सरकार बचाई मसर्रत नहीं?

मसर्रत आलम
इमेज कैप्शन, शुक्रवार सुबह मसर्रत आलम को ग़ैर क़ानूनी गतिविधियों के लिए गिरफ़्तार कर लिया गया.
    • Author, बशीर मंज़र
    • पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

अलगाववादी नेता मसर्रत आलम बट की गिरफ़्तारी के साथ ऐसा लग रहा है जैसे पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार एक और संकट से बच गई है.

हालांकि पिछले महीने बट की रिहाई से गठबंधन सहयोगियों के बीच ख़ासा तनाव पैदा हो गया था.

उस वक़्त पीडीपी नेताओं ने यह कहकर संकट टाल दिया था कि उन्हें अदालत के आदेश पर छोड़ा गया है.

इस बार मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद के पास अपनी बात मनवाने के 'रास्ते पर आओ या रास्ता नापो' वाले रवैये को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था.

श्रीनगर में 15 अप्रैल को हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली गिलानी के स्वागत में हुर्रियत नेताओं और मसर्रत आलम द्वारा आयोजित रैली में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए गए थे और झंडे फहराए गए थे.

इस घटना का भाजपा के आधार क्षेत्र जम्मू में काफ़ी विरोध हुआ था.

बीजेपी की नाराज़गी

पाकिस्तानी झंडा
इमेज कैप्शन, श्रीनगर में अलगाववादियों की रैली में पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाज़ी की गई.

हालांकि मुफ़्ती ने इस बार भी इस मुद्दे को दबाने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र विचारों की लड़ाई है और अलगाववादियों को भी अपने विचार रखने की आज़ादी होनी चाहिए, लेकिन भाजपा के दवाब में उन्हें भी कहना ही पड़ा कि, "कुछ बातों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है."

उनका इशारा पाकिस्तान समर्थक नारों की ओर ही था.

गुरुवार को भाजपा नेता राम माधव ने कहा था कि उनकी पार्टी भारत विरोधी ताक़तों को जम्मू-कश्मीर में फलने फूलने की इजाज़त देने के लिए सरकार में शामिल नहीं हुई है.

जम्मू में नाराज़गी

भाजपा के मज़बूत गढ़ जम्मू में भी लोगों में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने वालों से निपटने में सरकारी की 'नाकामी' के प्रति ग़हरा रोष था.

भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर पार्टी नेताओं पर मुख्यमंत्री पर दबाव बनाने के लिए मजबूर किया.

प्रोफ़ेसर हरि ओम पुरी जैसे शीर्ष नेता और विचारक भी इससे दुखी थे.

ओम ने तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर, मुफ़्ती सईद को खुला छोड़ने का आरोप लगाया, 'जोकि अलगाववादियों को मज़बूत कर रहे हैं.'

अपने पत्र में ओम ने भाजपा को सरकार से बाहर आ जाने की सलाह दी थी.

त्राल में एनकाउंटर

कश्मीर में प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, सरकार ने त्राल में अलगाववादियों की रैली को मंज़ूरी नहीं दी है.

गिलानी ने दक्षिणी कश्मीर के त्राल में एक विवादास्पद एनकाउंटर में दो युवाओं की मौत के विरोध में शुक्रवार को त्राल की ओर मार्च करने का आह्वान किया था.

हालांकि, गुरुवार की शाम को ही राज्य सरकार ने कहा था कि ऐसे किसी मार्च की इजाज़त नहीं दी जाएगी और त्राल की ओर जाने पर रोक की घोषणा कर दी.

इसी फ़ैसले के बाद गिलानी को नज़रबंद किया गया है और मसर्रत आलम को गिरफ़्तार किया गया है.

पुलिस ने पंद्रह अप्रैल को ही इन दोनों नेताओं समेत अन्य अलगाववादियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया था.

(ये राजनीतिक विश्लेषक बशीर मंज़र के अपने विचार हैं.)

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