90 साल के अब्दुल सूफ़ी अब कहाँ जाएँ?

कश्मीर, बाढ़
    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, कश्मीर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में घाटी के कई इलाक़े लगातार दूसरे साल बाढ़ का ख़तरा झेल रहे हैं. वहाँ लोग घबराए हुए है और अफ़रा-तफ़री में घर खाली कर सुरक्षित जगहों पर भाग रहे हैं.

जो लोग पिछली सितंबर में बाढ़ से तबाह हो गए थे, उनकी हालत सबसे दयनीय है.

उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह के अनुसार झेलम नदी का पानी कई जगहों पर बाढ़ की चेतावनी के निशान के ऊपर चला गया है. नालों में पानी का बहाव तेज़ है और सरकार ने तीन नियंत्रण केंद्र बनाए हैं.

'तब मकान बहा, अब फिर भागेंगे'

कश्मीर, बाढ़

श्रीनगर के छतबल में रहने वाले 90 साल के अब्दुल रहीम सूफ़ी का मकान पिछली बार की बाढ़ में बह गया था. अाजकल सोफी अपनी 75 साल की बीवी मुग़लई के साथ किराये के मकान में हैं.

कश्मीर, बाढ़

पिछली बार के बाढ़ की तबाही को याद करते हुए सूफ़ी कहते हैं," बाढ़ आई तो हम अपना घर छोड़ कर भाग गये थे. हमारे मकान की दीवारें पहले अंदर से गिर गई थी जिस के बाद मकान में रखा हमारा सारा सामान तबाह हो गया. अपना घर छोड़ने के बाद हम तीन दिन तक भूखे प्यासे ठोकरें खाते रहे."

वे बताते हैं, "इसके बाद हम एक दूसरे किराये के मकान में रहने लगे. अब हम अपने मुहल्ले में वापस आ गये हैं लेकिन हमारे पास अपना घर नहीं है. आज फिर बाढ़ की हालत देख यहां से भागने की तैयारी में हैं."

मुग़लई बेगम

सूफ़ी की पत्नी मुग़लई सितंबर की भयानक बाढ़ को याद करते हुए कहती हैं," जब पानी हमारे घर के अंदर आया था तो ऐसा लगा कि ये हमारा आख़िरी दिन है. मुझे लोगों ने नाव में बिठाया और दूसरे इलाके में ले गये."

कश्मीर, बाढ़

वो बताती हैं, "हर तरफ अफ़रा तफ़री थी. हर घर मैं पानी घुस रहा था. नाव में चलते चलते एक जगह हम डूब गये थे, लेकिन खुदा ने किसी तरह हमे बचा लिया. आज फिर कहा जा रहा है कि बाढ़ आएगी पर अब हम कहा जायें. अपना मकान भी नहीं रहा. एक और बाढ़ से लड़ने की हिम्मत नहीं रही."

छतबल के ही ग़ुलाम नबी के मकान में कल रात ही पानी दाखिल हो चुका है. पिछले वर्ष की बाढ़ ने गुलाम नबी को तबाह कर दिया था. आज फिर वह अपने घर को छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं.

'दो मंज़िले पानी में थीं, शादी का सामान न बचा'

कश्मीर बाढ़

उनका कहना है," जब सितंबर में बाढ़ आई थी तो पता नहीं चला की मकान की दो मंज़िलों तक पानी कैसे पहुंच गया. हम कोई भी सामान बचा नहीं सके थे. मेरी बेटी की शादी उन्ही दिनों थी और शादी की एक भी चीज़ हम बचा नहीं पाये थे. अब मकान में फिर पानी दाखिल हो गया है.''

पिछली बाढ़ में जब गुलाम नबी घर से भागे थे तो उनके परिवार को चार दिन तक भूखा रहना पड़ा और एक महीने के बाद ही वो अपने घर वापस आ सके थे.

उन दिनों में उन्हें एक कप चाय पीने के लिए भी कई किलोमीटर का सफ़र तय करना पड़ता था. अब वो यह सोच कर खौफ में हैं कि फिर उसी तरह दिन गुजारने होंगे.

लाल चौक, श्रीनगर, कश्मीर

ऐसे लोगों की फेहरिस्त बहुत लंबी है जो पिछली बाढ़ की मुसीबत से ही नहीं उबर पाए हैं.

बेमिना इलाक़े में रहने वाले एजाज़ अहमद पिछली बार अपना घर तो छोड़ गए लेकिन ऐसी जगह फंस गए जहां से निकलने के लिए उन्हे खुद नाव बनानी पड़ी.

इस बार वो एक रिश्तेदार के यहां पहुंचे हैं. बाढ़ के डर से वो सहमे हुए हैं.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>