वॉक आउट के बीच भू-अधिग्रहण बिल पारित

भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध
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विपक्ष के भारी शोर शराबे और वॉकआउट के बीच भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है.

लोकसभा में विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने संशोधन के गिरने के बाद सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी के आरोप लगाए और उसके सदस्य नारे लगाते हुए सदन से चले गए.

इसके पहले बीजू जनता दल के सदस्यों ने भी सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया और सदन के बाहर चले गए थे.

भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और दूसरे दलों के कई सदस्यों ने विधेयक पर कई संशोधन प्रस्ताव रखे. ज़्यादातर संशोधन प्रस्ताव ध्वनि मत से ही गिर गए. कुछ संशोधनों पर मत विभाजन हुआ तो वे भी गिर गए.

अकाली दल ने अपने पहले के संशोधन को वापस ले लिया. पार्टी ने कहा कि उसके संशोधन को सरकार ने अपने संशोधन में शामिल कर लिया.

राहुल पर कटाक्ष

इसके पहले ग्रामीण विकास मंत्री बीरेंद्र सिंह ने भूमि अधिग्रहण विधेयक पर लचीला रुख अपनाने का आश्वासन दिया था.

राहुल गांधी, उपाध्यक्ष, कांग्रेस

उन्होंने कहा, “राजनीतक दलों, किसान संगठनों समेत समाज के सभी तबकों की राय के बाद ही सरकार ने संशोधन विधेयक तैयार किया है. हम इसके बाद और सुझाव भी खुले मन से सुनने को तैयार हैं.”

लगातार हो रही टोका टोकी और शोरशराबे के बीच बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बग़ैर उन पर कटाक्ष किया.

सिंह ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में हरियाणा में 65,000 हेक्टायर ज़मीन का अधिग्रहण किया गया. इसमें से 35,000 हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण कारपोरेट घरानों के लिए किया गया.

वीरेंद्र सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री

सिंह ने कहा, “भट्टा परसौल पर तो कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया, पर हरियाणा में हुए इस अधिग्रहण पर पार्टी चुप रही.”

उन्होंने तत्कालीन हरियाणा सरकार पर चोट करते हुए कहा, "पूरे देश में पिछले कुछ वर्षों में सात लाख हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण किया गया, इसका छह फ़ीसदी से ज़्यादा अधिग्रहण हरियाणा में हुआ. इस राज्य में पूरे देश की ज़मीन का सिर्फ दो प्रतिशत है, अधिग्रहण हुआ छह प्रतिशत, वह भी बड़ी कंपनियों के हित के लिए.

भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध

ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा, “खेती घाटे का सौदा नहीं होना चाहिए. खेतीबाड़ी पर लोगों की निर्भरता, इस क्षेत्र में रोज़गार और सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगातार कम हो रहा है. इसे रोकना होगा.”

बीरेंद्र सिंह ने कहा कि सभी राज्यों ने अभी भी किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए व्यवस्था नहीं की है और दावा किया कि उसकी व्यवस्था विधेयक में की जा रही है.

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