास देखिए. ये सब तो कांग्रेस का दुष्प्रचार है."

मोदी का स्लोगन

पत्रकारों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

उन्होंने कहा, "कश्मीर इस वक्त हरा रेगिस्तान है और बीजेपी की सरकार कश्मीर में विकास की एक नई विचारधारा को जन्म देगी."

डॉक्टर हिना पूर्व विधायक शफी बट की बेटी हैं. शफी बट नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक़ अब्दुल्लाह के खास दोस्त रह चुके हैं. जम्मू कश्मीर की सभी पार्टियों के बारे में हिना कहती हैं कि उन्होंने 1947 से ही कश्मीरियों का शोषण किया है.

उनका कहना है, "मोदी जी का स्लोगन मुझे पसंद आया. वह सब का विकास, सब का साथ चाहते हैं." मुसलमान होने के नाते क्या उनको बीजेपी से जुड़ने पर डर लगता है?

इस पर हिना का जवाब होता है कि वह कश्मीर की एक बेटी हैं और उनको अपने लोगों से डरने की कोई जरूरत नहीं है. वह कहती हैं, "मुझे अल्लाह पर पूरा भरोसा है. हां, अगर किसी को मेरी वजह से खतरा महसूस हो और मुझे डराने की कोशिश करे तो अलग बात है."

फयाज़ अहमद बट, देवसर, अनंतनाग

फयाज़ अहमद भट

45 साल के फयाज़ अहमद बट पेशे से कारोबारी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वह कई बार आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बाद उनको लगता है कि इस बार वह जरूर जीत जाएंगे.

बट कहते हैं कि इस्लाम ने उनको सिखाया है कि जो कुछ भी होता है, वो अल्लाह की मर्जी से होता है. उनका कहना है, "जब तक मैं लोगों की भलाई के लिए काम करता रहूंगा तब तक मुझे डरने की जरूरत नहीं है."

बीजेपी का टिकट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

बट समझाते हैं कि कश्मीरी युवकों ने अगर कभी बंदूक भी उठाई तो वो भी यहां के नेताओं के शोषण का नतीजा है. वह कहते हैं, "यहां के राजनीतिक दल दरअसल कंपनियां हैं. ये लोग जनता को बेवकूफ बनाते हैं."

इस बार आपको इतना पक्का यकीन क्यों है कि बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत जाएंगे?

वह कहते हैं, "बीजेपी जनता की पार्टी है. इस पार्टी में लोकतंत्र है. खानदानी राज नहीं है. कल तक राजनाथ जी अध्यक्ष थे. आज अमित शाह हैं और कल कोई और होगा. कांग्रेस, पीडीपी या नेशनल कांफ्रेंस को देखिए. ये सब खानदानी राज की कड़ियां हैं."

मलिक मुश्ताक नूराबादी, नूराबाद, अनंतनाग

मलिक मुश्ताक नूराबादी

अनंतनाग के नूराबाद निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर किस्मत आजमा रहे मलिक मुश्ताक नूराबादी महज 37 साल के हैं. 1997 में जब मुश्ताक अहमद बीजेपी में शामिल हुए थे तब वह 19 साल के थे.

ये वो ज़माना था जब कश्मीर में चरमपंथियों का दबदबा था और कई इलाकों में भारत का समर्थन करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या होती थी. मुश्ताक ने तब से बीजेपी टिकट पर कई चुनाव लड़े.

भाजपा समर्थक

लेकिन वह कहते हैं, "हारने का ज़माना चला गया. अब तो जीत हमारी होगी." मुश्ताक का कहना है कि उनको बीजेपी की लीडरशिप पर भरोसा है कि पूरे भारत और कश्मीर में वो बदलाव आएगा जो छह दशकों में भी नहीं आया था.

ये पूछने पर कि क्या उन्हें मुस्लिम बहुमत वाले राज्य में बीजेपी के नेता कहलाने में डर लगता है? मुश्ताक कहते हैं, "अगर कोई लाठी से मारेगा, हमारा काम है उसे समझाना. हम लोग ऐक्टिविस्ट हैं, शांति के प्रचारक हैं, हम को कोई खतरा नहीं."

मोती लाल कौल, हब्बा कदाल, श्रीनगर

मोती लाल कौल

एशिया, अफ्रीका और यूरोप में कारोबार कर चुके 62 साल के मोती लाल कौल पुराने श्रीनगर के फतेह कदाल में जन्मे हैं. 1970 में वह जम्मू चले गए और वहां से वह अलग-अलग बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कई पदों पर रहे.

मोती कौल खालिस कश्मीरी बोलते हैं और उन प्रवासी कश्मीरी पंडितों की बात करते हैं जो घर लौटना चाहते हैं.

कौल कहते हैं, "यहां की जनता अब राजनीतिक षड्यंत्रों को समझ रही है. यही हमारा हथियार है. लोग अब भावनाओं में नहीं बहते, वे नतीजे देखेते हैं. बीजेपी ऐसी पार्टी है जो नतीजे दे चुकी है."

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