ओबामा के गिर्द सुरक्षा के सात घेरे

बराक ओबामा
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अमरीकी राष्ट्रपति के भारत दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.

बताया गया है कि उनके चारों ओर सात परत वाली सुरक्षा होगी. कैसी होती है 'सेवन लेयर सिक्यूरिटी', बता रहे हैं सुरक्षा मामलों के जानकार और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह.

आम तौर पर सात स्तरों की सुरक्षा नहीं होती है लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति आ रहे हैं इसलिए भारतीय और अमरीकी, दोनों सुरक्षाकर्मियों का घेरा उनके चारों ओर होगा.

ये दोनों मिलाकर सात हो रहे हैं.

इन सात घेरों में कहाँ कौन तैनात होगा, ये तो भारत सरकार ने नहीं बताया है और बताना भी नहीं चाहिए.

ये एक तरह का चक्रव्यूह है जिसे पार करके ही कोई ओबामा तक पहुंच सकता है.

इस चक्रव्यूह में किस स्तर पर किसे रखा गया है इसकी जानकारी गोपनीय रखी जाती है.

तालमेल

नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा

आम तौर पर एक बाहरी सुरक्षा घेरा होता है एक बीच का होता है और एक अंदरूनी होता है. यही तीन घेरे होते हैं.

ओबामा के लिए सात सुरक्षा चक्र हैं जिसमें दो तो ज़रूर ही अमरीकी स्पेशल एजेंटों का घेरा होगा.

भारत कुछ अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए इसे तीन से बढ़ाकर पांच कर दिया है जिसमें हो सकता है एक में एनएसजी हो, एक में पारामिल्ट्री फोर्स हो, एक में दिल्ली पुलिस हो, एक में हो सकता है आईबी के जासूस हों.

तो ऐसा लगता है कि चार या पांच घेरे भारत की सुरक्षा एजेंसियों के है इसलिए ये सात स्तरीय हो गई है. आवश्यकता इस बात की है कि इन सातों में तालमेल होना चाहिए.

बिल क्लिंटन और जॉर्ज बुश के वक्त परिस्थितयां अलग थी. उस वक्त वे एक राजकीय यात्रा पर आए थे और उस वक़्त उनकी सरकारी व्यस्तताएँ थीं.

अभूतपूर्व

गणतंत्र दिवस परेड

लेकिन राष्ट्रपति ओबामा राजपथ पर परेड के दौरान कम से कम डेढ़ घंटे तो बैठेंगे ही इसलिए डेढ़ घंटे अमरीकी राष्ट्रपति का खुले में बैठना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है.

इस मायने में उनकी सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व है जिस तरह से भारत में चरमपंथी हमलों का ख़तरा बना रहता है उससे यह जरूरी भी है.

ऐसी सुरक्षा व्यवस्था हर उस जगह पर होगी जहां ओबामा होंगे या गुज़रेंगे.

(बीबीसी संवाददाता समीरात्मज मिश्र से बातचीत पर आधारित)

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