कश्मीर में किसके हाथ लगेगी बाज़ी?

भारतीय जनता पार्टी, जम्मू-कश्मीर
    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से
  • प्रकाशित

भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) ने पहले केंद्र में, फिर महाराष्ट्र और हरियाणा में सरकार बनाने के बाद भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में पूर्ण बहुमत पाने का लक्ष्य रखा.

पाँच चरणों तक चले मतदान के ख़त्म होने के बाद राजनीतिक हलक़ों के साथ ही आम लोगों में भी यह चर्चा गर्म है कि जम्मू-कश्मीर में किसकी सरकार बनेगी?

कई लोगों का मानना है कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) सबसे अधिक सीटें पा सकती हैं. वहीं कुछ विश्लेषक बीजेपी के दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की संभावना जता रहे हैं.

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कश्मीर, चुनाव, बैनर, पोस्टर

कश्मीर में 40 दिनों का 'चिल्ले-कलान' शुरू हो गया है यानी वो चालीस दिन जब सर्दियां और ठंड चरम पर होती हैं. लेकिन ठिठुरती घाटी में जहां तापमान माइनस तीन डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है, चाय की दुकानों, सड़कों के किनारे खड़े लोगों, घरों और दफ़्तरों में चर्चा इसपर गर्म है कि अगली हुकूमत किसकी होगी!

आबी गुज़र मोहल्ले की एक गली में चाय के ठेले पर अधेड़ उम्र के ग़ुलाम नबी और उनके कुछ साथी खड़े होकर चाय की चुस्कियां ले रहे हैं.

ग़ुलाम नबी कहते हैं, "पीडीपी यहां गवर्नमेंट फ़ॉर्म करेगी. कांग्रेस के स्पोर्ट से तो हो सकता है ये."

'पीडीपी आगे, बीजेपी पीछे'

यहाँ से कुछ दूरी पर है श्रीनगर का लाल चौक. वहीं रविवार की ख़रीदारी करने निकले ज़हूर अहमद और ऑटो रिक्शा चलाने वाले मेहराजुद्दीन की राय भी यही है.

हालांकि उसी बाज़ार में मौजूद ठेकेदार मुज़फ़्फ़र अहमद नेशनल कांफ्रेस की सरकार की उम्मीद बांधे हैं.

सरकार पीडीपी की बनेगी ये राय आम है हालांकि सी-वोटर के एक्ज़िट पोल में पीडीपी बीजेपी से पीछे है जबकि टीवी चैनल न्यूज़ नेशन कांग्रेस को 23 सीटें दे रहा है.

बीजेपी को सीटों के मामले में नंबर दो पर रखा जा रहा है. लेकिन बात हो रही है कि किसी भी राजनीतिक दल को बहुमत हासिल नहीं होगा.

'दूसरी बड़ी पार्टी'

बीजेपी के लिए, जिसे 2008 के चुनाव में 15.22 फ़ीसद वोट और ग्यारह सीटें मिली थीं, मुस्लिम बाहुल्य जम्मू-कश्मीर में दूसरी पार्टी बनकर उभरना एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी.

तो कौन किसके साथ गठबंधन कर सकता है?

उर्दू दैनिक 'चट्टान' के चीफ़ एडिटर ताहिर मोहियु्द्दीन कहते हैं कि किसका गठबंधन किसके साथ बन सकता है "ये मामला खुला है."

उनके मुताबिक़, "सिर्फ़ दो गठबंधन नहीं बन सकते हैं पीडीपी और एनसी साथ नहीं जा सकते और कांग्रेस और बीजेपी गठबंधन में शामिल नहीं हो सकते हैं."

गठबंधन के ख़िलाफ़

कई आम लोग पीडीपी बीजेपी गठबंधन के ज़बरदस्त ख़िलाफ़ हैं, कम से कम कश्मीर घाटी में तो ज़रूर.

अब्दुर रशीद कहते हैं कि अगर पीडीपी बीजेपी के साथ जाती है तो लोगों को ये पसंद नहीं आएगा.

बीजेपी हमेशा से धारा 370 को समाप्त करने की बात करती रही है. जो कश्मीर के लोग अपनी अलग पहचान और भारत के साथ जुड़ाव के लिए बहुत अहम मानते हैं.

