दिल्ली के बाद बिहार में 'आप' की उम्मीदें

आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल
    • Author, नीरज सहाय
    • पदनाम, पटना से बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली भारी जीत से एक ओर जहां सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड में उत्साह है, वहीं मुख्य विपक्षी भाजपा ने इस पर नपी-तुली प्रतिक्रिया दी है.

'आप' भले ही दिल्ली में सरकार बना रही है लेकिन बिहार में इसका कोई ठोस संगठनात्मक ढांचा भी तैयार नहीं है.

इसके बावजूद इस पार्टी ने क़रीब आठ महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में कामयाबी के सपने देखने शुरू कर दिए हैं.

समझौता या गठजोड़

आम आदमी पार्टी के समर्थक

आप के बिहार राज्य प्रचार समिति के पूर्व संयोजक बसंत कुमार चौधरी दावा करते हैं, "बिहार की सभी मुख्य पार्टियां अपनी विश्वसनीयता खो चुकी हैं. उस रिक्तता को हम भरेंगे."

वे कहते हैं, "बिहार में मुख्य विरोधी दल बनने में पार्टी को अधिक समय नहीं लगेगा. भले ही राज्य में पार्टी कार्यालय या कोई समिति न हो, लेकिन यहां के लोगों के दिलों में हम बसते हैं."

आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन के सवाल पर बसंत कहते हैं, "यहां किसी दल से समझौता या गठजोड़ नहीं करेंगे. आम लोगों की लड़ाई हम अकेले ही लड़ेंगे."

जीत का असर

जीतन राम मांझी
इमेज कैप्शन, मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को पार्टी से निष्काषित किए जाने के बाद जेडीयू का राजनीतिक संकट बढ़ गया है.

वहीं सत्तारूढ़ जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता वशिष्ठ नारायण सिंह कहते हैं कि दिल्ली में 'आप' की जीत का असर बिहार में भी दिखेगा.

उन्होंने कहा, "दिल्ली में बिहार के पूर्वांचल क्षेत्र के लोगों ने जो सांकेतिक जनादेश दिया है, उससे लगता है कि यहां हमें जीत मिलेगी."

सिंह दावा करते हैं कि "आप से हमारा ज़मीनी स्तर पर समझौता हो गया है."

लेकिन समाजवादियों की विलय प्रक्रिया में 'आप' को शामिल करने की संभावना के सवाल को वे टाल जाते हैं.

'नीतीश की प्रासंगिकता'

लालू यादव, नीतीश कुमार

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता विनोद नारायण झा कहते हैं, "'आप' को मिले बड़े जनादेश ने विरोधी दलों को भाजपा पर निशाना साधने का मौका तो दिया है लेकिन उन्हें यह भी मानना होगा कि लालू से मिलने के बाद बिहार में प्रथम पंक्ति के नेता समझे जाने वाले नीतीश कुमार की प्रासंगिता खत्म हो गई है."

वे कहते हैं, "वहां के परिणाम का कोई असर राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा."

आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल

झा बताते हैं कि जब लगभग एक महीने पहले हरियाणा चुनाव का कोई असर 50 किलोमीटर दूर दिल्ली पर नहीं पड़ा तो हज़ार किलोमीटर दूर बिहार में यह चुनाव क्या असर दिखाएगा. परिणाम से हम हतोत्साहित नहीं हैं."

उन्होंने कहा, "बिहार का मामला अलग है. राज्य में भाजपा की अपनी साख है."

एक चुनाव परिणाम का असर कई बार बेहद तात्कालिक होता है लेकिन राजनीतिक दल अपने अपने ढ़ंग से बड़ी उम्मीदें बांधने लगते हैं.

अब देखना यह है कि बिहार में क़रीब आठ महीने बाद होने वाले चुनाव के दौरान यहां की जनता किसका सपना तोड़ती है और किसका बुनती है.

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