हालात ऐसे बने कि कश्मीर में उनके एक उम्मीदवार हिना भट्ट तक ने कह दिया कि अगर धारा 370 हटा तो वो बंदूक़ उठा लेंगी.

साथ आने के दबाव

राजनीतिक विश्लेषक अल्ताफ़ हुसैन राज्य के मूड को देखते हुए कहते हैं, "हालात जिस तरह के हैं उसमें शायद पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस के साथ आने का भी दबाव बन जाए तो कोई ताज्जुब नहीं."

हालांकि वो बार-बार इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ये सब बातें 'अगर' को ध्यान में रखकर की जा रही है तो हालात तो 23 दिसंबर को ही साफ़ होंगे जब रिज़ल्ट की घोषणा होगी.

हालांकि वो कांग्रेस और पीडीपी को 'एक दूसरे के सहयोगी' मानते हैं और कहते हैं कि अगर पीडीपी, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों को चंद छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाती है तो वो उसके लिए लंबे समय में बेहतर होगा.

'कांग्रेस को नहीं कर सकते ख़ारिज'

पीडीपी और कांग्रेस साल 2002 में भी साझा सरकार बना चुके हैं.

'कश्मीर इमेजेज़' के संपादक बशीर मंज़र बार-बार इस बात को दुहराते हैं कि लोग कांग्रेस को जिस तरह से ख़ारिज कर रहे हैं वो उससे सहमत नहीं हैं.

बशीर मंज़र के मुताबिक़ ऐसे हालात बन सकते हैं कि पीडीपी और कांग्रेस साथ मिलकर हुकूमत बना लें.

लेकिन ताहिर मोहियु्द्दीन कहते हैं कि कांग्रेस के साथ जाने में पीडीपी के लिए दिक़्क़ते पैदा होंगी.

वो कहते हैं, "बाढ़ से तबाह हो चुके कश्मीर के पुर्ननिर्माण जैसे कामों के लिए पीडीपी को केंद्र से भारी आर्थिक मदद की ज़रूरत पड़ेगी और पार्टी में कुछ लोगों को लगता है कि अगर वो कांग्रेस के साथ जाते हैं तो उन्हें ये सहायता मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है."

पाकिस्तान से रिश्ते

हाउस बोट के मालिक अब्दुस सलाम से लेकर दुकान लगाने वाले अरशद और जो दूसरे कई लोगों से बातें हुई तो उनकी नई सरकार से मांगें और उम्मीदें अलग-अलग थीं - पुर्निनिर्माण से लेकर पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्तों की.

लेकिन उनमें से ज़्यादातर ने वही कहा कि सैलाब से तबाह कश्मीर को फिर से दुरूस्त करने की ज़रूरत है.

कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि बीजेपी उमर अब्दुल्लाह के साथ मिलकर सरकार बना सकती है.

हालांकि ऐसे लोगों की तादाद कम है लेकिन वो तर्क देते हैं कि एनसी पहले बीजेपी के साथ गठबंधन में रही है और उमर अब्दुल्लाह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.

मगर बशीर मंज़र का कहना है कि बीजेपी और एनसी मिलकर भी शायद इतनी सीटें न ला पाएं कि ये हालात बनें.

जनता का फ़ायदा

यहाँ आम ख़्याल ये है कि पीडीपी, बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाएगी और फिर पुर्ननिर्माण का काम तेज़ी से बढ़ाने की कोशिश करेगी जो बाढ़ से तबाह हुए जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है. फिर वो लोगों से ये कह सकती है कि देखो इस पार्टी के साथ जाने का फ़ायदा जनता को हुआ है.

कुछ पहले का उदाहरण देते हैं कि मुफ़्ती मोहम्मद सईद वीपी सिंह सरकार में केंद्रीय गृहमंत्री थे जिसे बीजेपी का समर्थन हासिल था.

ज़हूर, कश्मीरी युवक, भारत
इमेज कैप्शन, ज़हूर को लगता है कि पीडीपी सरकार बनाने में सफल रहेगी.

कश्मीर में हिंसा के दौर में भारत का गृह मंत्री बनना अधिकांश कश्मीरियों को बेहद नापसंद थी लेकिन बाद में वो सूबे के मुख्यमंत्री बने और आज राज्य के वोटरों का एक समुदाय उनके पक्ष में खड़ा नज़र आ रहा है.

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